कहते है दर्द जब हद से गुजरने लगे तो दो काम करना चाहिए या तो उसे ऐसे भूलो कि वो ज़हन से मिट जाएं या फिर उसको ऐसे अपने दिल में सम्हाल कर रख लो कि उसके होने या ना होने से आपकी आत्मा पर कोई फर्क ना पड़े क्योंकि आत्मा का आत्मा से रिश्ता तो अजर अमर है ऐसा बड़े लोग और किताब कहती है और मैं भी यही मानती हूं... चलिए आपको एक कहानी सुनाती हूं...ये कहानी है बस कुछ दिनो की या हूं कह लिजिए कुछ घंटों की नहीं सिर्फ कुछ पलों की....कुछ पल जिंदगी के ऐसे होते है जो आपकी जिंदगी बदल कर रख देते है...वो इतने खास इतने करीब हो जाते है कि उसका कोई दूसरा विकल्प नहीं होता...बस इतना ही सबसे खास था वो....उससे पहले मैने कभी किसी को छुआ तक नहीं था.. शायद दिल में वो अहसास ही नहीं थे.. या फिर कह लिजिए ऐसे परिवेश में पली थी वो कभी ख्याल भी नहीं आया था.. कि एक बार उससे उसकी भाषा में बात करके देखूं तो ज़रा कैसे होते है ये इनको समझू तो ज़रा लेकिन ना, उनको देख तो मैं रास्ता बदल देती थी...अपने आपको जितना समेट कर चलती थी कि कहीं उनके छू लेने से मुझे नहाना ना पड़ जाए... या फिर बहुत ही गंदे तरीके से डॉट देती थी.. क्योंकि मेरे अंदर का डर मेरे ऊपर हॉवी रहता था....फिर जिंदगी में एक दिन ऐसा आया जब फिज़ाएं बदलने लगी और कहते है ना किसी का आपकी जिंदगी में आना वक्त पहले से तय करके रखता है और शायद जाना भी.....एक साल से उसका मेरी जिंदगी में आना लिखा जा रहा था...में भी खुद को सम्हाले जा रही थी क्योंकि उसका आना मेरी जिंदगी के चेहरे पर खुशी ला रहा था...मुझे भी लगा वो आएगा तो जिंदगी का खालीपन अकेलापन सब खत्म हो जाएगा....मेरे शब्दों में कहे तो सब कुछ WOW होगा....वक्त बितता रहा और उसके आने का दिन नज़दीक आता गया...और मेरे अंदर के सवाल जवाब बढ़ने लगे.. मैं कैसे उसके साथ रहूंगी क्या सब कुछ अच्छे से कर पाउंगी... उसको मैं अपने हाथों से छू भी पाउंगी... शायद नहीं मैं तो बस वो काम करूंगी जो जरूरी है.. मुझसे ना हो पाएगा...ऐसे करते करते काफी दिन गुज़र गए और वो तारीख आ गयी जब उसको मेरे पास आना था या यूं कह लिजिए जब उसकी और मेरी कहानी लिखी जानी थी... दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था...नहीं पता था मैं उसके आने के नाम से इतनी खुश क्यों थी... मन ऐसे मचलने लगा था जैसे ना जाने कब से हम बिछड़े थे और बस कुछ पल में हम मिलने वाले है लेकिन दिल के अंदर का डर भी अपने चरम पर था....फिर वो वक्त आ गया जब वो मेरे घर के बाहर खड़ा था और मेरे हाथों में गुलाब के फूल की थाली थी.. मानो बस मेरी चाहत को नया रंग मिल गया था.... होता भी क्यों ना मेरी जिंदगी में इस तरह का वो पहला अहसास था... और मॆं ऐसी हूं कि जो भी मेरी जिंदगी में पहली बार हुआ वो बस मेरे अंदर कहीं कोने में जाकर बस गया और कभी नहीं निकला ये अहसास भी वैसा ही था....उसको छूने से हाथ कांप रहे थे...दिल डर रहा था....लेकिन जिस पल उसकी खामोश आंखें मेरी नज़रो से टकरायी तो लगा एक पल में वो कितना कुछ कह गया... और मैने उसको अपने सीने से लगा लिया....उसके छोटे छोटे हाथ उसकी नज़रे उसके शरीर की हर हरकत में मेरे लिए सिर्फ प्यार था.. जैसे बच्चा अपनी मां से चिपक कर सुकून महसूस करता है बस वहीं भाव उसके चेहरे पर था... वो बहुत छोटा था सिर्फ 20 दिन का था...उसके कोमल मन को मैं पढ़ने की कोशिश करती रही...और हर बार उसकी आंखों में छिपे उस खालीपन को भरने की कोशिश करती रही..लेकिन शायद नाकामयाब रही... वो जब भी मेरे ऊपर होता मुझे एकटक निहारता मेरी बातों को सुनता मेरा प्यार करना मेरा डांट लगाना सब सुनता लेकिन आंखों में कोई हरकत नहीं थी... उसकी आंखें देख ऐसा लगता ना जाने कितने जन्मों से बिछड़े थे हम और बस आज मिले है तो फिर कैसे इनको तुम्हारी नज़रों से हटने दूं मां.... हां सही सुना आपने उसकी नज़रे मुझे मां बुलाती थी... उसका छोटे से बच्चे की तरह गोद में मुंह छिपाकर सिकुड़ जाना मेरी ममता को और बढ़ाएं जा रहा था.. हर बार यहीं सवाल करती थी ये बोलता क्यों नहीं है इसकी आंखें इतनी उदास क्यों है... और दूसरी तरफ दिल में इसके साथ मैं सपने बुनने लगी....ऐसा लगा बस कुछ दिनो की तो बात है फिर ये मेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलेगा...मेरे लिए हमेशा रहेगा... मुझे प्यार करेगा.... इन सपनो और हकिकत के बीच 4 दिन ही गुजरे थे.... और गुजरते वक्त के साथ उसकी आंखों की उदासी बढ़ने लगी थी.. दिल में आया वो पक्का अपनी मां को याद कर रहा होगा...जब भी उसको ऐसे देखती बस अपने सीने से चिपका लेती... उसका दर्द मुझे हर पल अंदर से कचोटता...हर कोशिश करती कि उसको मैं वो सब दे सकूं जिसका वो हकदार है लेकिन क्या पता था... वो सिर्फ अपना हक अदा करने आया था.. मुझे अपनी मां का दर्जा देने आया था.. मेरी आंखों में नये सपने बसाने आया था...या यूं कह लिजिए मेरे अंदर के डर को मारने आया था... वो बेज़ुबान था...लेकिन उसकी एक एक बाते मेरे जहन पर अपनी मजबूत नींव बनाता चला गया......मुझे लगा वक्त के साथ वो ठीक हो जाएगा.. डॉक्टर भी यहीं कहते रहे वो ठीक हो जाएगा...और फिर वो आखिरी दो घंटे... जब वो डॉक्टर के पास से आया थोड़ा ऐक्टिव था.. मेरे पैरो के बीच से चिपक चिपक कर निकल रहा था.. मैं उसको दुलार से डांट रही थी...अगले पल वो मेरे ऊपर बैठा था... एक दम चिपक कर इतने करीब बस हमारे और उसके बीच कोई दूरी नहीं थी में उस पर अपना लाड़ लुटाएं जा रही थी... उसके माथे पर छोटा सा चुम्बन किया और बोले जा रही थी.. जल्दी जल्दी तुम ठीक हो जाओ नहीं तो बहुत मार पड़ेगी....मैं अच्छी नहीं हूं तुम मुझे बहुत तंग करते हो पूरा दिन अपने पीछे लगाए रहते हो खाना पीना तुमने छोड़ रखा है ऐसे नहीं चलेगा मां हूं मैं सोच लो.. और वो मासूम तब भी मुझे बिना हरकत के एकटक देखे जा रहा था... ऐसा महसूस होता है अब कि मानो कह रहा हो मां बस कुछ पल और अपने सीने से मुझे चिपका रहने दो बस कुछ पल का साथ है मेरा.. लेकिन मैं इतनी भी समझदार नहीं थी कि उसकी बातो को समझ पाती.... अपनो काम के धुन में लग गयी और वो अपने छोटे छोटे कदमों से पूरे घर के चक्कर लगाने लगा.. शायद उसको पता था ये पल उसके आखिरी है... जब सांसे उसका साथ छोड़ने लगी तो धीरे से गोद में आकर बैठ गया उसकी आंखें धीरे धीरे छोटी होती जा रही थी वो निढाल होता जा रहा था.. और मैं अपने दोनो हथेलियों से उसको पुचकारे जा रही थी कहें जा रही थी कितने आलसी हो तुम फिर सो रहे हो.. और उसकी बंद होती आंखो के उस पल के हजारवें हिस्सें से भी वो मुझे देखे जा रहा था... और बस अगले पल उसकी आंखें बंद थी और मुंह खुला था... और मैं बेबस बेहाल निढाल हो गयी थी नहीं समझ आया.. कि क्या हो गया उसको उस एक पल में मैं खाली हो चुकी थी इतनी कि शायद अब कभी मैं किसी को भी उसका दर्जा नहीं दे पाउंगी मेरी ममता को वो और ऊंचा कर गया और मुझे बेबस मां का दर्जा दे गया.. एक ऐसी मां जो अपने बच्चें को नहीं बचा पायी... अपने हाथों में उसकी आखिरी सांसे देखी थी... तड़प कर रह गयी मैं...इतना दर्द वो भी सिर्फ चार दिन की मुलाकात में इतनी जल्दी तो मैं किसी से कोई रिश्ता नहीं बनाती फिर मां बेटे का रिश्ता तो सवाल ही नहीं उठता लेकिन अगले पल अहसास हुआ ये रिश्ता मैने बनाया नहीं था.. ये तो पहले से था शायद किसी जन्म का हिसाब था जो वो मेरे पास आया ढेरो खुशियां लाया और जाते जाते मुझे अपनी मां का दर्जा दे गया... भगवान से हर पल प्रार्थना करती हूं वो जहां भी जन्म ले उसको भगवान ढेरों खुशियां दे इस मां की दुआ है उसे कभी कोई तकलीफ ना हो वो इतना मजबूत शख्स बने कि जिस तरफ भी उसकी नज़रे पड़े सबका भला हो....वो सम्राट की तरह जिए और भगवान ने कभी फिर से इस धऱती पर मुझे भेजा तो उसकी मां मैं जरूर बनूं वो कोई और नहीं था मेरा 20 दिन का spidey था एक कुत्ता जो मुझे इंसान से ज्यादा प्यार और उतनी ही ज्यादा तकलीफ देकर चला गया...........
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