Sunday, 10 June 2012

मम्मी पापा के हौसले को मेरा सलाम

मासूम से बचपन में कोमल मन भी सपने देखता है आसमान की ओर देखकर ऊंचा उड़ना चाहता है कभी अपने सपनो के पंख फैलाकर तो कभी मां का हाथ थामकर मासूम दिल अपनी हसरत पूरी करने की कोशिश जरूर करता है मैने भी अपनी मां का हाथ थामा लेकिन कदम उन्होंने मेरे साथ मिलाए मैं छूना चाहती थी उस ऊचांई को जिसे शायद मेरे आसपास किसी ने भी सपने में देखा नहीं था..................... आज मैं जो कुछ भी हूं अपने मॉ पापा और भाईयों की वजह से हूं मैं अपनी जिंदगी से बेहद खुश हूं भगवान ने मुझे वो सबकुछ दिया जिसका मैने कभी सपना देखा था..... लेकिन ये सपने मैने तब देखे थे जब लड़कियों का पढ़ना जरूरी नहीं समझा जाता था.... और अगर पढ़ लिया तो उसका मकसद सिर्फ शादी तक ही होता था.....लेकिन मेरी मां औऱ पापा ने मुझे वो सपना दिया जो शायद मेरी मां पूरा नहीं कर पायी थी..... मेरी मॉ ने बीएचयू से पीएचडी की उनको पढ़ाया भी पापा ने था लेकिन मॉ जॉब करना चाहती थी पर वो कर ना सकी सिर्फ कुछ लोगो कि छोटी मानसिकता और औऱ जिम्मेदारियों ने.....पापा ने अपने परिवार के लिए बहुत किय़ा आप कहेगें इसमे नया क्या है सही बात है नया ये था कि जिनके लिए पापा मरते रहे उन लोगो ने ही पापा का इस्तेमाल किया और उनके बच्चों के ऊपर जुल्म करने लगे ..... कहने को तो हमारे चाचा चाची दादा दादी..... सब कोई था लेकिन उनका प्यार हमलोगो को कभी नसीब नहीं हुआ.........हद तो तब हो गई जब मुझे पता चला कि मेरे बाबा दादी ही नहीं बल्की नानी भी मेरी मॉ का इस्तेमाल कर रही है .... सच कहूं तो बड़ झटका लगा था हम सबको.... कि जो रिश्ते मरने के बाद भी खत्म नहीं होते वो इतने बेमानी थे ....... खैर जब तक इन सबका पता चला मेरे मम्मी और पापा का सब कुछ खत्म हो चुका था.....मॉ ने अपने घर से नाता तोड़ लिया और पापा भी अलग हो गए लेकिन पापा को ये सदमा ऐस लगा कि वो बिमार पड़ गए..... चाचा ने दुकान धोखे से ले लिया नानी ने मॉ से अपना उल्लू सीधा किया .....हद तो तब हो गई जब मेरे बाबा ने पापा के ही बनाए घर से उन्हें अलग कर दिया वो भी तब जब मेरे पापा बिस्तर से उठ तक नहीं सकते थे......तब तक मैं क्लास 10 में पहुंच चुकी थी रिश्तों की ऐसी नुमाइश मेरे सामने लग चुकी थी जिसका मुझे दूर दूर तक इल्म नहीं था............ कहावत सुनी थी पूत कपूत हो सकता लेकिन माता कूमाता नहीं हो सकती थी....... हॉहॉहॉ वो कहावत भी झूठी हो गई थी ......... ना कोई रिश्ता बचा था ना ही पैसा बचा था...लेकिन एक चीज अब भी बरकरार थी मेरे मम्मी पापा का हौसला मैं उस हौसले को सलाम करती हूं और गर्व करती हूं की मैं उनकी बेटी हूं............ मैं और मेरे दो छोटे भाई कुछ ना रहते हुए भी सपने देखते रहते थे कि कभी तो हमारा दिन भी आएगा.......स्कूल की पढ़ाई आगे जारी रखने के लिए पैसे नहीं थे लेकिन पापा ने मेरी पढ़ाई कभी नहीं रोकी उनका मानना था कि लड़कियों के लिए आत्म निर्भर होना बेहद जरूरी है .....मेरे भाई बेशक 10 के बाद स्कूल कॉलेज का मुहं नहीं देख पाएं दोनो पापा के साथ मिलकर छोटी सी उम्र में ही बिजनेस में लग गए.......लेकिन उनके हौसले तब भी बुलंद थे मेरी 10 तक की पढ़ाई यूपी बोर्ड से हुई फिर पापा ने सीबीएससी बोर्ड के इंग्लिश स्कूल में करा दिया मेरे तो वही हालत थी सत्य नारायण भगवान की कथा हो रही है खत्म होगा तो चूरन बटेगा ........हंसी आती है वो बाते याद करके पापा नोे ट्यूशन लगवाया 10000 रूपए महिने का और मेरा हौसला बढ़ाते रहे बाकी लड़कियों की तरह मुझे अच्छे कपड़े गहने पहनने का सुख नहीं मिला और ना मेरा शौक था लेकिन किताब के लिए पापा ने पैसा का कभी मुहं नहीं देखा कर्ज लेकर भी वो किताब जरूर लाते थे.... कई मुश्किलों का समाना करते हुए मैने 12 पास किया ......... आगे का सफर अगले पोस्ट में..............

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