Thursday, 30 April 2020

Adhuri Kahani part2, episode 9


शनाया को अचानक अहसास हुआ वो अरनव के बेहद करीब आ चुकी थी..उसने सहसा  खुद को  उससे अलग किया और अपने आप पर काबू करते हुए बड़े ही बेरूखी से बोला इन आसूंओ का भी कोई ईमान धर्म नहीं बचा है ज़रा सा किसी का कंधा मिलता नहीं बहना शुरु हो जाते है
अरनव,शनाया की बाते ध्यान से सुनता है और बोलता है कोई बात नहीं हम इंसान ऐसे ही होते है जहां कुछ अपना सा लगता है वहीं दिल खुद ब खुद बोल पड़ता है...अब तू मेरे सवालों का जवाब देगी ।
शनाया – हां अरनव जरूर दूंगी रूको एक मिनट, शनाया  अपने हाथ में लिए लॉकेट को खोलती है और उसको देखते ही अरनव की आंखें खुली की खुली रह जाती है....
अरनव – ये क्या है शनाया, इसके अंदर ये कैसी मशीन है... तू कौन है
शनाया – शांत रहोगे  सब बताती हूं ... ये लोकेशन ट्रैकर है और इसमें ये red colour का जो बटन है ये voice recorder  है ।
अरनव – मतलब ये सब क्यों
शनाया – मतलब ये है कि मैं जो दिखने में आजाद पंछी लगती हूं actually  मुझसे ज्यादा कैद किसी की जिंदगी नहीं
अरनव – साफ साफ बताएगी
शनाया – चल यहां से चलते है वॉक करते करते बताती हूं
अरनव – ओके
शनाया- अरनव मैं एक ऐसे घर में पैदा हुयी हूं जहां खुली हवा में सांस लेने का भी अधिकार नहीं है..मेरे पापा ब्रिगेडियर राजेश कुमार  है..आर्मी के सिनियर ऑफिसर है.. और दुश्मन के खिलाफ बनने वाले हर प्लान का अहम हिस्सा होते है.. वो फिलहाल अपने एक मिशन पर गये है कहां ये मुझे भी नहीं पता
अरनव – तो, ये तो अच्छी बात है तुझे तो गर्व होना  चाहिए... 
शनाया – हंसते हुए गर्व होना चाहिए.. है ना गर्व मुझे, इस कैद में रह कर गर्व है मुझे, अपनी मर्जी की जिंदगी ना जी कर गर्व है मुझे,खुद से अपनी  जिंदगी का फैसला ना करके गर्व है मुझे...और ये लाकेट मेरी जान दुश्मन है... मैं जहां भी जाती हूं ये सब  रिकार्ड होता है । वो किसी भी पल मुझे सुन सकते है लेकिन मैं कभी भी नहीं  मैने कितनी सांसे ली है इसकी खबर भी उनके पास है... मेरी मां मेरे भाई सबसे मैं दूर रहती हूं हम आपस में कोई बात नहीं कर सकते...
अरनव – लेकिन क्यों
शनाया – हंसते हुए क्योंकि किसी को खबर  ना लगे हम कहां रहते है....
अरनव – शनाया देश के लिए ये सब करना पड़ता है
शनाया – हाहाहाहा,  देश के लिए सही बात है, देश के लिए अपना जीवन कैदियों की तरह जीयों
अरनव –अच्छा एक बात बता तू क़ॉलेज में ऐसे क्यों रहती है..
शनाया – क्योंकि मेरे पापा के मुताबिक मैं कौन हूं कहां से आती हूं ये सबकी खबर किसी को नहीं लगनी चाहिए...और मेरा मानना है कि मैं जैसी हूं वैसे  रहूं..
अरनव-अच्छा तभी उस दिन ब्लड डोनेशन कैंप में वो नर्स तुम्हे इतने अच्छे से जानती थी...
शनाया – हंसते हुए वो कोई नर्स नहीं थी सब आर्मी का स्टाफ था और ना  कोई ब्लड डोनेशन हो रहा था...
अरनव – हैरान  होकर पूछता है मतलब
शनाया- मतलब वो ब्लड ग्रुप  के सैंपल लिए गए है और डेटा collect  किया गया है जिससे यहां पर ज्यादा से ज्यादा लोगो की मैंपिंग हो सके...
अरनव – ओके इसलिए ये लोग तेरा पीछा कर रहे है
शनाया –हंसते हुए हां मेरे पापा को लगता है मैं उनकी नजरो से दूर भाग जाऊंगी, और मैं सच में एकदिन भाग जाऊंगी.... मैं अकेले जीना चाहती हूं...
अरनव –तुमने आर्मी क्यों नहीं join  किया
शनाया – हंसते हुए क्योंकि मेरे पापा को लगता है ये लडकियों के बस का काम नहीं
अरनव – और तुम्हारे भाई
शनाया-वो बहुत छोटे है, खैर छोड़ो अब तुम्हारे हर सवाल का जवाब मिल गया
अरनव –हां लेकिन तुम्हें नहीं लगता ये सब तुम्हें मुझे नहीं बताना चाहिए था..क्या पता मैं भी दुश्मन का आदमी निकलू ।
शनाया-तेज से हंसती है और बोलती है तुम्हें लगता है कि तुम अब तक जिंदा रहते...
अरनव, शनाया की आंखें देखे जा रहा था.... उसकी आंखों में कोई डर नहीं था,
अरनव – शनाया तेरे पापा जो कर रहे तेरे भले के लिए ही तो कर रहे
शनाया – हां  कैद में रख कर
अरनव – ये सब कब से चल रहा
शनाया -  6 साल से
अरनव – क्या, लेकिन क्यों
शनाया – नहीं पता मेरी आधी जिंदगी बोर्डिंग स्कूल और  अब यहां के हॉस्टल में गुजर रही है... परिवार क्या होता है मुझे नहीं पता, खुल कर जीना किसको कहते है मुझे नहीं पता... मुझे सिर्फ इतना पता है कि मेरी एक मां है जिससे मैं साल में एक बार मिलती हूं जिससे बात करने के लिए भी मुझे मेरे पापा की जरूरत पड़ती है....खैर लोगो को दूर से लगता है आर्मी वालो की जिंदगी कितनीwow  होती है.... लेकिन करीब से देखो तो समझ आता है पूरी जिंदगी बारूद के ढेर पर गुजर जाती है....
अरनव – शनाया I must say  तेरे पापा किसी बड़े ऑपरेशन का हिस्सा होंगे और वो तुझे बहुत प्यार करते है इसलिए वो ये सब कुछ तेरे साथ करते है... पता है मुझे तुम काफी अलग लगी थी लेकिन आज ये सब सुनकर मुझे यकीन  हो गया कि तू सच में सबसे अलग है..
शनाया हंसते हुए कहती है अरनव मैं सब समझती हूं लेकिन मैं अपनी जिंदगी अपने शर्तो के साथ जीना चाहती हूं... मुझे उनका प्यार उनकी केयर समझ में आता है लेकिन मेरा दम घुटता है इन सबसे ऐसा लगता है जैसे मैं वो सोने की चिडिया हूं जिसे उड़ने का कोई हक नहीं है.. पता है अरनव मैं अपना आसमान खुद बनाना चाहती हूं
अरनव,शनाया की बाते सुने जा रहा था....और शनाया अपनी धुन में बोले जा रही थी.. अचानक अरनव ने शनाया का हाथ पकड़ कर रोक दिया। शनाया अरनव को देखने लगती है और बोलती है क्या हुआ
अरनव – देख हम कितना आगे निकल आए है वापस नहीं जाना
शनाया –क्यों  तुम्हें यहां अच्छा नहीं लग रहा
अरनव –ऐसी बात नहीं है, सब हमें खोज रहे होंगे
शनाया – हंसते हुए, ठीक है फिर जाओ तुम
अरनव – क्यों तू नहीं जाएगी...
शनाया –नहीं अरनव बड़ा सुकून मिल रहा  मुझे.. अभी ना मुझे कोई ट्रैक कर रहा ना तो कोई सुन रहा और वो मेरे पापा का जासूस भी दूर से मुझ पर नजर रख रहा तो डर भी नहीं किसी का... मैं इस पल को जी भर के जीना चाहती हूं
अरनव – क्यों तुम्हारे पापा अभी तुम्हें नहीं सुन रहे होंगे
शनाया – हंसते हुए नहीं ये देखो मैने सब कुछ ऑफ करके रखा है और इतनी रात में उनके हिसाब से तो मै सो रही हूं बाकी कल देखेंगे जो भी होगा... हां तुम जाना चाहते हो तो जाओ लेकिन एक बात बोलू
अरनव – बोल
शनाया – मुझे तुम्हारे साथ काफी अच्छा लगा ऐसा लगा पहली बार कोई मुझे ऐसा मिला जिससे मैं खुल कर बाते कर सकती हूं वैसे एक बात बता
अरनव – बोलो
शनाया – तुम्हारी कोई गर्ल फ्रैंड नहीं है ?
अरनव एक दम से खामोश हो जाता है और गहरी सांस लेकर बोलता है नहीं
अरनव की जुंबा से नहीं सुनकर शनाया की आंखों में एक अलग ही चमक थी...
शनाया अपनी धुन में आगे बढ़े जा रही थी और बोले जा रही थी... तभी शनाया का पैर रास्ते में पड़े पत्थर से टकरा गया और वो नीचे गिर गयी ।
अरनव जब तक उसको सम्हालता वो गिर चुकी थी.. अरनव तेज से हंसने लगता है... बस यही बाकी था
शनाया – क्या मतलब
अरनव – सुबह से गिरने के लिए मरी जा रही थी फाइनली गिर ही गयी ।
शनाया – अच्छा बेटा, ये बात...
शनाया धीरे से अपना पैर अरनव के पैर पर मारती है और वो भी गिर जाता है
अरनव – अबे ये क्या मजाक है
शनाया – हंसते हुए क्यों गिर कर मजा नहीं आया
अरनव , शनाया की बाते सुनकर हंसने लगता है... और बोलता है रात के 12 बजने वाले है वापस चलेगी वैसे  मैं तुझे उठा नहीं पाऊंगा
शनाया – ओह हीरो बनने की जरूरत नहीं है  और ना भाव खाने की मैं खुद उठ सकती हूं ओके लेकिन कुछ भी हो मैं वापस आज नहीं जाऊंगी..
अरनव – पागल हो गयी है तू, क्या करेंगे इतनी रात में
शनाया – गधे हो तुम, अरे चाय पिएंगे मैगी खाएंगे.. और क्या करेंगे
अरनव  अपना सर पकड़ लेता है और बोलता है...अच्छा और बाकी लोगो का क्या
शनाया –हंसते हुए कहती है पीछे देख बाकी भी मजे करते  आ रहे है ।
अरनव पीछे पलट कर देखता है और हंसने लगता है,अच्छा अब उठेगी  यहां से या  फिर यहीं चाय मंगाऊ...
शनाया –उठाओगे, शनाया बोल कर अरनव की आखों में देखने लगती है...अरनव भी शनाया की आखों में खो जाता है..
अचानक शनाया, अरनव को तेज से मारती है और बोलती है उठोगे...
अरनव उठता है और शनाया को भी उठाता है.. लेकिन शनाया का पैर सीधा नहीं पड़ रहा था...उसके अंगूठे में अच्छा खासा चोट लग गया था.. वो धीरे धीरे पैर टीका कर चलने की कोशिश करने लगी...अरनव शनाया के पैर देखकर बोलता है कर लिया तूने अपना काम रूक अब
शनाया – क्या है, कोई ना मैं चल लूंगी
अरनव – हां दिख रहा, रूक यहां से पकड़ मुझे
शनाया , अरनव को देखने लगती है चुपचाप
अरनव – अरे पकड़ेगी, पकड़ यहां तेरे लिए अभी कोई नहीं आना
अरनव और शनाया की बकबक चल  ही रही थी कि काजल और उसके दोस्त वहां आ गए।
काजल – वाह क्या मजे किए है तुम लोगो ने
शनाया – मतलब
काजल – मतलब ये कि कब से तुम लोगो का हम सब वेट कर रहे है...इंतजार करते करते हमने सारी बीयर पी ली... मस्ती कर ली और तुम दोनो ना जाने कहां गायब
अरनव कुछ बोलने  ही जाता है उससे पहले शनाया बोल पड़ती है
शनाया – हां तो मैं तो पीती नहीं अच्छा किया पी लिया,
अरनव – तू सच में नहीं पीती
शनाया – नहीं क्यों, अरनव तुम पीते हो
अरनव – हां कभी कभी, पर मुझे लगा तुम पीती हो
शनाया – हंसते हुए हां पीयूंगी मैं एक दिन जब सब कुछ मेरे मुताबिक होगा
अरनव – हंसते हुए, मतलब
शनाया – मतलब कुछ नहीं चलो अब चले वापस मुझे मैगी खानी है
केतन – हां चलो मैने रिसार्ट के बाहर एक छोटी सी दुकान देखी है वहां काफी happening  है।
अरनव शनाया का हाथ अपने कंधे पर रखता है और चलने लगता है...
काजल, शनाया और अरनव की बढती हुयी नजदीकियों को बड़े प्यार से देखती है और आखों ही आखों में शनाया को इशारे करती है...शनाया का गोरा चेहरा धीरे धीरे लाल हो चुका होता है..वहीं अरनव इन सबसे बेखबर शनाया को बड़े ही ध्यान से लेकर चलता है... उसके मन में रूपल की यादे बार बार बाहर आ रही थी..वहीं शनाया का साथ उसके दिल को सुकून पहुंचा रहा था....धीरे धीरे शनाया और उसके दोस्त रिसार्ट के बाहर उस दुकान पर पहुंच जाते है... रात के 12 बज रहे थे लेकिन वहां का नजारा देख ऐसे लग रहा था जैसे अभी शाम के 6 बज रहे हो...अरनव , शनाया को बड़े ही केयर के साथ आराम से टेबल पर बैठाता है और केतन को मैगी और चाय का ऑर्डर देने के लिए बोलता है।  इधर काजल, शनाया के पास आती है और धीरे से उसके कान में बोलती है , बोला था ना शनाया तू तो गयी।
शनाया – शायद तू सही कह रही है पता मेरा दिल कर रहा कि मैं अरनव के साथ ही रहूं ये रात खत्म ही ना हो...बस यहीं कहीं किसी जगह पर हमेशा के लिए उसके साथ बस जाऊं ।
काजल –वो तो तेरी आखें बता रही है कि तुझे प्यार हो गया है ।
शनाया – हां काजल जिंदगी में पहली बार मेरी किसी ने इतनी केयर की है , मुझे उसकी आधी अधूरी बाते बेहद पंसद है, पता है जब उसके हाथ  मुझे सम्हालने के लिए उठते तो ऐसा लगता है शायद यहीं वो हाथ है जो मुझे मेरा आसमान बनाने में मदद करेगा...शनाया और काजल की खुसरफूसर चल ही रही थी कि वहां केतन और अरनव आ गये
अरनव – ले भाई तेरी मैगी
शनाया अपना हाथ आगे बढ़ा देती है
काजल ये देख हंसने लगती है और बोलती है अच्छा अरनव मेरे लिए भी तो ला सकते थे ना
अरनव –हंसते हुए मै तो इसके लिए भी नहीं लाता वो तो ये मैडम आसमान की सैर कर रही थी और इनके पैर जमीन पर गिर गए...
अरनव की बाते सुनकर सब हंसने लगे...शनाया अपनी मैगी दोनो हाथो से पकड़ कर बैठी थी
काजल- ओय तू खा क्यों नहीं रही
शनाया – दिख ना रहा इतना गर्म है ऊपर से यहां रखने के लिए कोई जगह भी नहीं है ..
अरनव खड़े हो कर अपनी मैगी जल्दी- जल्दी खाए जा रहा था...केतन उसके करीब आकर बोलता है
केतन –भाई क्या मामला है
अरनव – मतलब
केतन –मतलब तुझे देख मैं खुश हूं फाइनली तू रूपल से आगे बढ़ रहा है।
अरनव- सीरियस होकर बोलता है तू गलत समझ रहा है।
केतन – ना  भाई लड़की तेरे लिए सही है या यूं कह लूं तू पहला है जिसके साथ मैने इसे इतना शांत देखा है ।
अरनव ,हंसने लगता है और बोलता है, ऐसा कुछ नहीं है वो बहुत अच्छी है और हां मेरी उसकी अच्छी दोस्ती हो गयी है ।
केतन – लेकिन शनाया को देख तो लगता है  उसको तुझसे प्यार हो गया है ।
अरनव –मजाक मत कर ।
केतन ठीक है तो देख ले ।
अरनव – क्या
केतन – उसको देख तू ध्यान से
अरनव – हंसते हुए देख रहा हूं वो बाकी लड़कियों जैसी नहीं है , ऊपर से सख्त और अंदर से मासूम सी लड़की है... जिसकी सिर्फ एक चाहत है, अपना आसमान खुद बनाना है...और आजाद होकर उड़ना है
केतन – मानना पड़ेगा
अरनव – क्या
केतन – इतनी सी देर में तुम दोनो एक दूसरे को कितना जान गये हो ना ।
अरनव,केतन की शक्ल देखता है और बिना जवाब दिए शनाया के पास जाता है और बोलता है
अरनव – आज ही खत्म करना है कब तक हाथ में लेकर बैठी रहेगी ।
शनाया – पता है, खा रही हूं
शनाया, अरनव की बाते सुनकर मैगी खाने लगती है.. और जल्दी जल्दी में मैगी के लच्छे कभी उसके टॉप पर गिर जाते तो कभी होठो के नीचे चिपक जाते....ये सारी हरकते बगल में बैठा कपल बड़े ध्यान से देख रहा था और हंसे जा रहा था... अरनव की नजर जैसे ही उन पर पड़ी वो शनाया और उनके बीच में आकर खड़ हो गया...और धीरे से शनाया से कहने लगा
अरनव – सुन ना ।
शनाया – मैगी खाते हुए, हां बोलो।
अरनव, इशारे से कभी शनाया के टॉप की तरफ इशारा करता तो कभी उसके होठो की तरफ इशारा करता..।
शनाया उसके इशारे देख हैरान हो जाती है और सोचने लगती है क्या हो गया इसे अचानक ऐसा लड़का तो ये नहीं है ।
शनाया फिर से इशारे में पूछती है क्या है, अरनव फिर से उसकी टॉप की तरफ इशारा करता है शनाया परेशान होकर उठने लगती है तो अरनव उसके एक दम करीब आ जाता है.. जैसे वो कुछ भी करे तो सामने से किसी को ना दिखाई दे...
शनाया, अरनव की हरकतो को समझ ही ना पा रही थी... अरनव उसके और पास आता है और अपना हाथ उसके टॉप की तरफ बढ़ाता है.... शनाया एक दम से गुस्से में आने लगती है लेकिन अरनव की नजरो से टकराते ही वो शांत हो जाती है और उसकी आंखों में देखने लगती है अरनव अपने हाथो को धीरे से उसके टॉप के पास ले जाता है और मैगी का लच्छा उठा कर गिरा देता है फिर आखों ही आखों में उसके होठो की तरफ इशारा करता है, शनाया आखों ही आखों में पूछती है क्या हुआ.. अरनव बिना कुछ बोले धीरे से अपना हाथ ले जाता है और उसके होठो के नीचे  चिपके हुए मैगी के लच्छे को हटाता है और उसका हाथ आगे करके उस पर रख देता है... शनाया जब तक कुछ समझ पाती अरनव उससे थोडा दूर हो जाता है।
 ये सारी हरकते केतन बड़े ध्यान से देखता है....मन ही मन बोलता है... भगवान करे शनाया और अरनव हमेशा के लिए एकहो जाए... ऐसी chemistry  तो मैने अरनव की रूपल के साथ भी नहीं देखी थी.. कितने मासूम से लगते है दोनो एक साथ... कहने के लिए दोनो अलग अलग है बस कुछ दिन हुए मिले लेकिन इनके बीच की अनकही बातो को देख ऐसा लगता है जैसे कितना पुराना रिश्ता है इनका जो बिना कुछ कहे सब कुछ समझ लेता है...
काजल , केतन के हाथ पर मारकर बोलती है, क्या देख रहे हो
केतन – वहीं जो तू पहले देख रही थी जो मुझे अब दिखना शुरु हुआ है...
काजल ,गहरी सांस लेते हुए हां यार ये दोनो एक साथ बड़े अच्छे लगते...
To be continued  


Wednesday, 29 April 2020

Adhuri Kahani Part 2 , episode -8


शनाया और बाइक सवार की बाते अरनव को सुनाई को तो नहीं दे रही थी लेकिन उनके चेहरे के भाव अरनव साफ पढ़ सकता था । कुछ तो था जो शनाया छिपाए जा रही थी, और इस बात की खबर सिर्फ काजल को थी । अरनव, काजल की तरफ देखता है और पूछता है, काजल बता ना क्या बात है शनाया इतनी परेशान क्यों है और कौन है ये लोग ? पहले वो आर्मी की जीप का पीछा करना फिर इन लोगो का हमारे पीछे आना शनाया का इस तरह उनसे बात करना आखिर बात क्या है बताओगी ..
काजल अपने चेहरे पर बिना कोई भाव लाए हुए साफ बोलती है, यार मुझे खुद नहीं पता तुम उससे ही पूछ लेना वैसे मेरी मानो तो मत ही पूछना वो और अपसेट हो जाएगी, फिलहाल इस बात को यहीं बंद करते है देखो वो आ रही है...
शनाया गाड़ी की तरफ आती है और ऐसे शो करती है कि जैसे कुछ भी नहीं हुआ  है वो तो बस तफरी करने गयी थी, लेकिन अरनव के चेहरे पर अब  भी ढेरो सवाल थे.. वो शनाया से जैसे ही पूछने जाता है काजल पीछे से उसका कंधा दबा देती है। काजल के इशारे समझ अरनव चुप हो जाता है
शनाया गाड़ी मे बैठते ही तेज से बोलती है, अरे तुम लोग इतने खामोश क्यों हो अब तो हम पहुंचने वाले है
काजल – तेरी वजह से
शनाया – क्यों
केतन – तूने इतना देर कर दिया अगर हम टाइम पर नहीं पहुंचे तो  रात हो जाएगी और  ठंड भी बढ़ जाएगी..
शनाया – क्या बे केतन दो दिन के लिए निकले है मजे कर ना तू और ठंड कहां है देखों आसमान कितना साफ और धूप कितनी चमकीली है
अनय – मैडम ये बंसत का महिना है और भूलो मत फरवरी में भी यहां कभी कभी बर्फ गिर जाती है..
शनाया – अच्छा ठीक है आ गयी ना अरनव अब गाड़ी चलाओ ना
अरनव – ओह पक्का मैने सोचा तुमलोगो की बाते हो जाए तो शुरु करूं
शनाया, अरनव का चेहरा देखने लगी और समझ गई अरनव काफी नाराज है..शनाया धीरे से अरनव की तरफ देखती है और बोलती है सुनो ना
अरनव बिना देखे  सर हिला देता है
शनाया – ये क्या बात हुई मेरी तरफ देखो तो सही
अरनव – तुझे देखू, क्यों जरा बताना ड्राइव कर रहा हूं मुझे सामने देखने दे ।
शनाया, अरनव के ऐसे बेरूखे से जवाब से उदास हो जाती है और अपना सर नीचे करके फिर से अपना लाकेट पकड़ कर मसलने लगती है..
लगभग एक घंटे की खामोशी के बाद अरनव बोलता है हां भई केतन बता अब कहां चलना है..
केतन – तू बता कैम्टी फॉल चले या सीधा VIEW POINT  पर चले
अरनव – कैम्टी चलते है फिर वहीं कैम्पिंग करेंगे पास के रिसार्ट में कल पूरा दिन घूमेंगे औऱ रात में शाम को VIEW POINT  पर  चलेंगे और  अगली सुबह वापस क्यों कैसा प्लान है..
काजल – मस्त प्लान है मुझे शॉपिंग करने का पूरा टाइम मिल जाएगा
शनाया – मतलब लड़की ही रहना उससे ऊपर मत उठना, यहां क्या शॉपिंग करना
साक्षी – अरे मुझे भी करनी है चलेंगे ना मार्केट
शनाया – ठीक है तुम लोग जाना मुझे तो बिना किसी वजह यहां की वादियों में घूमना है....इस खुले आकाश  के नीचे जीना है.. और इतनी यादे समेटनी है कि मेरे जहन से ये कभी ना मिटे...
काजल – बेस्ट आइडिया
शनाया – गुस्से से बोलती है क्या
काजल – हम शॉपिंग करेंगे और तुम चिडिंया घर घूम आना
शनाया – हो गयी बकवास तेरी
इनकी बकबक सुन कर अरनव केतन अनय एक साथ बीच में बोलते है अब बस करों देवियों और एक साथ सब हंसते है..
सबको हंसता देख शनाया भी हंसने लगती है....और अरनव का हंसता हुआ चेहरा देख वो थोड़ा सा रिलैक्स होती है...
शनाया – वैसे अब तो हम पहुंचने वाले है... तो ये बताओ यहां कौन कौन पानी में जाएगा
काजल बीच में ही बोलती है भाई मैं तो नहीं जाउंगी मुझे ठंड लगती है और  ऊपर से यहां का पानी ऐसे ही ठंडा रहता है...
काजल की बाते सुनकर सब हंसने लगते है.... अरनव  रिसार्ट की पार्किंग में गाडी रोकता है और सब तेजी से उतर कर जाने लगते है तभी शनाया सबको रोकती है
शनाया – हैलो, कहां चले सब रूको यहां सबसे पहले एक पिक्चर तो यहां बनती है...सब शनाया के पास आ जाते है लेकिन अरनव थोड़ा दूर खड़ा रहता है ऐसे जैसे अब वो शनाया को जानता ही नहीं..इधर शनाया उसको तेज आवाज देकर बुलाती है और कहती है अरे आओ अरनव  अच्छी पिक्चर आएगी स्मार्ट लग रहे हो...अरनव, शनाया की बात सुनकर हंस देता है और अनमने मन से आने लगता है औऱ कहता है ये सारी पिक्चर तू हमें प्रिंट कराकर देगी ।
शनाया – ना बाबा ना ये मैं नहीं करूंगी हां सबको मेल कर दूंगी, अब आ जाओ भाव पूरे हो गये हो तो...
शनाया कैमरा गार्ड को पकड़ा देती है और सब एक साथ नियम से खड़े हो कर पिक्चर क्लिक कराते है .. ये देख शनाया बीच में ही बोलती है.. मतलब क्या स्कूल में है हम अरे थोड़ा स्टाइल तो लाओ शनाया की बाते सुनकर अनय तो साक्षी के एककदम करीब आ जाता है... और केतन काजल के पास आकर खडा हो जाता है लेकिन काजल अपने दोनो हाथों से उसके सर पर सींग बना देती है.. ये देख सब हंसने लगते है इधर अरनव और शनाया भी एकदूसरे के पास खड़े होते है लेकिन अजनबी की तरह...शनाया गार्ड को बोलती है, भइया तुम क्लिक करते जाना जब तक मैं मना ना करूं... और सब एक से बढ़कर एक पोज दे रहे थे शनाया काजल के साथ मिलकर कभी पाउट बनाती तो कभी जीभ निकालती और अरनव की नजर एक टक  शनाया को देखे जा रही थी। तभी केतन, अरनव  का हाथ पकड़कर सबके बीच में ले आता है और इतनी तेज खींचता है कि अरनव सीधा शनाया से टकरा जाता है, अरनव का एक हाथ शनाया के कंधे पर गिरता है तो दूसरा हाथ उसकी पीठ पर शनाया गिरते गिरते बचती है... लेकिन अरनव का हाथ लगते ही शनाया के अंदर जैसे कोई कंरेट दौड़ गया हो वो घबरा सी जाती है...पल भर के लिए शनाया और अरनव के बीच की दूरी इतनी कम रह जाती है कि अरनव को शनाया की तेज सांसे सुनाई देने लगती है उसकी नजरे शनाया के चेहरे पर जा कर टिकजाती है...शनाया के बिखरे बाल आखों में घबराहट  चेहरे पर गुस्सा सब एक साथ अरनव को दिखाई दे रहा था...अरनव खुद को सम्हालता है और शनाया से दूर हटकर पूछता है
अरनव – हां भाई तू ठीक है ।
शनाया खुद को नार्मल करते हुए सर हां में हिला देती है इधर केतन सॉरी यार की रट लगाए जा रहा था... और गार्ड भइया शनाया की बात मान कर सब कुछ क्लिक किए जा रहे थे...काजल इन सबके  बीच बोलती है यार प्लीज एक पिक्चर ढंग से क्लिक करा लो सब फिर चले मुझे भूख लगी है .... फाइनली एक पिक्चर में सलीके से और पास पास खडे होकर मुस्कुरा रहे थे...गाड़ी से सब अपना अपना सामान निकाल कर आगे बढ़ने लगते है, वहीं शनाया ,गार्ड भइया को धन्यवाद बोलकर 50 रूपए पकड़ाती है और गाड़ी से अपना सामान निकालने लगती है तभी अरनव उसके पीछे आता है और बोलताहै
अरनव –तुझे चोट तो नहीं लगी
अरनव के इतने अपनेपन से पूछने पर शनाया एकदम से शांत होकर उसको देखने लगती है और बोलती है नहीं
शनाया – सॉरी
अरनव –तू क्यों बोल रही है
शनाया – मुझे पता है तुम नाराज हो
अरनव –अरे कोई नहीं बस थोड़ा अजीब लगा...खैर मैं तेरा काजल जैसा दोस्त होता तो मुझे पता होता लेकिन कोई बात नहीं मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता..
शनाया , गाडी से अपना सामान निकालने लगती है तो अरनव उसका सामान हाथ में ले लेता  है और बोलता है
अरनव – मैं ले चलता हूं तू रहने दे थक गई हो गयी
शनाया बिना किसी इंकार के अरनव के साथ साथ  अंदर जाने लगती है और अरनव से कहती है
एक बात बोलूं
अरनव – बोलो
शनाया – अगर मैं तुमसे वो सब बताऊ जो तुम जानना चाहते हो तो किसी से कहोगे तो नहीं
अरनव – तुझे मुझ पर भरोसा है
शनाया – पता नहीं इतनी से देर में ही लगता है मैं तुम्हें बरसो से जानती हूं औऱ भरोसा करने का दिल करता है
अरनव – फिर बता देना  और अपना यकीन कायम रखना...
अरनव और शनाया आपस में बाते करते हुए  कॉरीडोर में पहुंचे ही थे कि शनाया की नजर  फिर से उसी बाइक सवार पर चली जाती है जिसको उसने इतना डांटा था...
शनाया एकदम से रूक जाती है और अरनव कभी शनाया को तो कभी उस आदमी को देखने लगता है... दो पल रूकने के बाद शनाया अरनव का बाजू पकड़ती है और उसके साथ रूम की तरफ बढ़ने लगती है...रूम नंबर 301 और 302 के बाहर इतनी आवाजे आ  रही थी कि शनाया और अरनव वहीं रूक गए
अरनव – चल आजा यहीं है अपना रूम
शनाया –तुम्हें कैसे पता
अरनव – क्योंकि मैने ही बुक किया है 302 तुम लड़कियों का और 301 हमारा
शनाया अरनव से अपना सामान लेती है और 302 के अंदर चली जाती है....अंदर का नजारा देख वो गुस्से में लाल पीली हो जाती है और सामान  एक तरफ रख कर सीधा बेड की तरफ जाती है....चार गालियां मुंह से निकालती है और केतन का हाथ पकड़ कर उसको खींचती है और बोलती है
शनाया – क्या मजाक है अपने कमरे में जा
केतन –अरे गुस्सा मत हो मैं तो काजल का सामान उठा कर लाया ना थक गया था
शनाया- ओह अच्छा अच्छा फिर तो अनय भी थक गया होगा
केतन – और क्या
शनाया – वो कहां है
केतन वहां बालकनी में
शनाया गुस्से से पहले काजल की तरफ देखती है फिर अनय को तेज से आवाज लगाती है
अनय हड़बड़ा कर अंदर आता है और बोलता है क्या हुआ
शनाया –मैने कहां अगर थकान उतर गयी हो तो अपने कमरे में जाओगे प्लीज
अनय कभी केतन की शक्ल देखता तो कभी साक्षी और धीरे से दोनो बाहर निकल गए इधर काजल तेज तेज हंसे जा रही थी......
रात के 8 बजे
पूरे दिन की मस्ती के बाद  सब थक चुके  थे गुलाबी सी ठंड अपनी चादर फैला रही थी .. आसमान में बिखरे हुए सितारे और दूर दूर तक जलने वाली छोटी छोटी लाइटे ऐसी लग रही थी जैसे आसमान और धरती सब यहां एक हो गए हो....गुजरती रात के साथ पारीजात के फूलो की खुशबू हवा में फैलती जा रही थी....और कानो में एक मधुर सा संगीत, शनाया छोटी सी ढलान पर बैठ कर ये सब देखे जा रही थी...उसके अंदर चल रहा तूफान आज शांत था ...उसके चेहरे पर गिरते हुए  बाल ऐसे लग रहे थे आज मौका मिला है शनाया के साथ के साथ लुकाछिपी खेल लो.....अरनव दूरसे बैठ कर शनाया को एकटक देखेजा रहा था ... बाकी सारे अपनी मस्ती में लगे हुए थे और शनाया अपनी ही दुनिया में खोयी हुयी थी...अचानक शनाया की नजर अरनव  पर पड़ी और वो एक दम से खड़ी हो  गयी और बोला अरे अरनव तुम कब आएं
अरनव – बस तभी जब तू ना जाने किस दुनिया में खोयी थी...
शनाया – तुम उनके साथ मस्ती नहीं कर रहे
अरनव –तू भी तो नहीं कर रही
शनाया –अरे मेरे लिए तो ये सब देखना इसको महसूस करना ऐसा है जैसे जिंदगी को बस अभी जी लेना...अब तुम बताओ तुम क्यों हो यहां
अरनव- क्योंकि मुझे भी ये सब पंसद है मेरा तो जन्म ही पहाड़ में हुआ है
शनाया – wow कहां के रहने वाले हो तुम
अरनव – नैनीताल
शनाया – ओके
अरनव – और तुम
शनाया – भोपाल
अरनव – भोपाल से यहां पढ़ने क्यों आयी
शनाया – क्योंकि मुझे यहीं पढ़ना था कोई ऑप्शन नहीं था
अरनव – मतलब
शनाया – मतलब कुछ नहीं, मेरे साथ नेचर वॉक करने चलोगे
अरनव – अभी
शनाया- क्यों डर लग रहा है
अरनव – हंसते हुए नहीं रात हो गयी है ना
शनाया –और मैं इस रात को गुजरने नहीं देना चाहती
अरनव – क्यों
शनाया – अरे छोड़ो मैं तो पागल हूं, चलोगे पहले ये बताओ
अरनव –हां...
शनाया –एक सवाल पूछूं
अरनव – फिर से सवाल,वैसे मेरेपास भी बहुत से सवाल है मैं पूंछू
शनाया – ठीक है पहले तुम पूछों
अरनव –कौन हो तुम
शनाया-मतलब, लड़की हूं
अरनव – हंसते हुए मतलब उस दिन ब्लड कैंप में तुमने क्यों किसी को कुछ बताने  को मना किया , फिर तुम कॉलेज में सूट और  बाहर ऐसे कपड़े क्यों पहनती हो, कॉलेज में तुम एक दम अलग सी दिखती हो जबकी तुम बिल्कुल  वैसी नहीं हो, वो आर्मी  वाले कौन थे.. जो हमारा पीछा कर रहे थे...फिर ये बाइक वाले कौन थे  जो हमारे साथ साथ यहां तक आ गए.. और अगर मैं गलत नहीं हूं तो उनमें से एक अब भी तुम पर नजर रखे हुए है इतनी दूर से...
शनाया, अरनव की बाते सुनकर पहले हंसती है और फिर गहरी सांस लेती है...और बोलती है
शनाया – अरनव बेदी तुम्हें पता है शनाया से एक साथ इतने सवाल किसी ने नहीं किए या यूं कह लो शनाया ने इसकी इज़ाजत किसी को नहीं दी... लेकिन क्या है ना तुम अब मेरे दोस्त हो तो तुम्हें तो बता सकती हूं .. बस एक बात का ध्यान रखना ये बाते जिंदगी में किसी को नहीं बताना वैसे एक मिनट रूको
अरनव – क्या हुआ
शनाया  कुछ नहीं बोल कर अपने गले से वो लाकेट निकाल देती है और उसको ओपन करती है
अरनव – ये क्या है भाई इसके अंदर, ये भी एक सवाल है तू पूरे रास्ते इस लाकेट को पकड़ कर मसलती रही..एक काम कर तुझे नहीं बताना मत बता लेकिन बस इतना बता तू ठीक तो है ना मेरा मतलब है तुझे कोई खतरा तो नहीं है.......
शनाया, अरनव के सवाल और उसकी केयर  देखकर हर गुजरते पल के साथ उसकी ओर खींची चली जा रही थी...अपनी भावनाओं को रोकते हुए वो बोलती है
शनाया – अरनव अब एक बात पूछूं मैं
अरनव – हां बोल ना
शनाया – अपना हाथ आगे लाओ
अरनव अपना हाथ आगे बढ़ाता है और बोलता है क्या हुआ
शनाया – मुझसे वादा करो कुछ भी  हो जाए तुम मुझसे ये दोस्ती कभी नहीं तोड़ोगे फिर मैं सही रहूं या गलत तुम सही रहो या गलत..कुछ भी हो जाए हमारी दोस्ती कभी नहीं टूटेगी ।
अरनव, ढलान के पास बैठ जाता है और शनाया को भी इशारा करता है. बैठने के लिए...
 शनाया जैसे ही नीचे बैठती है अरनव उसकी तरफ हाथ बढाता है और बोलता है पक्का प्रॉमिस आज से तू मेरी पक्की वाली दोस्त... कहीं भी कुछ भी हो हम दोस्त हमेशा रहेंगे...
शनाया अरनव की बाते सुनती जाती है औऱ उसके ऑखों से आसूं गिरते जा रहे थे... अरनव को समझ नहीं आ रहा था कि शनाया इतनी कमजोर क्यों पड़ गयी वो शनाया के आसूं देखकर अरनव भी कमजोर पड़ता जा रहा था उसने बड़ी हिम्मत जुटा कर शनाया के कंधे पर अपना हाथ रखा और शनाया उसके अंदर खुद को समेटती गयी....अरनव के लिए शनाया अब औऱ पहेली बन चुकी थी...ऐसी कौन सी बाते है जो शनाया बताने से पहले इतनी कमजोर पड़ गयी.. हर पल हल्ला मचाने वाली शनाया के अंदर आखिर कौन सा तूफान चल रहा था.. जो उसे इतना कमजोर बना रहा था..शनाया के आसूंओं से उसकी टीशर्ट गीली होती जा रही थी... और अरनव अपने दिल से अंजान शनाया की तरफ खींचा चला जा रहा था.. इतने कम से वक्त में ऐसा क्या था इन दोनो के बीच जो एक दूसरे को पास लाए जा रहा था... क्या ये प्यार की शुरुआत थी... या फिर एक ऐसा रिश्ता जिसकी नींव शायद बरसो पहले पड़ चुकी थी....  ये सब कुछ जानने के लिए अगला एपिसोड  पढ़ना मत भूलिएगा...
तूलिका सिंह