Saturday, 25 February 2017

Maya "The Unfold Love Story" CHAPTER-8


माया और राहुल एक साथ बिना कुछ बोले आगे बढ़े जा रहे थे... जो माया हमेशा अकड़ कर चलती थी..आज उसकी body language  एक दम अलग थी...
नज़रे नीची करके दुपट्टे को सम्हालते हुए चल रही थी और राहुल तो ऐसे चल रहा था
कि उसके बगल में कोई है ही नहीं...उसको कोई माया के साथ ना देख ले...पीहूं दूर से दोनो को देख रही थी...उनको देख कर हल्का सा मुस्करायी और शॉप के अंदर आ गई...
उधर राहुल औऱ माया रेस्तरां में दाखिल होते है....रेस्तरां में अंदर की तरफ एक छोटा सा हॉल और था...
राहुल ने सीधे उसी तरफ का रूख किया शायद वो चाहता ही नहीं था कि माया को उसके साथ कोई देखे... या फिर वो माया को लेकर protective हो रहा था.. क्योंकि छोटे शहरों में एक लड़का और लड़की का अकेले रेस्तरां भी जाना अच्छा नहीं माना जाता था...माया राहुल की हरकतों को देखकर यहीं सोचती जा रही थी...

राहुल ने बड़े ही प्यार से माया के लिए कुर्सी को खींचा..औऱ उसकों बैठने के लिए बोला.. माया के मन में तो आज लड़्डू फूट रह थे... उसको लग रहा था... बस आज ये पल यही रूक जाएं .. वो औऱ उसका राहुल बीच में कोई नहीं..... माया भी धीमी सी मुस्कान के साथ बैठ गयी.. माया की धड़कने तेज हो रही थी.. उसको लगा क्या राहुल माया के बगल में बैठने वाला है... ऐसा हुआ तो मैं क्या करूंगी लेकिन thankfully  ऐसा कुछ नहीं हुआ राहुल माया के सामने वाली चेयर पर बैठ गया और  वेटर को बुलाया
राहुल- सुन भई  प्लेन दोसा मिलेगा क्या इस वक्त
वेटर – जी हां
राहुल – माया तुम्हारे लिए क्या मंगाऊ
माया- मैं भी यहीं खा लूंगी
राहुल – ok done  राहुल ने वेटर को एक दोसा लाने का ऑर्डर देते हुए बोला
आप पहले एक ले आओं फिर हम कुछ ऑडर करेंगे...
वेटर – ok sir
वेटर के जाते ही.. राहुल माया की तरफ रूख करता है... और पूछता है कैसी हो माया ..
माया- बस राहुल सब एक दम बढ़िया
राहुल – तुम्हारा प्ले था ना कल कैसा हुआ
माया- तुम्हें कैसे पता.. मैने तो तुम्हें बताया नहीं था
राहुल – तुम्हारे पैर की चोट कैसी है
माया राहुल के इस सवाल को सुनकर ठिठक सी गयी थी
माया- तुम्हें कैसे पता मुझे चोट लगी है
राहुल – यार मैं कुछ बोलता नहीं अपने काम में बीजी रहता हूं पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं की मैं कुछ जानता नहीं... रूम पर तेरे जो दोस्त है उन्हीं से पता चला...
माया- thank you  इतना concern  दिखाने के लिए...
माया का thank you  भी आज राहुल के जैसा ही बेरूखा सा था...उसको समझ ही  नहीं आ रहा था कि क्या बोले.. माया के अंदर हलचल तेज हो रही थी... मन ही मन सोचने लगी वो.... अच्छा तो इसलिए मुझे लाया है ये यहां he must be feel bad for me ... या फिर आज propose  करेगा....माया राहुल की शक्ल देख रही थी...औऱ राहुल अपने मोबाइल में लगा हुआ था...माया का दिल हुआ आज राहुल से पूछ ही ले कि तुम मुझसे प्यार करते हो...या नहीं...माया राहुल के सामने एक दम comfortable नहीं थी... उसको लग रहा था... कब दोसा आए वो खाएं औऱ चली जाएं..माया मन ही मन बोले जा रही थी... लड़कियां इसी को date  बोलती है...कितना boring होता है... ऐसे date  पर जाने से तो लाख गुना अच्छी मेरी मंडली है जिसके साथ मैं फन करती हूं...माया के ख्यालों पर रोक लगाते हुए राहुल ने बीच में बोला ... औऱ तुम्हारें घर में कौन कौन है...
माया- बस 3 भाई मां पापा और मैं
राहुल – ग्रेट तुमने आगे क्या सोचा है कॉलेज के बाद क्या करोगी...
माया- अभी तक सोचा नहीं बस इतना पता है मुझे metro cities में जाना है वहीं ज़ॉब करनी है...
वेटर दोसा लेकर आ गया... उसने जैसे ही प्लेट टेबल पर रखी माया के चेहरे पर अजीब से भाव आ गए...उसने वेटर को देखा औऱ बोला भइया पेपर दोसा नहीं प्लेन दोसा मांगा था ये क्या है..
वेटर – मैम सर यहीं खाते है इसी को प्लेन दोसा बोलते है...
माया – ok  तुम जाओं
राहुल – माया की शक्ल देखता ही रह गया.. और हंसते हुए बोला...क्यों तुम्हें पेपर दोसा पसंद नहीं है...ये देखों इसको उठाओं और दूरबीन की तरह आखों पर लगाओ सामने वाला काफी पास दिखता है.... इतना कहकर राहुल पेपर दोसे के रोल को अपनी आखों के पास ले जाकर माया को देखने लगा... माया की नजरें राहुल से टकरायी...वो उस पल में भी राहुल की नजरे पढ़ लेना चाहती थी... क्या यही प्यार है...राहुल ने माया का हाथ पकड़ा और बोला अब तुम इसको उठाओं और देखो इससे मैं कैसा दिख रहा हूं... माया सुनकर हंसने लगी..
माया भी दोसे के रोल से राहुल को देखने लगी और राहुल भी हंसने लगा...माया औऱ राहुल की हरकते वहां बैठे दो couple देखकर मुस्कुराने लगे...माया की नज़र जैसे ही उन पर पड़ी उसने दोसे को प्लेट पर रख दिया... औऱ राहुल की तरफ प्लेट कर दिया और बोला तुम खाओं राहुल...तुम्हें भूख लगी होगी.....
राहुल – क्यों तू नहीं खाएंगी.. तुझे पंसद नहीं है...
माया- पंसद है लेकिन I love spicy
राहुल – अच्छा तभी तू इतनी तीखी है...कह कर राहुल धीरे हंस दिया
माया- अच्छा तुमसे तो कभी मैने कुछ बोला ही नहीं तीखा फिर तुम्हें कैसे पता
राहुल – जिनके तू दिन भर मजे लेती रहती है वो मेरे ही हॉस्टल में रहते है...
माया राहुल की बात सुनकर हंसने लगी...
राहुल ने वेटर को आवाज दी
वेटर- जी सर
राहुल – मैम को ये पंसद नहीं आया तुम उनके लिए मसाला पापड़ लाओ with extra मिर्ची
वेटर – ओके सर
माया – अरे तुमने क्यों ऑडर किया.. मुझे भूख नहीं है.. मैं तो बस तुम्हें company  आयी हूं ..
राहुल – जानता हूं इसिलिए मसाला पापड़ मंगाया है मैने एक दम तेरी तरह तीखा... कह कर राहुल हंसने लगा....
माया को अब भी समझ नहीं आ रहा था... कि राहुल से वो पूछे या ना पूछें पता नहीं राहुल उसके बारे में क्या सोचेगा..
वेटर मसाला पापड़ लेकर आया साथ में एक कोटरी हरी मिर्च भी ... माया ने वेटर को घूर कर देखा....और बोल अब क्या मैं इतनी मिर्ची खाउंगी....
राहुल माया की बात सुनकर हंसने लगा... औऱ वेटर को जाने बोला...अगर तेरा दिल आ गया मिर्ची पर तो उसको फिर से लाना पड़ता माफ कर दे उसे.. अब खा ले यार ..तू खाएगी तो मैं भी खाउंगा...
माया राहुल की बात सुनकर हवा में उड़ने लगी थी... माया ने पापड़ का प्लेट भी राहुल की तरफ कर दिया तुम टेस्ट तो कर लो इसको .. राहुल ने माया को देखा और दोसे की पहली बाइट उसने माया को offer कर दी...
माया राहुल के इस अंदाज को देख कर एक दम हैरान थी...वो चाहती थी... ये पल यहीं रूक जाएं.... माया इस एक पल में हजारों पल जीना चाहती थी...पता नहीं राहुल के इस gesture को प्यार कहते है या फिर कुछ औऱ लेकिन माया के लिए तो यहीं प्यार था....माया अब राहुल से कुछ नहीं पूछना चाहती थी...वो मन ही मन खुश थी... माया राहुल लंच करके बाहर आ गए...
राहुल- माया अब मैं चलू अपना ध्यान रखना मुझे कुछ जरूरी काम है...
माया- ओके राहुल thanks for the masala papad
राहुल ने हल्की सी मुस्कान के साथ माया को bye बोला और आगे बढ़ गया....
माया  पीहूं के पास जाने के लिए आगे बढ़ गयी...
 Location -Photostat shop
माया जैसे ही शॉप के अंदर दाखिल हुई..पीहूं पीहूं बोलकर चिल्लने लगी...पीहूं नरेंद्र के साथ बैठकर चैट कर रही थी... माया ने नरेंद्र को देखा और बोलने लगी...
माया- तुम्हारें पास कोई काम नहीं है ना जब तक देखों तब तफरी.. हद है...अच्छा सुना ना नरेंद्र मुझे तुमसे कुछ पूंछना है ...
नरेंद्र माया की बात सुनकर हंसने लगा... खुद तो DATE  से आ रही है... और मुझे ज्ञान दे रही है... अच्छा बता क्या पूछना है...
माया- अगर तूने सहीं सही बता दिया तो तुझे एक चॉकलेट और नहीं बता पाया तो तू मुझे 5 चॉकलेट देगा.. बोल मंजूर...
नरेंद्र ने माया को घूरा और बोलने लगा..तू डेट पर गयी थी या मुझे परेशान करने का नया तरीका खोजने..
माया- मैने जो पूछा है वो बता..
नरेंद्र- अच्छा चल पूछ ले मेरी मां
माया- तेरे सर में कितने बाल है..
नरेंद्र- झूठा गुस्सा दिखाते हुए.. मुझे पता था तू कुछ ऐसा ही बोलने वाली है ...
क्या हा डेट पर ये बता सवाल जवाब तो हम करते रहेंगे
पीहूं  भी माया के कान के पास आयी और धीरे से बोली क्या बात है आज राहुल ने बोल दिया क्या पीहूं की बात सुनकर माया शरमा गयी लेकिन अगले ही पल इशारें से पीहूं की बात को नकार दिया..
नरेंद्र- बता ना माया कैसी रही डेट
माया- अच्छा पहले तू बता मेरे सवाल का जवाब
नरेंद्र- अच्छा कल मैं अपने बाल कटवा दूंगा तुम गिन लेना
माया- छीं छीं छीं तुम कितने cheap हो
नरेंद्र हंसने लगा.. और बोला तू मुझसे 5 चॉकलेट ले लेना पर ऐसे ही हंसती रहा कर तेरा उदास चेहरा अच्छा नहीं लगता..........माया नरेंद्र की बात सुनकर हंसने लगी... पीहूं के साथ बाहर आ गई...
पीहूं – बताएगी.. वहां क्या हुआ
माया- (उछलते कुदते हुए ) हां बताउंगी लेकिन पहले कॉलेज के अंदर चलो मुझे तेज तेज कुछ बोलना है....और अच्छी बात ये है कि आज कॉलेज के अंदर कोई नहीं होगा सिर्फ हॉस्टल की लड़कियां ही होंगी.. चल अंदर जल्दी मुझे फिर वापस भी जाना है... कल प्ले के चक्कर में मैं कोचिंग नहीं गई थी... लेकिन आज से रेगुलर जाना है.... माया पीहूं का हाथ खींच कर बोलते हुए कॉलेज के अंदर दाखिल हो गई...माया झूम झूम कर कूद कूद कर पीहूं के समाने नाचने लगी...
पीहूं – माया क्या हुआ है बता ना उसने तुझे प्रपोज़ किया क्या बोल ना उसने तुझसे अपने दिल की बात कह क्या
माया- एक दम से रूक गई और अपने आपको normal करते हुए पीहूं से बोला ऐसा कुछ भी नहीं है पीहूं ना उसने मुझसे अपने दिलकी बात कही... ना मेरे दिल की बात सुनी...लेकिन फिर भी मैं आज बहुत खुश हूं...आज का दिन मैं कभी नहीं भूलूंगी... माया कहकर मुस्कुराने लगी
पीहूं – ok फिर हुआ क्या बताएगी.. पीहूं के सवाल पर माया ने एक एक बात उसको बता दी.. फिर बोला मुझे सबसे अच्छा क्या लगा जानती हूं.. पीहूं
पीहूं- बता क्या
माया- उसने पीछे से मेरी खबर रखी.. मेरे साथ इतना टाइम spend किया.. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो मुझसे प्यार करें या ना करें... actually मैने आज सोचा मुझे राहुल से प्यार व्यार होता ही नहीं.. अगर मुझे पता होता कि उसकी gf है... मुझे राहुल से प्यार ही नहीं होता अगर वो मुझे as a friend  treat  करता जैसे बाकी सब करते है.... पीहूं मुझे उससे प्यार होता ही नहीं अगर वो आधी अधूरी बाते नहीं करता... मुझे उससे प्यार होता ही नहीं अगर वो सबके जैसा मस्तीखोर होता ...मुझे उससे प्यार होता ही नहीं अगर वो मुझसे आराम से बाते करता.. माया बिना रूके बोले जा रही थी.... और उसके चेहरे की हंसी...धीरे धीरे गायब हो गयी थी और आखों में आंसू भर गए थे.... माया अब भी नहीं रूकी थी...  वो बोलती गई  BOSS अब तो प्यार हो गया है और ये मेरा पहला प्यार है ये बात अलग है कि अब तक एकतरफा है... लेकिन प्यार तो प्यार होता है...अपने पहले प्यार को मैं सिर्फ इसलिए बिलकुल नहीं भूल सकती कि वो मुझसे प्यार नहीं करता... प्यार तो प्रदीप भी तुमसे करता है फिर भी तुम दुखी हो जाती हो... मेरे प्यार के साथ तो ऐसी कोई condition ही नहीं है... जो भी करना है मुझे करना है...so I m  chill now…..
पीहूं माया की बात सुने जा रही थी और माया के चेहरे को पढ़े जा रही थी...माया का चेहरा एक दम शांत हो गया था.. आंखों से आसूं गिरना बंद हो गए थे.. उसके चेहरे पर एक इत्मिनान था...
माया- पीहूं अब मैं कोशिश करूंगी की मैं राहुल को फोन ना करू ना तंग करूं... उसको जब लगेगा तो वो खुद बात कर लेगा... मुझे अब खुद पर फोकस करना है....मुझे पहले अपने प्यार के काबिल बनना है.. look at him वो life  को लेकर कितना सीरियस है अपने पैरों पर खड़ा है...और एक मैं हूं सिर्फ तफरी करती रहती हूं... उसको मुझसे प्यार कैसे होगा.. पहले मैं इस काबिल तो बनूं...
माया की बाते पीहूं बड़े ध्यान से सुन रही थी...आज माया के चेहरे पर एक अलग ही विश्वास था... पीहूं ने माया को इतना progressive mood  में कभी नहीं देखा था....
माया- तुम मुझे ऐसे क्यों घूर रही हो.. मैने कुछ गलत बोला है क्या
पीहूं- नहीं बस देख रही हूं राहुल ने ऐसा क्या कर दिया तेरे साथ कि तू एक दम से बदल गयी ..
माया पीहूं की बात सुनकर हंसने लगी.... नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है.... मैं बस किसी का भी प्यार  भीख में नहीं चाहती.. मैं इस काबिल बन जाना चाहती हूं कि...वो खुद मेरे पास आएगा वैसे भी  किसी ने कहा है.... 
प्यार करते हो जिसे मुक्त कर दो उसे
प्यार को तोलने की तराजू यहीं
मोहब्बत का मारा चला आएगा 
ना आए तो समझो तुम्हारा नहीं.......
to be continued


   

Friday, 24 February 2017

Missing maya and her love story

Hi guyz
Missing maya......thinking about maya .... now what next in her love story

Keep reading maya will back tommrow with her love ❤️ 😍Hope maya got her love in upcoming
Episode
So keep follow the tulikaki kalam se
Follow the #Maya_The_Unfold LOve Story 

Thursday, 23 February 2017

Maya "The Unfold Love Story" Chapter-7


माया अपनी पहली क्लास में बिलकुल भी थकी सी नहीं दिखना चाहती थी... वो बच्चों के सामने एक दम फ्रेश दिखना चाहती थी... उसने अपना चेहरा रूमाल से साफ किया डीयो स्प्रे किया और चेहरे पर एक झूठी मुस्कान के साथ क्लास में दाखिल हो गयी...लेकिन माया अपने दिमाग पर काबू नहीं कर पा रही थी...राहुल
की बाते और पैर का दर्द माया के झूठी मुस्कान पर हॉवी होती जा रही थी... माया ने किस तरह अपना क्लास खत्म किया और घर के लिए निकल गयी
घर पहुंच कर माया ने किसी से कोई हंसी मजाक नहीं किया... बड़े ही गंभीरता से उसने राधा से बोला
माया- मां आज मैं खाना नहीं खाउंगी पेट नहीं ठीक है.. और थक गई हूं कल मेरा प्ले भी है... मुझे सोना है कल जल्दी उठना होगा...
माया की बाते सुनकर राधा ने आज माया से कोई सवाल नहीं किया खाना प्लेट में ढक कर रख दिया और बोल दिया जब भूख लगे खा लेना सो जाओं तो कल फिर फ्रेश रहोगी... पैर का दर्द कैसा है..
माया- मां बस दर्द है कल तक नहीं ठीक हुआ तो डॉक्टर को दिखा दूंगी.. इतना कहकर माया अपने कमरे की लाइट बंद कर दीवार की तरफ मुंह करके लेट गई...लेकिन माया के अंदर का दर्द उसको सोने ही नहीं दे रहा था.... माया बिना आवाज किए रोये जा रही थी....उसके आंसू रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थे... माया का चेहरा रो रो कर लाल हो चुका था....उसके दिल में बस एक ख्याल था कि.. राहुल ने उससे इतनी बेरूखी से क्यों बात की... मेरी क्या गलती थी.... राहुल मेरे बारे में क्या सोचता है खुल कर बता दे मैं कौन सा उससे जबरदस्ती कह दूंगी मुझसे प्यार करों... मैं प्यार करती हूं ये मेरी मर्जी है....माया रोएं जा रही थी... और मन ही मन खुद से सवाल करती जा रही थी...
माया को रत्ना की बात याद आने लगी... कहीं सच में रत्ना की आह तो नहीं लग गई मुझे.. मैने उसका मजाक बनाया था आज मैं खुद एक मजाक बन कर रह गई हूं...एक पल में माया ने खुद को सम्हाला  अपने आसूंओं को पोछा...और खुद को डाटनें लगी... रत्ना के साथ मेरी कोई तुलना है क्या.... मेरा प्यार इन सबसे ऊपर है..बस दुख है तो इतना राहुल मुझसे साफ साफ क्यों कह नहीं देता... सोचते सोचते माया सो गई.....
NEXT DAY MORNING
 सुबह के 10 बज गए थे...माया  अब तक नहीं उठी थी....राधा किचन से ही माया को आवाज लगा रही थी... माया उठों अरे कॉलेज नहीं जाना क्या आज तो तुम्हारा प्ले है... माया उठ जा बेटा
माया दर्द से कराहते हुए उठी उसके पैरो की सूजन बढ़ गई थी...उसका बदन एक दम तप रहा था....
राधा – माया तबियत कैसी है
माया- ठीक है मां
राधा- हम लोगो को कितने बजे पहुंचना है
माया- शाम  5 बजे
राधा- ठीक है बेटा तुम कब निकलोगी
माया- बस मां थोड़ी देर में निकलूंगी....
माया ने खुद को सम्हाला...और बिस्तर से उठी....तैयार हो कर घर से बाहर निकल गयी... लेकिन आज माया से साइकिल नहीं चल रही थी.. उसने थोड़ी दूर चलाया... लेकिन पैर ने जवाब दे दिया था... माया ने चुपचाप साइकिल लॉक किया औऱ ऑटों से कॉलेज के लिए निकल गयी..

आज माया का मन बहुत उदास था....उसका दिल हो रहा था कि.. कालेज जाने से पहले राहुल को फोन कर ले और पूछ ही ले आखिर तुमने मेरे साथ इतनी बेरूखी से बात क्यों की....माया फोटोस्टेट की शॉप पर ऑटो से उतरी और  कॉलेज की तरफ बढने लगी...तभी माया ने दूर से राहुल को देख लिया...उसका मन हुआ कि वहीं से चीख कर राहुल को आवाज लगाए...लेकिन उसने ऐसा नहीं किया...

कुछ ही पल में राहुल उसके बहुत करीब आ गया था... माया ने भी अपना आत्म सम्मान इकट्ठा किया और ऐसे SHOW करने लगी जैसो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता तुम मेरे सामने भी आ जाओं तो ... लेकिन मन ही मन माया चाह रही थी कि राहुल उसके पास आएं और उससे बाते करें...मायाकी बात शायद सच होने वाली थी... राहुल माया की आंखो के सामने था.... लेकिन उसने माया को सिर्फ हैलो बोला और फोटोस्टेट की शॉप में चला गया जाते जाते बोल गया मैं तुझसे आराम से बात करता हूं.. माया ने भी खुद को बेफिकर दिखाते हुए बोला  its ok  go carry on your work माया बोलकर कॉलेज की तरफ बढ़ गयी....लेकिन अब माया के अंदर का दर्द और बढ़ गया था.. माया राहुल की इस बेपरवाही को समझ ही नहीं पा रही थी...की उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है......माया सोचते सोचते स्टेज की तरफ बढ़ गयी...

माया को देखते ही वहां पर मौजूद सबने एक साथ बोला... अरे देखों हमारा रावण आ गया...कब से तेरे इंतजार में बैठे है हम तू आए और मुझे उड़ा कर ले जाएं.... बड़े ही शायराना अंदाज में सीता ने कहा.....माया तेज से हंसने लगी...और कहने लगी ऐसा पहली बार होगा जब सीता रावण के इंतजार में बैठी होगी.. कब रावण आएं और मैं राम को छोड़कर चली जाऊं...
माया की बात सुनकर सब हंसने लगे.... माया ने चारों तरफ नजर दौड़ायी..उसको पीहूं कहीं नजर नहीं आ रही थी...माया धीरे धीरे ग्रीन रूम की तरफ बढ़ गयी ...ग्रीन रूम में नजारा ऐसा था.. जैसे रामायण के सभी पात्र जीवित हो गए थे...माया की नजर पीहूं पर पड़ी.. अबे तुम कब की आयी हो... हम तुम्हे बाहर खोज रहे थे... वैसे एक दम मस्त शुपनखा लग रही हो...माया पीहूं को देखकर बोल ही रही थी.. की दूसरे कोने से तेज आवाज आयी... रावण आ जाओं अब सिर्फ तुम बची हो... अपना कॉस्ट्यूम पहन लो....माया ने जी मैम बोला... पीहूं को रूकने को बोला...और चली गयी...थोड़ी देर बाद  माया तैयार हो कर आयी....चेहरा पूरा लंबी दाढ़ी से ढका हुआ... काले रंग की धोती.. कंधे तक घुंघराले बाल सर पर नग से जड़ा हुआ मुकुट लाला रंग का अंग वस्त्र...माया का मेकअप ऐसा था... कि अगर माया मुंह ना खोले तो कोई पहचान ना पाए माया लड़की है या लड़का... लेकिन माया की आंखों में दर्द वहीं चिरपरिचित सा था...पीहूं.. माया को निहारे जा रही थी...
पीहूं- माया कल कुछ हुआ क्या बाद में भी... तुम्हारा पैर कैसा है ..
माया- मैं एक दम ठीक हूं और मेरे पैर भी अपनी करनी का फल भुगत रहे है....माया ने बहुत ही बेरूखी भरे अंदाज में पीहूं को जवाब दिया
पीहूं- क्या हुआ तू ठीक है ना
माया- हां पीहूं मैं बिलकुल ठीक हूं...मुझे कुछ नहीं हुआ है...
पीहूं ने माया का हाथ पकड़ा और पकड़ते ही तेजी से हटा लिया...
पीहूं – माया तुझे तो FIVER  है...
माया- यार वो पैर के फोड़े की वजह से है... आज तो टाइम मिलगा नहीं कल जाउंगी डॉक्टर के पास मैने फीवर की दवा खा ली है....
पीहूं- झूठ बोल रही है तू
माया- सच बोल कर भी क्या कर लूंगी यार.. सच बोलने का ही नतीजा है आज मैं इतना दुखी हूं..
पीहूं- क्या हुआ  बताएगी
माया- कुछ नहीं यार अब मैं सिर्फ रावण हूं माया फिकी हंसी के साथ तेज तेज हंसने लगी...
पीहूं – माया तुमने कुछ खाया है
माया- नहीं आज कुछ नहीं पहले प्ले हो जाए अच्छे से फिर नहीं तो मेकअप खराब हो जाएगा..
पीहूं – पागल है क्या रात तक कुछ नहीं खाना
माया- नहीं यार चल चलते है... स्टेज की तरफ प्ले शुरु होने वाला है... माया की चाल में लड़खड़ाहट थी... वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी...प्ले शुरु हो गया...
शुपनखा राम और लक्ष्मण के बीच का संवाद चल रह था... माया का दर्द असहनीय हो गया था...तभी रावण की ENTRY का वक्त आ गया
डायरेक्टर दादा- माया आखों में इतना गुस्सा होना चाहिए लोग कांप जाए...लगना चाहिए कि तुम्हारी बहन का अपमान हुआ है...
माया- जी सर
माया अपना किरदार निभाने स्टेज पर पहुंच गयी ...चारों तरफ से तेज तालियों की आवाज गुंजने लगी....माया की लड़खड़ाती चाल अभी एक रोबीले दार शख्स की तरह हो गई थी...माया सब कुछ भूल कर रावण के पात्र में ढल चुकी थी....अगले सीन में रावण को सीता का हरण करना था...अब माया  ने पूरी हिम्मत जुटायी और साधू  की तरह एक गेरुआ वस्त्र ऊपर से डाला और आ गई स्टेज पर सीत और रावण के बीच का संवाद अपने चरम पर था..रावण ने अपनी ताकत लगाते हुआ सीता को खींच कर ले जाने लगा...वो तेज तेज हंस रहा था... लेकिन रावण के अंदर जो माया थी... उसका दर्द भी चरम पर पहुंच चुका था... माया का पैर खून के रंग में रंग चुका था.....जहां जहां उसके कदम पड़ते खून के निशान बनते जा रहे थे... रावण  के किरदार के साथ माया ने पूरी ईमानदारी दिखाई.. वो तब तक चलती रही जब तक उसको स्टेज पर सीता को खींचते हुए चलना था  माया की दशा देखकर स्टेज की साइड विंग में खड़ी उसकी टीचर डायरेक्टर सर सबके चेहरे पर चिंता की लकीरे आ गयी थी.माया जैसे ही बैक स्टेज आयी पीहूं ने उसको सम्हाला और उसके कॉस्ट्यूम चेंज करने लगी... माया फीकी सी हंसी के साथ पीहूं को रोकने लगी
माया- पीहूं जाने दे I can manage कुछ नहीं हुआ है... ये तो होना ही था... दर्द ज्यादा बढ़ जाएं तो निकल ही जाना चाहिए... अब मैं ठीक हूं पहले जैसी हूं...
पीहूं- तूझसे मैने पूछा भी था कि क्या हुआ तूने कुछ नहीं बताया.. राहुल से कोई बात हुई क्या तेरी...
माया- राहुल से अब कोई बात नहीं होगी.. मैने सच को समझ लिया है.... बस समझने में  थोड़ा देर हो गयी.. माया कहते कहते रोने लगी...
पीहूं- माया प्लीज रो मत
माया- नहीं यार आज बह जाने दे अब नहीं बहाउंगी इस आसूं को.. मैने समझ लिया है..कि मैं राहुल के काबिल नहीं हूं मैं सुंदर नहीं हूं और लड़कियों जैसी काबलियत शायद मेरे अंदर नहीं है इसमें राहुल की कोई गलती नहीं है...मैं ही गलत फहमी की शिकार थी.... माया रोए जा रही थी.. और बोले जा रही थी.. पीहूं माया का सर अपने सीने पर लगाकर उसको सम्हाल  रही थी... की माया को कई लोग खोजते खोजते ग्रीन रूम के पास आ गए थे...माया पीहूं चलो मैम बुला रही है स्टेज पर ग्रुप पिक्चर लेनी है आ जाओं कह कर कुमुद बाहर निकल गई...
माया ने अपने आपको सम्हाला और पीहूं के साथ बाहर आ गई....रावण शुपनखा सीता राम की तारीफ सबने दिल खोलकर की... माया इस मंजर को देख खुश हो गयी थी.. उसे इसी पल का इंतजार था... पीहूं से उसने धीरे से बोला.. चलों मेरा खून मेरे कुछ तो काम आया...पिक्चर क्लिक होने के बाद सब वापस घर को जाने लगे.. माया भी अपनी मां के साथ घर के लिए निकलने लगी...तभी पीहूं ने माया के कान में धीरे से बोला..
पीहूं- कल कॉलेज बंद है लेकिन हम सब आएंगे.. तुम भी आ जाना.. फन करेंगे.. माया ने इशारे से हां बोला और निकल गयी ...
राधा- बेहतरीन था तुम्हारा प्ले माया...पैर कैसा है अब सबको दिख रहा  था कि तुम्हारे पैर से खून बह रहा है.. लेकिन तुम रूकी नहीं very good वैसे अब पैर का तनाव कुछ कम होगा.... चलों घर पर ड्रेसिंग कर देंगे.. hope fully तुम कल तक ठीक हो जाओगी... घर चलो मैं तुम्हें दवा दे दूंगी औऱ ड्रेसिंग कर देती हूं..

Next morning (switch to photo state shop)
माया पीहूं अतुल नरेंद्र विशाल  अनवर सपना शैलजा सब के सब आज फन मुड में थे.. आज फोटोस्टेट शॉप के अंदर रौनक जमी हुई थी... माया भी काफी दिनों के बाद तफरी करने यहां आयी थी...पीहूं से माया ने बोला सुन ना चल हम भी एक सिस्टम ले लेते है.. औऱ चैट करते है... उधर अतुल और नरॆंद्र भी अपनी अपनी कुर्सी कस कर बांध कर बैठ गए थे... इतना जरूरी काम कर  हो रहा थाafter all  माया सबको देख रही थी... पीहूं ने माया को बोला आजा बैठ जा मेरे साथ
माया- पीहूं तुम चैट करों मैं थोड़ी देर में बैठती हूं माया के मन में राहुल के आने की उम्मीद थी.. लेकिन ये बात उसने किसी से नहीं बोली... माया की नजर अतुल पर पड़ी वो थोड़ी देर में ही बाहर जाने लगा...
माया- अतुल क्या हुआ क्यों जा रहे हो...
अतुल – कुछ जरूरी काम याद आ गया है... आता हूं थोड़ी देर में
माया- ओके जाओ
माया  पीहूं के बगल में बैठ गयी और नेट सर्फ करने लगी.. तभी नरेंद्र पीहूं के पास आया औऱ बोला
नरेंद्र- सुन मैं थोड़ी देर में आता हूं तुम जाना मत
पीहूं – ठीक है
माया ने बीच में ही बोला नरेंद्र को जाओ ना तुम्हें किसने रोका है फ्री में भौकाल देने की आदत है... जाओं...माया की बात सुनकर पीहूं और नरेंद्र हंसने लगे.और नरेंद्र तेजी के साथ बाहर निकल गया...
माया ने विशाल को देखा अकेला तो पूछ लिया ये क्या हो रहा है.. कहां जा रहे है सब ...
विशाल ने बिना कुछ बोले ही ना में सर हिला दिया.. औऱ बड़े तहजीब के साथ माया से पूछा..आपका प्ले कैसा हुआ था..
माया- बहुत अच्छा था पूरी जिंदगी इस प्ले को नहीं भूलूंगी...
विशाल- काश हम लोग भी देख पाते
माया- हममम पर प्ले देखने के लिए तुम लोगो को हम लोगो का मामा चाचा ताऊ बनना पड़ता कह कर माया तेज से हसने लगी...विशाल माया की हंसी को देखे जा रहा था..तभी माया की नजर शॉप की गेट पर पड़ी नरेंद्र और अतुल एक दूसरे को गालियां दिए जा रहे थे और अनवर तेज तेज हंसे जा रहा था
नरेंद्र का बस चलता तो अतुल को मारने के लिए हाथ उठा देता...उसके चेहरे का रंग देखने लायक था.. माया पीहूं विशाल सब शॉप के बाहर आ गए..
माया- अरे क्या हो गया क्यों पागल हो रहे हो तुम लोग...अभी तो तुम दोनो अलग अलग बाहर गए थे अचानक क्या हो गया एक ही लड़की से मिलने तो नहीं चले गए थे...
माया की बात सुनकर अतुल अपना पेट पकड़ कर तेज तेज हंसने लगा.. औऱ बोला
अतुल- नरेंद्र बता भाई कैसी थी लड़की
नरेंद्र- चुप साले
अतुल – बता ना दे कैसी थी वो
नरेंद्र- अबे तू बता दे जिससे मिलने गया था वो कैसी थी...
विशाल ने दोनो के बीच में रोका औऱ बोला सालों बताओंगे भी अनवर ने बीच में ही बोला मैं बताता हूं
अनवर  नरेंद्र औऱ अतुल की तरफ हाथ दिखाकर बोलने लगा.. ये साले एक दूसरे के साथ ना जाने कितने दिनों से fake id से chat कर रहे थे... नरेंद्र को लगता था कि अतुल एक लड़की है... औऱ अतुल को भी नहीं पता था... कि ये नरेंद्र है बस इन दोनो ने एक दूसरे से मिलने का प्लान बनाया.. और चले गए पास वाले मॉल में.. वहां जब आमना सामना हुआ तो सोच क्या हुआ होगा.. कह कर अनवर तेज तेज हंसने लगा....अनवर की बाते सुनकर वहां सब ठहाके लगा कर हंसने लगे.....विशाल एक पल को रूका और फिर आराम से बोला.. ओ तेरी तो ये बात है... ये दोनो रात भर  एक दूसरे से चैट कर रहे थे.. अतुल और नरेंद्र की शक्लें ऐसी हो रखी थी.. जैसे कितनी बड़ी चॉप्सी हो गई है.. 
माया ने नरेंद्र के कंधे पर हाथ रखा औऱ बोला ऐसे छोटे छोटे शहरों में बड़ी बड़ी बाते होती रहती है... नरेंद्र.. अभी सब बात कर रही रहे थे कि राहुल वहां आ गया.. बस सबके चेहरे की हंसी गायब सब ऐसे हो गए कि जैसे कोई हेड मास्टर आ गया हो.. और माया के चेहरे पर कोई भाव नहीं था...वो ऐसे react कर रह थी कि जैसे कल कुछ हुआ नहीं था... राहुल के दिल में पता नहीं क्या था आज उसने बड़े ही इज्जत के साथ माया को हैलो बोला पूछा अंदर  चले मुझे नेट पर कुछ काम है.. माया  राहुल की बाते सुनकर एक दम shockedथी...  जो माया कुछ पल पहले खुद को ऐसे पेश कर रही थी.. उसे कोई फर्क नहीं पड़ता.. उसी माया के चेहरे का रंग देखने लायक था.. माया ने पीहूं को देखा और इशारों में अंदर आने को कहा...

माया राहुल के साथ शॉप में अंदर आ गई... राहुल ने अपने बगल में एक chair माया के लिए लगाई... औऱ उसको बैठने के लिए बोला.... माया का दिमाग काम करना बंद कर चुका था.. उसके उम्मीद के विपरीत आज राहुल दिख रहा था...
राहुल ने अपनी yahoo की mail id open की.. और माया को भगवान की पिक्चर दिखाने लगा.. माया राहुल की शक्ल देखने लगी .. मन ही मन बड़बड़ा रही थी .. ये पागल है क्या मैं क्या करूंगी इन pics को देखकर... राहुल बोले जा रहा था.. और माया आज चुप थी..
राहुल- माया मुझे भूख लगी है तुम्हारे पास कुछ खाने का है क्या..
माया राहुल की बात सुनकर हैरान थी...लेकिन राहुल ने कुछ बोला हो औऱ माया ना करें ये तो impossible था... माया ने तुरंत अपने बैग से एक टीफिन का डब्बा बाहर निकाला और राहुल को दे दिया... और बोला
माया- राहुल इसमें पोहा है.. तुम्हें पंसद हो तो खा लो.. मेरे पास यहीं है.. माया औऱ राहुल की बाते अगल बगल सब सुन रहे थे... पीहूं नरेंद्र से बाते रह रही थी लेकिन उसकी नजर भी माया के ऊपर थी..राहुल ने जैसे ही पहला spoon खाया उसको  मिर्ची लगने लगी. राहुल के चेहरे का रंग बदलने लगा.. माया ने तुरंत उसको पानी का बॉटल दिया राहुल एक सांस में पूरी बॉटल खत्म कर दिया.. राहुल बॉटल का ढक्कन बंद करते हुए बोला मैं इतना तीखा  नहीं खा सकता....

राहुल की बात खत्म ही हुयी थी कि विशाल ने पोहे का डब्बा ले लिया औऱ खुद खाने लगा.... माया विशाल को घूरने लगी  लेकिन उसने कुछ नहीं बोला... राहुल ने थोड़ी देर बाद माया से बोला ...
माया मेरे साथ दोसा खाने चलेगी प्लेन दोसा मुझे बहुत पंसद है..

माया राहुल की बात सुनकर उसको ध्यान से देखने लगी मन ही मन सोचने लगी आखिर आज बात क्या है.. आज राहुल इतना मेहरबान क्यों है उसके ऊपर ... माया ने भी बिना वक्त गंवाए राहुल को हां बोल दिया....फोटेस्टेट शॉप में मौजूद सब माया को देखे जा रहे थे... माया और राहुल शॉप से बाहर निकल गए.....

to be continued

Wednesday, 22 February 2017

Maya"The Unfold Love Story " chapter -6



माया अपने घर के अंदर दाखिल होती है तेज से कूदते हुए अपनी मां के पास रसोई में पहुंच जाती है...चीख कर बोलती है मुझे जॉब मिल गयी.... अपने भाइयों के साथ प्रसाद शेयर करती है ......और खुशी से नाचने लगती है.....
राधा ने माया को पकड़ा और बोला कि अच्छा अब रूको और ये बताओ कि पढ़ाना क्या है टाइम क्या है और पैसे कितना देगा...
माया- मां मुझे 2000 रुपए महीने मिलेंगे math और finance पढ़ाना है.....टाइमिंग 5.30-8.30 बजे शाम को....

राधा – ठीक है बस आज पापा को बता देना इसके बारे में देखो फिर वो क्या कहते है
माया- मां मेरे पैर में जो कांटा चुभा था वो बहुत दुख रहा है... सुबह से फुरसत ही नहीं मिली जरा देखू ऐस लग रहा जैसे वहां एक बड़ा सा फोड़ा होने वाला है...माया को अपने इस दर्द का एहसास अब जाकर हुआ था..

राधा अच्छा अपना पैर दिखाओं जाओ पहले कपड़े बदलो फिर देखते है और चूड़ीदार पैजामी मत पहनना कल से... तुम्हें तकलीफ होगी राधा ने माया का पैर देखा तो थोड़ा तनाव में आ गई... ध्यान से देखा तो कांटे का एक छोटा सा हिस्सा अब भी वहीं चुभा हुआ था.. और आस पास का पूरा हिस्सा लाल हो रखा था....
राधा – तुम कहां बेहोश रहती हो इतना तनाव है फोड़े में और तुम अब बता रही हो...सीधे घर आना था... आज ऐसा हुआ था तो... अब कल ज्यादा होगा दर्द तो कॉलेज मत जाना... राधा गुस्से में माया को डांटे जा रही थी ...

माया- मुझे कोई दर्द नहीं है अब मैं ठीक हूं आप बस कोई दवा हो तो दे दीजिए नहीं तो कोई बात नहीं माया ने बड़े ही बेफिकरी के साथ राधा से बोला राधा ने माया के फोड़े पर दवा लगाई और बोला कल अगर ना ठीक लगे तो मत जाना नहीं तो ज्यादा परेशान हो जाओगी
माया- आपको पता है ना एक दिन बाद मेरा प्ले है मैं कॉलेज मिस नहीं कर सकती ठीक हो जाएगा... आप टेंशन मत लिजिए...
रात के 10 बज चुके थे लेकिन माया के पापा राकेश खन्ना  अभी तक नहीं आए थे अमूमन वो रात 9.30 बजे तक आ जाते थे....माया थके हुए कदमों से बालकनी में टहल रही थी..दिमाग में बस एक ही बात थी पापा हां बोलेंगे या नहीं
माया ने दूर से ही पापा के स्कूटर की आवाज को पहचान लिया और पैर को लंगड़ाते लंगड़ाते  हुए कमरे में दाखिल हुई मां... मां..... मां.... पापा  गए है...
राधा- कोई बात नहीं तुम आराम से रहो उनको चाय पानी पी लेने दो फिर तुम बात करना...
माया ने ठीक है कहते हुए किचन में चली गई..

राकेश खन्ना- हा भाई क्या हाल खबर आज के कहां है सब लोग...चारों बच्चे इघर आओं रौशन तो बस इतना सुनना था कि पापा की गोद में कूद कर बैठ जाता था...पापा की ऐसी आवाज सुनकर माया को तसल्ली चलो आज पापा का मूड तो ठीक है...माया चाय का कप लेकर  राकेश के सामने आती है...
राकेश- और बेटा कैसा रहा आज का दिन पढ़ाई कैसी चल रही है...
माया- all well पापा
राकेश – गुड ऐसे ही पढ़ते रहो तुम्हें बहुत आगे जाना है.... इसलिए पढ़ाई से कोई समझौता नहीं.. मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि मैं तुमको लड़कियों वाले सुख दे सकू लेकिन इतना जरूर है कि तुम्हारी पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने दूंगा.. तुम मेरा गर्व हो...
माया पापा की बात सुनती रही फिर पूरी हिम्मत जमा कर अपने पापा से बोलती है....
माया- पापा मुझे एक जॉब मिली है.. कोचिंग में पढ़ाने की 2000 रुपए महीना मिलेगा... शाम को 5.30-8.30तक की टाइमिंग है... क्या मैं इसको join कर सकती हूं..मैं अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं अपना खर्च खुद उठाना चाहती हूं....
राकेश खन्ना ने माया की पूरी बात को ध्यान से सुना फिर बोले
राकेश – तुम कर सकती हो लेकिन एक शर्त है..
माया – क्या
राकेश – तुमको रात 9 बजे तक घर आना होगा इससे ज्यादा लेट नहीं होना चाहिए इसका पढ़ाई पर कोई असर नहीं पढ़ना चाहिए.. अगर तुम्हें मंजूर है तो बताओ... मुझे तुम्हारे ऊपर पूरा भरोसा है...लेकिन समय जमाना खराब है फिर छोटे शहरों ये सब आम बात नहीं है लेकिन मैं फिर भी तुम्हें जाने दूंगा..
माया- खुशी से चहकते हुए बोली कुछ भी हो जाए पापा आपका सर कभी नीचे नहीं होने दूंगी.. मैं खुश हूं की आप मुझ पर भरोसा करते है... आपका भरोसा ही मेरी ताकत है मैं इसको कभी नहीं तोड़ूंगी माया की बातों और उसकी आंखों में उसका आत्म सम्मान झलक रहा था वो गर्व के साथ राकेश के सामने खड़ी थी
राकेश – फिर ठीक है बेटा कल से तुम अपना नया सफर शुरु करों मेरा आशिर्वाद तुम्हारे साथ है...

माया की आंखों में आसूं भर गए थे... उसके लिए पापा की ये बातें किसी जंग को जितने के बराबर था...माया ने खाली कप उठाया और किचन की तरफ चली गयी...किचन का काम निपटाया और सीधे अपने कमरे में... माया  अपनी जॉब की बात पीहूं को राहुल को बताना चाहती थी... लेकिन राहुल का ख्याल आते ही माया उदास हो गयी...और सोचने लगी आखिर वो दिन कब आएगा.. जब राहुल माया को प्रपोज करेगा... या मना कर देगा अभी तक तो ना हां बोला है और ना  नहीं बोला है...अपने दिमाग के फितूर को हटाते हुए माया ने तय किया कि focus माया focus …focus on your new job class and all make your self more and more strong then might be राहुल तुम्हें मिल जाएं...बस इसी उधेड़बुन में माया नींद के आगोश में चली गयी...

Next morning time 6am

 माया के पैर में जोरो का दर्द था लेकिन फिर भी माया आज बहुत खुश थी....वो शीशे में खुद को निहार निहार कर तैयार हो रह थी... औऱ पीछे गाना बज रहा था... सजना है मुझे सजना के लिए ....
गाना सुनते सुनते माया को ख्याल आया अरे यार मैने रत्ना का वॉकमैन अभी तक नहीं वापस किया उसने मांगा भी नहीं आज वापस दे आउंगी... बहुत हुआ प्यार औऱ दर्द भरी बाते now move on maya .. माया खुद के साथ बड़बड़ करती  हुई बैग उठाया भगवान को हाथ जोड़ा और निकल गई.... कई दिन हो गए थे.. अपनी language की क्लास में गए हुए...आज माया ने तय कर रखा था सबसे पहले अपना काम फिर बाकी सब बकवास फिर वो राहुल ही क्यों ना हों...और मन में सोचते सोचते वो अपनी language क्लास में पहुंच गई...
वहां पर उस एक लड़के ने माया का जीना दूभर कर रखा था... जहां माया बैठती उसी के सामने बैठ जाता और बस सर को उंगली करना शुरू साला impression जमाने के चक्कर में इतना बोलता था कि group discussion  के वक्त तो आवाज एक दम तेज बस हाथ पैर ना उठते थे बाकी वो कोई कसर नहीं छोड़ता था.. माया उसको देखकर गुस्से में लाल हो जाती थी.. लेकिन आज माया ने तय कर रखा था  no maya no maya focus only on your self … इससे तो मैं बाद में निपटूंगी फिलहाल क्लास खत्म किया और कॉलेज की तरफ बढ़ गयी.. आज तो मैं राहुल के लिए कुछ नहीं ले जा रही.. जैसे ही ये ख्याल माया को आया..माया उदास हो गयी फिर अपने आप से बाते करते हुए बोली ठीक है ना आज मेरी हालत ठीक नहीं है उसे तो क्या फर्क पड़ेगा मैं ले जाऊं या ना ले जाऊं... कोई बात नहीं
अपने आप से बाते करते करते माया कॉलेज पहुंच गयी...आज फिर से प्ले की प्रैक्टिस करनी थी लाइटिंग और music के साथ तो बस सब के सब उसी में लगे थे.. माया का दर्द बढता जा रहा था...पीहूं जैसे ही उससे मिली सबसे पहले उसने जॉब की बात बताई और बोला पहली सेलरी से तुम्हारे लिए पार्टी..
पीहूं एक दम खुश हो गई अच्छा है माया फाइनली तू अपने पैरों पर खड़ी हो रही है...माया ने पीहूं को बीच में रोका और बोला एक और अच्छी बात है
पीहूं – क्या
माया- अब मैं रोज तुम्हारे घर तक जाउंगी वहां से कोचिंग चली जाउंगी... हम ज्यादा देर तक बाते करेंगे... पीहूं हसने लगी और बोली वाह ये तो सोने पे सुहागा....
माया- पीहूं प्रैक्टिस करके चलते है आज फोटोस्टेस वाले के यहां तफरी की जाएगी....
पीहूं- क्यों आज तू राहुल को फोन नहीं करेगी
माया- नहीं
पीहूं – आज तू उसके लिए कुछ नहीं लायी
माया- नहीं मेरे पैर की हालत देख माया ने अपना कुर्ता हटाते हुए दिखाया
माया के पैर में सूजन थी... पीहूं ने जैसे देखा उसके मुंह से आह निकल गयी
पीहूं- तू आज कॉलेज क्यों आयी तेरी हालत देखी है तूने
माया- अब तुम मां की तरह ज्ञान मत दो
पीहूं- तू आराम से बैठ एक जगह.. ज्यादा चल मत कल हमारा प्ले है.. औऱ अब तुम थोड़ा ध्यान से चलो पीहूं ने हक से माया को डांट कर बोला...
माया – हां माता अब चले प्रैक्टिस करने


3 घंटे की प्रैक्टिस में माया के पैर का बुरा हाल हो चुका था...लेकिन माया ने अनुराधा मैम या डायरेक्टर दादा को कुछ नहीं बोला उसको इंतजार था तो कल का......घड़ी की तरफ माया ने देखा तो 4 बज चुके थे... माया ने पीहूं को बोला मुझे अब जाना होगा....
आज से कोचिंग भी है मेरी...चलोगी तुम भी ना घर यहां का तो काम खत्म..
पीहूं – हां ना चलते है...पर पहले कुछ खा ले बड़ी भूख लगी है....
माया- इस वक्त क्या मिलेगा.. हां वो
नरेंद्र
के हॉस्टल वाली गली में चले वहां अभी हलवाई गुलावजामुन बना रहा होगा....
पीहूं- हां यार चलते है वहीं लेकिन सबसे छिप कर मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं पूरी फौज को खिलाऊ..अभी माया और पीहूं बात कर ही रहे थए कि पीछे सपना इशिता प्रीति सब आ गए....हाय माया हाय पीहूं तुम लोग इसी कॉलेज में रोज आते हो लेकिन ऐसा लग रहा कितने दिन हो गए मिले हुए अब कल ये प्ले खत्म होगा तो तुम दोनो क्लास में दिखोगी... प्रीति ने बड़े ही शिकायत भरे अंदाज में कहा
माया ने पीहूं को देखा.. और आंखों ही आखों में बोला लो जी खाने का जुगाड़ हो गया.. माया के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान देखकर.. पीहूं हंस पड़ी..
माया ने प्रीति से बोला चल आज सब मिल कर समोसा खाते है....कितने दिन बाद मिले है हम सब.....तुम लोग यही रूको मैं और पीहूं समोसे लेकर आते है... लेकिन एक प्रॉबलम है मेरे पास सिर्फ 10 रूपए बचे है...तो खुल्ले दो थोड़े से.. प्रीति माया की बात सुनते ही पर्स में हाथ डाल दिया और पैसे निकालते हुए बोली रूक ना माया ये ले रूपए... सबके लिए ले आ...
माया ने प्रीति से बिना किसी झिझक के पैसे लिए और पीहूं को लेकर निकल गयी.....हलुवाई की दुकान पर पहुचते ही...माया औऱ पीहूं की नजर सीधे गुलाब जामुन पर पड़ी.... एक दम गरम गरम गुलाब जामुन देख दोनो के आंखों में गजब की चमक आ गयी थी... बिना वक्त गंवाए माया ने दुकानदार से बोला भइया..एक एक प्लेट गुलाब जामुन दे दो.. औऱ  10 गरम गरम समोसे पैक कर दो... हाथ में गुलाब जामुन की प्लेट आते ही माया औऱ पीहूं टूट पड़े.. खाने... के लिए.. अभी एक ही गुलाब जामुन खत्म हुआ था कि... पीहूं की नजर दुकान के अंदर राहुल और अतुल को बैठे देख लिया...माया के चेहरे का रंग एक दम से बदल गया खुद को सम्हालते हुए माया ने दोनो को हैलो बोला... अतुल औऱ राहुल जलेबी खा रहे थे....दोने अपनी प्लेट उठाई औऱ बाहर आ गए.. माया ने अतुल से हाथ मिलाया लेकिन राहुल के तरफ हाथ तो दूर माया ने नजरें भी नहीं मिलायी....पीहूं ने माया को कंधे से मारा...
पीहूं – और राहुल कैसी तबियत है...
राहुल- बस यार ठीक हूं
पीहूं – वैसे तुम्हें बाहर का कुछ भी नहीं खाना चाहिए
राहुल – जलेबी मेरी फेवरेट है.... सो बस आज आ गया  थोड़ा चेंज मिल जाएगा..
माया इंतजार करती रही की राहुल उससे कुछ बात करेगा..वो दो कदम पीछे हो गयी... अतुल माया के हाव भाव को देखे जा रहा था...जैसे अब भी कह रहा हो माया टाइम बर्बाद मत कर... राहुल ने जलेबी अपनी खत्म की औऱ माया की तरफ मुड़ा..
राहुल – और माया कैसी है तू यार तेरी दवाई बड़ी कड़वी थी... मैने पी थी तेरी कसम बस पूरी नहीं पी थी...
राहुल के मुहं से इतनी सी ही बात सुनकर माया का दिल अंदर से खुश हो गया
माया- चलों मुझे तो इतनी भी उम्मीद नहीं थी तुमने थोड़ा ही सही पीया तो ना... अब परेशान मत हो मैं कल से नहीं लाउंगी.. हां तुम्हें कुछ घर के खाने का मन होगा तो बता देना मैं पका कर ले आउंगी...
राहुल- यार मुझे तो गाजर का हलवा जलेबी....बड़ा पंसद है और ये मिठाई वाले भइया बना देते है मेरे लिए....
माया राहुल की बात सुनकर मुस्कुरा कर बाय बोला और समोसे लेकर पीहूं के साथ निकल गयी...
माया- पीहूं जल्दी कर मुझे कोचिंग जाना है...
पीहूं- तू अब  खुश तो है ना....
माया – हा  पीहूं लेकिन मेरे पैर में बहुत दर्द है..बस आज पहला दिन है कोचिंग का तो किसी भी तरह जाउंगी...
बाते करते करते माया पीहूं कॉलेज में पहुंचे.. प्रीति गुस्से से देख रही थी
तुम लोग समोसा बनाने लगे थे क्या...
माया- नहीं हलुवाई बना रहा था... हम खड़े होकर देख  रहे थे... चल ये ले समोसे मै अपना ले लेती हूं... मुझे निकलना है... तुम लोग enjoy  करों...
Bye all bye pihu माया बोलकर जाने लगी... पीहूं ने माया का हाथ पकड़ा औऱ बोला अब तू खुश है ना ऐसे ही खुश रहना.. चल तू अब जा कल मिलते है.. माया पीहूं की बात सुनकर कोचिंग के लिए निकल गयी.....
रास्ते भर माया के जहन में राहुल ही चल रहा था...उसे एक उम्मीद की किरण अब भी दिख रही थी... माया खुद से बात करते हुए बोलने लगी.. अभी राहुल बिमार है ठीक हो जाने दे... उसके अंदर तेरे लिए कुछ होता नहीं तो तेरी दवाई क्यों पीता...क्या करू राहुल को एक फोन कर लूं क्या...पूछ लेती हूं उसकों क्या खाना है...कल बना कर ले आउंगी... माया के दिल में कोई बात अटक जाएं तो फिर जब तक वो बोल नहीं लेती थी .. या उस काम को कर नहीं लेती थी बेचैन रहती थी....माया कोचिंग के बाहर एक पीसीओं की दुकान पर रूक गई उसने राहुल को फोन किया
माया- हाय राहुल
राहुल – हा बोलो माया
माया- तुम्हारें लिए कल क्या लाऊ
राहुल  बड़े ही बेरूखी से बोला  यार तुम कुछ मत ले आना मैं खा लूंगा.. परेशान होने की जरूरत नहीं है
माया- क्या हा राहुल नाराज हो क्या
राहुल – नहीं यार मैं अभी कहीं बैठा हूं ओके चल रखता हूं बाय
राहुल ने फोन काट दिया... और माया के चेहरे की हंसी आखों की चमक सब गायब हो गयी.. माया की आंखों से आसूं बहने को बेताब थे..उसे एक दम उम्मीद नहीं थी कि...राहुल उससे ऐसे बात करेगा...माया ने खुद को सम्हाला और कोचिंग के अंदर दाखिल हो गयी.....

TO BE CONTINUED