यादों की हवा में अतीत के कुछ पन्ने आज बाहर आने लगे.....
दिल की दिवारों पर लिखे हुए वाकिए बीते हुए कल में झांकने लगे......
मेरे कल ने कब आज पर हुकूमत कर ली अहसास ही ना हुआ.....
पीछे मुड़ कर देखा तो मेरा कल गर्व से खड़ा मुस्कुरा रहा था.......
वो उन दिनों की बात है.....
जब मेरा बचपन अपनी अंतिम सास ले रहा था...
और जवानी नए सफर के लिए तैयार थी....
ना रास्ते का पता था....
ना मंजिल का ठिकाना....
बेफिक्री से ज़िंदगी गुजर रही थी....
तूलिका यूं ही अपने रंगों को बिखेर रही थी....
लेकिन थी उन्हें फिक्र तूलिका के रंगों की .....
कोई बर्बाद ना कर सके उसे.....
अपने नए आयाम में रंग भर सके तूलिका......
नहीं जानती थी मैं मेरी दूसरी मां ने की थी मेरी इतनी फिक्र......
अल्फाज़ मेरे गलत निकले नहीं....
वो दूसरी मां ही तो थी.....
जो बाहर की दुनियां में कदम रखू कैसे
सिखाया मुझे हर पल.....
मेरे अंदर की छिपी तूलिका को पहचाना उनकी नज़रो ने
सही-गलत, अच्छा- बुरा..... सबके मायने समझाएं मुझे....
सब आज की बाते करते थे.... वो आने वाले कल में ले जाती थी मुझें
मुझे खुद पर भरोसा करना सिखिया...
अपनी बात को दिल खोलकर रखना सिखाया...
छोटी सोच वाले समाज में बड़ा होकर जीना सिखाया....
उन्होंने हमारे दिल में मजबूत सा कोना बनाया....
नहीं भूलते उन्हें हम अपने सुख दुख में....
हर पल साथ होने का अहसास कराया
आप जैसा गुरू हमने अपनी ज़िंदगी में नहीं पाया....
आपका दिया हुआ हम वापस कर सकते नहीं...
सिर्फ अपने सर को ताउम्र झुका सकते है हम....
धन्यवाद करती है तूलिका आपको.
उसके रंगो को आपने सही पहचान दिलाया
दिल की दिवारों पर लिखे हुए वाकिए बीते हुए कल में झांकने लगे......
मेरे कल ने कब आज पर हुकूमत कर ली अहसास ही ना हुआ.....
पीछे मुड़ कर देखा तो मेरा कल गर्व से खड़ा मुस्कुरा रहा था.......
वो उन दिनों की बात है.....
जब मेरा बचपन अपनी अंतिम सास ले रहा था...
और जवानी नए सफर के लिए तैयार थी....
ना रास्ते का पता था....
ना मंजिल का ठिकाना....
बेफिक्री से ज़िंदगी गुजर रही थी....
तूलिका यूं ही अपने रंगों को बिखेर रही थी....
लेकिन थी उन्हें फिक्र तूलिका के रंगों की .....
कोई बर्बाद ना कर सके उसे.....
अपने नए आयाम में रंग भर सके तूलिका......
नहीं जानती थी मैं मेरी दूसरी मां ने की थी मेरी इतनी फिक्र......
अल्फाज़ मेरे गलत निकले नहीं....
वो दूसरी मां ही तो थी.....
जो बाहर की दुनियां में कदम रखू कैसे
सिखाया मुझे हर पल.....
मेरे अंदर की छिपी तूलिका को पहचाना उनकी नज़रो ने
सही-गलत, अच्छा- बुरा..... सबके मायने समझाएं मुझे....
सब आज की बाते करते थे.... वो आने वाले कल में ले जाती थी मुझें
मुझे खुद पर भरोसा करना सिखिया...
अपनी बात को दिल खोलकर रखना सिखाया...
छोटी सोच वाले समाज में बड़ा होकर जीना सिखाया....
उन्होंने हमारे दिल में मजबूत सा कोना बनाया....
नहीं भूलते उन्हें हम अपने सुख दुख में....
हर पल साथ होने का अहसास कराया
आप जैसा गुरू हमने अपनी ज़िंदगी में नहीं पाया....
आपका दिया हुआ हम वापस कर सकते नहीं...
सिर्फ अपने सर को ताउम्र झुका सकते है हम....
धन्यवाद करती है तूलिका आपको.
उसके रंगो को आपने सही पहचान दिलाया
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