Friday, 17 February 2017

MAYA "THE UNFOLD LOVE STORY" CHAPTER -1


ठंडी हवाओं के थपेड़ों से खुद को महफूज़ रखने के लिए माया शॉल को खिंचे जा रही थी....
चमकती आंखों पर मोटा चश्में के पीछे सिकुड़ती नज़रें  और होठो पर भीनी सी मुस्कुराहट ना जाने माया मन ही मन क्या सोचे जा रही थी..... .....
मां कहां हो तुम......
क्या सोच रही हो.....
मैं कब से तुमसे बोले जा रही हूं......
.उसकी बेटी आद्या ने जोर से माया को हिलाया...
तुम ना जाने किस दुनियां में हो.....मां....
क्या सोच रही हो मुझे भी बताओं  ना.....
तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो ना.....
मैं तुमसे सब कुछ शेयर करती हूं.......
लेकिन तुम बिल्कुल भी नहीं
आद्या ने प्यार से गुस्सा दिखाया और माया की गोद में सर रख कर लेट गई........
नहीं बेटा कुछ भी तो नहीं बस इन ठंडी हवाओं के साथ गुनगुनी धूप का आनंद ले रहीं हूं...... माया ने प्यार से आद्या के बालों को सहलाते हुए बोला......और आद्या को निहारने लगी.....
घुघंराले लंबे बाल....हिरनी जैसी बड़ी बड़ी आखें गोरा चेहरा....और चेहरे पर छोटे बच्चे जैसी मासूमियत.....दुबली पतली और गजब की लंबाई....आद्या के रूप रंग को देख कर माया की आखों में गर्व छलक रहा था...
वो ऐसी ही बेटी तो चाहती थी.... 
जो हर तरह से उससे बेटर हो....
.माया मन ही मन भगवान को धन्यवाद देने लगी...

अचानक आद्या माया की आंखों में झांक कर बोली मां एक बाता पूछूं.... आपसे..... सच सच बताओगी....... 
आद्या के इस आग्रह में ना जाने कितने ही सवाल छिपे थे....बोलो बेटा.....

माया ने अनमने से जवाब दिया जैसे वो चाहती नहीं थी..... कि इस वक्त कोई भी उससे कुछ भी कहें या पूंछे लेकिन आद्या उसकी परछायी थी.......उसे वो मना ना कर सकी.....
.
मां की हां सुनते ही जैसे आद्या ने लंबी लिस्ट तैयार कर रखी थी  सवालों की .....
हो भी क्यों ना आद्या अब 21 साल की हो चुकी थी......उसके सवालों की लिस्ट हर दिन तैयार रहती थी........

माया ने झुझंलाते हुए कहां...... पूछ ना आद्या.... क्या पूछना चाहती है.....पहले आप मुझसे वादा करों मैं जो भी पूछूंगी आप सच सच और पूरा बताओगी......
ठीक है बाबा बताउंगी अब पूछेंगी भी या सिर्फ पहेलियां बुझाएगी......
मां को मानसिक तौर पर तैयार देख आद्या ने गहरी सांस ली...... 
और पूछा मां क्या आपने कभी किसी से प्यार किया है.......
I MEAN आपको प्यार कब हुआ था.....
मां क्या प्यार करने के लिए सुंदर होना जरूरी है.......
बोलो ना मां क्या किसी का प्यार पाने के लिए सीरत से
ज्यादा सूरत अच्छी होनी चाहिए....
हां एक सवाल और क्या पहला प्यार इंसान कभी नहीं भूलता....
कैसे मिलता है पहला प्यार
ऐसे सवालों को सुन माया को लगा जैसे किसी ने उससे उसके अतीत की दांस्ता पूछ ली हो.....
आद्या ये क्या सवाल है...... बेटा....
माया ने झुंझलातें हुए जवाब दिया....
प्यार व्यार कुछ नहीं होता.... सिर्फ समय की बर्बादी है......
सूरत और सीरत का प्यार से कोई लेना देना  नहीं होता
भगवान ने तेरे लिए जिसको बनाया होगा वो खुद ब खुद तुझे मिल जाएगा
उसी से प्यार करना वहीं तेरा पहला प्यार होगा.......माया की सांसे इतनी तेज चल रही थी.... कि उसका  गला सुख गया......
ठंड में भी उसके माथे से पसीने आ रहे थे.......जैसे वो कुछ था जिसे छिपाने की कोशिश किए जा रही थी.......आद्या मां की ऐसी दशा देख खामोश हो गई....... 

SORRY MAA मैं तो बस आपसे इसलिए जानना चाह रही थी क्योंकि मेरी सहेली सुमन ने मुझसे कहा कि उसे उसका पहला प्यार मिल गया..... अब वो उसी से शादी करेगी......लड़का उसकी सुंदरता को देख उस पर मर मिटा और सुमन तो जैसे इंतजार ही कर रही थी..... कब कोई आए और उससे अपने प्यार का इजहार करें.....
आद्या माया को सॉरी बोल धीरे से चली गई.........लेकिन माया अब भी जैसे आद्या के सवालों में ही जकड़ी हुई थी....... शायद उसे खुद उन सवालों के जवाब नहीं मालूम थे.....
गुनगुनी धूंप धीरे धीरे अपने शबाब पर चढ़ रही थी.... और माया अतीत की गहराइयों में
गोते लगाने लगी.....

FLASHBACK
इलाहाबाद संगम किनारे बसा एक ऐसा शहर जिसकी मिट्टी में ही गंगा जमुना की तहजीब बसी हुई थी...सूरज अपनी आंखे भी संगम को देख कर ही खोलता है....सलीके से बसा हुआ लेकिन बिल्कुल शांत शहर..हां शोर गुल आती भी तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से.. उस ओर से गुजरो तो बस शांतिपूर्वक कभी हॉकी के साथ मार पिटाई की आवाज आती है या फिर कभी कभी गोलियों की मधुर आवाज़ सुनने को मिल जाती है.... 
लेकिन मजाल जो पुलिस कभी शहर की शांति को भंग होने दे ....बेहद ही शांत शहर है इलाहाबाद ना तो रोजमर्रा की भागदौड़ ना ही  महानगरों जैसा किच किच....जिधर भी नजर डालो बस शांत वातावरण....लोगो का दैनिक जीवन इतना शांत और इत्मनान वाला कि मुम्बई का आदमी यहां दो दिन के लिए आ जाएं तो उसका चैन छिन जाए....

लेकिन इसी शहर में थी तो सिर्फ एक माया.... जिसके बातों की लंबी लिस्ट और काम की रफ्तार देख कर राजधानी ट्रेन भी मुंह छिपा ले....उम्र 20 साल 5 फिट 9 इंच की हाइट चेहरे पर गजव का तेज ..... सलवार समीज के साथ सलीके से दुपट्टा लेकिन चाल में  एक दम इलाहबादी अक्खड़ पन....बातों में तेवर और दोस्तों की यार दिलदार किसी से भी लड़ने को तैयार ऐसी थी माया.....इलाहाबाद की डॉन थी माया... ऐसा उसके दोस्त कहते थे.....
माया के पापा राकेश खन्ना एक छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते थे.. माया की मां राधा  हाउस वाइफ थी लेकिन पूरे घर में सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी.. छोटा सा परिवार था माया का.. .... घर मे सबसे बड़ी थी.... वो……. उससे छोटे तीन भाई थे.....रजत रंजित और रौशन .. रजत 14 साल का था जबकी रंजीत और रौशन 11  और 10 साल के थे...रोज की तरह ही सुबह के 6 बज रहे थे और पूरा घर माया ने अपने सर पर उठा रखा था.....

हर सुबह की शुरुआत भाई बहन के नोक झोंक से ही होती थी ......हर दिन की तरह माया तैयार होकर  भगवान के सामने हाथ जोड़े खड़ी थी......तभी उसके भाई रजत ने उसको छेड़ दिया..... दीदी....भगवान को नहीं आपको अपना काम पूरा करना है.....यहां कुछ नहीं होगा.... जल्दी जाइए देर हो रही है आपको...... माया ने गुस्से में रजत को देखा.. अपना पर्स उठाया और अपनी राम प्यारी की तरफ बढ़ गई...... माया की साइकिल ही उसकी राम प्यारी थी..... जिसे वो दिलो जान से चाहती थी.......मां मैं जा रही हूं.... लेट हो रहा है.... टाइम पर वापस आ जाउंगी....... माया बोल कर अपनी इंग्लिश क्लासेज के लिए निकल गई........अपनी राम प्यारी पर बैठते ही माया का तेवर एक दम बदल जाता जैसे साइकिल पर नहीं फरारी में बैठी हो.....हवा से भी तेज रफ्तार में साइकिल चलाना माया का शौक था.....

इलाहाबाद की सड़कों पर माया को ट्रैफिक बिल्कुल भी पंसद नहीं था... दो चार गाड़ियां रास्तें में क्या आ जाएं माया का चेहरा गुस्से से लाल हो जाएं.....

अरे सड़क तेरे बाप की है क्या कब से घंटी बजा रही हूं और और तुम्हें सुनायी नहीं दे रहा... माया ऑटो वाले के सामने साइकिल लेकर खड़ी हो गई....और गुस्से से चिल्लाने लगी....ऑटो वाला अवाक हो कर माया को देखने लगा जैसे उसे उम्मीद हीं नहीं थी कि कोई इतनी सुबह सुबह भी ऐसे चिल्ला सकता है...भागती दौड़ती माया क्लास में पहुंची ही थी कि ही उसके ऊपर बम बारी शुरू हो गई......और मिस माया आज ग्रुप डिश्क्शन है और आपको सबसे पहले बोलना है.......यस सर वाई  नॉट माया ने तपाक से जवाब दिया....और अपने क्लासमेट को घूर कर देखने लगी... जैसे ये सारी प्लॉटिंग उसी की थी......माया को बड़े शहर में जाकर पढ़ना था लेकिन इंग्लिश में बोलना तो दूर कुछ लिखा भी दिख जाए तो ना जाने किस शब्द का क्या अर्थ लगा ले उसको कोई नहीं न समझ सकता था... ऐसे में ग्रुप डिश्कशन में पहले बोलना माया के लिए किसी जंग से कम ना था....कैसे भी करके किसी तरह माया ने क्लासेज खत्म की और.... पहुंच गई अपने कॉलेज….

TO BE CONTINUED...........

20 comments:

Foodoholic Food Group said...

Intresting tulika... Wl wait to kw more about maya

Foodoholic Food Group said...

Intresting tulika... Wl wait to kw more about maya

tulika singh said...

Sure ankita keep reading follow the blog i posted next episode

Unknown said...

Lovely...

tulika singh said...

Tx rashmi keep reading

Unknown said...

Its really nice Tulika.....grt job done

Unknown said...

Its really nice tulika......grt job done....proud of u

Unknown said...

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Unknown said...

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Unknown said...

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tulika singh said...

Tx monika keep reading the story will unfold gradually

Sweety said...

Gr8...waiting for next episode..

tulika singh said...

Tx dear follow the blog daily u will know more and more about maya

Ocean said...

It's feeling like all is happening in front of me. It's a heart touching story....My dear 😊

tulika singh said...

Tx shweta keep reading

Unknown said...

Vary nice

Unknown said...

Interesting tulika

Unknown said...

Interesting tulika

ajay said...

Maya :)
Reminds me some one :)

tulika singh said...

Tx ajay keep reading