Thursday, 23 February 2017

Maya "The Unfold Love Story" Chapter-7


माया अपनी पहली क्लास में बिलकुल भी थकी सी नहीं दिखना चाहती थी... वो बच्चों के सामने एक दम फ्रेश दिखना चाहती थी... उसने अपना चेहरा रूमाल से साफ किया डीयो स्प्रे किया और चेहरे पर एक झूठी मुस्कान के साथ क्लास में दाखिल हो गयी...लेकिन माया अपने दिमाग पर काबू नहीं कर पा रही थी...राहुल
की बाते और पैर का दर्द माया के झूठी मुस्कान पर हॉवी होती जा रही थी... माया ने किस तरह अपना क्लास खत्म किया और घर के लिए निकल गयी
घर पहुंच कर माया ने किसी से कोई हंसी मजाक नहीं किया... बड़े ही गंभीरता से उसने राधा से बोला
माया- मां आज मैं खाना नहीं खाउंगी पेट नहीं ठीक है.. और थक गई हूं कल मेरा प्ले भी है... मुझे सोना है कल जल्दी उठना होगा...
माया की बाते सुनकर राधा ने आज माया से कोई सवाल नहीं किया खाना प्लेट में ढक कर रख दिया और बोल दिया जब भूख लगे खा लेना सो जाओं तो कल फिर फ्रेश रहोगी... पैर का दर्द कैसा है..
माया- मां बस दर्द है कल तक नहीं ठीक हुआ तो डॉक्टर को दिखा दूंगी.. इतना कहकर माया अपने कमरे की लाइट बंद कर दीवार की तरफ मुंह करके लेट गई...लेकिन माया के अंदर का दर्द उसको सोने ही नहीं दे रहा था.... माया बिना आवाज किए रोये जा रही थी....उसके आंसू रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थे... माया का चेहरा रो रो कर लाल हो चुका था....उसके दिल में बस एक ख्याल था कि.. राहुल ने उससे इतनी बेरूखी से क्यों बात की... मेरी क्या गलती थी.... राहुल मेरे बारे में क्या सोचता है खुल कर बता दे मैं कौन सा उससे जबरदस्ती कह दूंगी मुझसे प्यार करों... मैं प्यार करती हूं ये मेरी मर्जी है....माया रोएं जा रही थी... और मन ही मन खुद से सवाल करती जा रही थी...
माया को रत्ना की बात याद आने लगी... कहीं सच में रत्ना की आह तो नहीं लग गई मुझे.. मैने उसका मजाक बनाया था आज मैं खुद एक मजाक बन कर रह गई हूं...एक पल में माया ने खुद को सम्हाला  अपने आसूंओं को पोछा...और खुद को डाटनें लगी... रत्ना के साथ मेरी कोई तुलना है क्या.... मेरा प्यार इन सबसे ऊपर है..बस दुख है तो इतना राहुल मुझसे साफ साफ क्यों कह नहीं देता... सोचते सोचते माया सो गई.....
NEXT DAY MORNING
 सुबह के 10 बज गए थे...माया  अब तक नहीं उठी थी....राधा किचन से ही माया को आवाज लगा रही थी... माया उठों अरे कॉलेज नहीं जाना क्या आज तो तुम्हारा प्ले है... माया उठ जा बेटा
माया दर्द से कराहते हुए उठी उसके पैरो की सूजन बढ़ गई थी...उसका बदन एक दम तप रहा था....
राधा – माया तबियत कैसी है
माया- ठीक है मां
राधा- हम लोगो को कितने बजे पहुंचना है
माया- शाम  5 बजे
राधा- ठीक है बेटा तुम कब निकलोगी
माया- बस मां थोड़ी देर में निकलूंगी....
माया ने खुद को सम्हाला...और बिस्तर से उठी....तैयार हो कर घर से बाहर निकल गयी... लेकिन आज माया से साइकिल नहीं चल रही थी.. उसने थोड़ी दूर चलाया... लेकिन पैर ने जवाब दे दिया था... माया ने चुपचाप साइकिल लॉक किया औऱ ऑटों से कॉलेज के लिए निकल गयी..

आज माया का मन बहुत उदास था....उसका दिल हो रहा था कि.. कालेज जाने से पहले राहुल को फोन कर ले और पूछ ही ले आखिर तुमने मेरे साथ इतनी बेरूखी से बात क्यों की....माया फोटोस्टेट की शॉप पर ऑटो से उतरी और  कॉलेज की तरफ बढने लगी...तभी माया ने दूर से राहुल को देख लिया...उसका मन हुआ कि वहीं से चीख कर राहुल को आवाज लगाए...लेकिन उसने ऐसा नहीं किया...

कुछ ही पल में राहुल उसके बहुत करीब आ गया था... माया ने भी अपना आत्म सम्मान इकट्ठा किया और ऐसे SHOW करने लगी जैसो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता तुम मेरे सामने भी आ जाओं तो ... लेकिन मन ही मन माया चाह रही थी कि राहुल उसके पास आएं और उससे बाते करें...मायाकी बात शायद सच होने वाली थी... राहुल माया की आंखो के सामने था.... लेकिन उसने माया को सिर्फ हैलो बोला और फोटोस्टेट की शॉप में चला गया जाते जाते बोल गया मैं तुझसे आराम से बात करता हूं.. माया ने भी खुद को बेफिकर दिखाते हुए बोला  its ok  go carry on your work माया बोलकर कॉलेज की तरफ बढ़ गयी....लेकिन अब माया के अंदर का दर्द और बढ़ गया था.. माया राहुल की इस बेपरवाही को समझ ही नहीं पा रही थी...की उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है......माया सोचते सोचते स्टेज की तरफ बढ़ गयी...

माया को देखते ही वहां पर मौजूद सबने एक साथ बोला... अरे देखों हमारा रावण आ गया...कब से तेरे इंतजार में बैठे है हम तू आए और मुझे उड़ा कर ले जाएं.... बड़े ही शायराना अंदाज में सीता ने कहा.....माया तेज से हंसने लगी...और कहने लगी ऐसा पहली बार होगा जब सीता रावण के इंतजार में बैठी होगी.. कब रावण आएं और मैं राम को छोड़कर चली जाऊं...
माया की बात सुनकर सब हंसने लगे.... माया ने चारों तरफ नजर दौड़ायी..उसको पीहूं कहीं नजर नहीं आ रही थी...माया धीरे धीरे ग्रीन रूम की तरफ बढ़ गयी ...ग्रीन रूम में नजारा ऐसा था.. जैसे रामायण के सभी पात्र जीवित हो गए थे...माया की नजर पीहूं पर पड़ी.. अबे तुम कब की आयी हो... हम तुम्हे बाहर खोज रहे थे... वैसे एक दम मस्त शुपनखा लग रही हो...माया पीहूं को देखकर बोल ही रही थी.. की दूसरे कोने से तेज आवाज आयी... रावण आ जाओं अब सिर्फ तुम बची हो... अपना कॉस्ट्यूम पहन लो....माया ने जी मैम बोला... पीहूं को रूकने को बोला...और चली गयी...थोड़ी देर बाद  माया तैयार हो कर आयी....चेहरा पूरा लंबी दाढ़ी से ढका हुआ... काले रंग की धोती.. कंधे तक घुंघराले बाल सर पर नग से जड़ा हुआ मुकुट लाला रंग का अंग वस्त्र...माया का मेकअप ऐसा था... कि अगर माया मुंह ना खोले तो कोई पहचान ना पाए माया लड़की है या लड़का... लेकिन माया की आंखों में दर्द वहीं चिरपरिचित सा था...पीहूं.. माया को निहारे जा रही थी...
पीहूं- माया कल कुछ हुआ क्या बाद में भी... तुम्हारा पैर कैसा है ..
माया- मैं एक दम ठीक हूं और मेरे पैर भी अपनी करनी का फल भुगत रहे है....माया ने बहुत ही बेरूखी भरे अंदाज में पीहूं को जवाब दिया
पीहूं- क्या हुआ तू ठीक है ना
माया- हां पीहूं मैं बिलकुल ठीक हूं...मुझे कुछ नहीं हुआ है...
पीहूं ने माया का हाथ पकड़ा और पकड़ते ही तेजी से हटा लिया...
पीहूं – माया तुझे तो FIVER  है...
माया- यार वो पैर के फोड़े की वजह से है... आज तो टाइम मिलगा नहीं कल जाउंगी डॉक्टर के पास मैने फीवर की दवा खा ली है....
पीहूं- झूठ बोल रही है तू
माया- सच बोल कर भी क्या कर लूंगी यार.. सच बोलने का ही नतीजा है आज मैं इतना दुखी हूं..
पीहूं- क्या हुआ  बताएगी
माया- कुछ नहीं यार अब मैं सिर्फ रावण हूं माया फिकी हंसी के साथ तेज तेज हंसने लगी...
पीहूं – माया तुमने कुछ खाया है
माया- नहीं आज कुछ नहीं पहले प्ले हो जाए अच्छे से फिर नहीं तो मेकअप खराब हो जाएगा..
पीहूं – पागल है क्या रात तक कुछ नहीं खाना
माया- नहीं यार चल चलते है... स्टेज की तरफ प्ले शुरु होने वाला है... माया की चाल में लड़खड़ाहट थी... वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी...प्ले शुरु हो गया...
शुपनखा राम और लक्ष्मण के बीच का संवाद चल रह था... माया का दर्द असहनीय हो गया था...तभी रावण की ENTRY का वक्त आ गया
डायरेक्टर दादा- माया आखों में इतना गुस्सा होना चाहिए लोग कांप जाए...लगना चाहिए कि तुम्हारी बहन का अपमान हुआ है...
माया- जी सर
माया अपना किरदार निभाने स्टेज पर पहुंच गयी ...चारों तरफ से तेज तालियों की आवाज गुंजने लगी....माया की लड़खड़ाती चाल अभी एक रोबीले दार शख्स की तरह हो गई थी...माया सब कुछ भूल कर रावण के पात्र में ढल चुकी थी....अगले सीन में रावण को सीता का हरण करना था...अब माया  ने पूरी हिम्मत जुटायी और साधू  की तरह एक गेरुआ वस्त्र ऊपर से डाला और आ गई स्टेज पर सीत और रावण के बीच का संवाद अपने चरम पर था..रावण ने अपनी ताकत लगाते हुआ सीता को खींच कर ले जाने लगा...वो तेज तेज हंस रहा था... लेकिन रावण के अंदर जो माया थी... उसका दर्द भी चरम पर पहुंच चुका था... माया का पैर खून के रंग में रंग चुका था.....जहां जहां उसके कदम पड़ते खून के निशान बनते जा रहे थे... रावण  के किरदार के साथ माया ने पूरी ईमानदारी दिखाई.. वो तब तक चलती रही जब तक उसको स्टेज पर सीता को खींचते हुए चलना था  माया की दशा देखकर स्टेज की साइड विंग में खड़ी उसकी टीचर डायरेक्टर सर सबके चेहरे पर चिंता की लकीरे आ गयी थी.माया जैसे ही बैक स्टेज आयी पीहूं ने उसको सम्हाला और उसके कॉस्ट्यूम चेंज करने लगी... माया फीकी सी हंसी के साथ पीहूं को रोकने लगी
माया- पीहूं जाने दे I can manage कुछ नहीं हुआ है... ये तो होना ही था... दर्द ज्यादा बढ़ जाएं तो निकल ही जाना चाहिए... अब मैं ठीक हूं पहले जैसी हूं...
पीहूं- तूझसे मैने पूछा भी था कि क्या हुआ तूने कुछ नहीं बताया.. राहुल से कोई बात हुई क्या तेरी...
माया- राहुल से अब कोई बात नहीं होगी.. मैने सच को समझ लिया है.... बस समझने में  थोड़ा देर हो गयी.. माया कहते कहते रोने लगी...
पीहूं- माया प्लीज रो मत
माया- नहीं यार आज बह जाने दे अब नहीं बहाउंगी इस आसूं को.. मैने समझ लिया है..कि मैं राहुल के काबिल नहीं हूं मैं सुंदर नहीं हूं और लड़कियों जैसी काबलियत शायद मेरे अंदर नहीं है इसमें राहुल की कोई गलती नहीं है...मैं ही गलत फहमी की शिकार थी.... माया रोए जा रही थी.. और बोले जा रही थी.. पीहूं माया का सर अपने सीने पर लगाकर उसको सम्हाल  रही थी... की माया को कई लोग खोजते खोजते ग्रीन रूम के पास आ गए थे...माया पीहूं चलो मैम बुला रही है स्टेज पर ग्रुप पिक्चर लेनी है आ जाओं कह कर कुमुद बाहर निकल गई...
माया ने अपने आपको सम्हाला और पीहूं के साथ बाहर आ गई....रावण शुपनखा सीता राम की तारीफ सबने दिल खोलकर की... माया इस मंजर को देख खुश हो गयी थी.. उसे इसी पल का इंतजार था... पीहूं से उसने धीरे से बोला.. चलों मेरा खून मेरे कुछ तो काम आया...पिक्चर क्लिक होने के बाद सब वापस घर को जाने लगे.. माया भी अपनी मां के साथ घर के लिए निकलने लगी...तभी पीहूं ने माया के कान में धीरे से बोला..
पीहूं- कल कॉलेज बंद है लेकिन हम सब आएंगे.. तुम भी आ जाना.. फन करेंगे.. माया ने इशारे से हां बोला और निकल गयी ...
राधा- बेहतरीन था तुम्हारा प्ले माया...पैर कैसा है अब सबको दिख रहा  था कि तुम्हारे पैर से खून बह रहा है.. लेकिन तुम रूकी नहीं very good वैसे अब पैर का तनाव कुछ कम होगा.... चलों घर पर ड्रेसिंग कर देंगे.. hope fully तुम कल तक ठीक हो जाओगी... घर चलो मैं तुम्हें दवा दे दूंगी औऱ ड्रेसिंग कर देती हूं..

Next morning (switch to photo state shop)
माया पीहूं अतुल नरेंद्र विशाल  अनवर सपना शैलजा सब के सब आज फन मुड में थे.. आज फोटोस्टेट शॉप के अंदर रौनक जमी हुई थी... माया भी काफी दिनों के बाद तफरी करने यहां आयी थी...पीहूं से माया ने बोला सुन ना चल हम भी एक सिस्टम ले लेते है.. औऱ चैट करते है... उधर अतुल और नरॆंद्र भी अपनी अपनी कुर्सी कस कर बांध कर बैठ गए थे... इतना जरूरी काम कर  हो रहा थाafter all  माया सबको देख रही थी... पीहूं ने माया को बोला आजा बैठ जा मेरे साथ
माया- पीहूं तुम चैट करों मैं थोड़ी देर में बैठती हूं माया के मन में राहुल के आने की उम्मीद थी.. लेकिन ये बात उसने किसी से नहीं बोली... माया की नजर अतुल पर पड़ी वो थोड़ी देर में ही बाहर जाने लगा...
माया- अतुल क्या हुआ क्यों जा रहे हो...
अतुल – कुछ जरूरी काम याद आ गया है... आता हूं थोड़ी देर में
माया- ओके जाओ
माया  पीहूं के बगल में बैठ गयी और नेट सर्फ करने लगी.. तभी नरेंद्र पीहूं के पास आया औऱ बोला
नरेंद्र- सुन मैं थोड़ी देर में आता हूं तुम जाना मत
पीहूं – ठीक है
माया ने बीच में ही बोला नरेंद्र को जाओ ना तुम्हें किसने रोका है फ्री में भौकाल देने की आदत है... जाओं...माया की बात सुनकर पीहूं और नरेंद्र हंसने लगे.और नरेंद्र तेजी के साथ बाहर निकल गया...
माया ने विशाल को देखा अकेला तो पूछ लिया ये क्या हो रहा है.. कहां जा रहे है सब ...
विशाल ने बिना कुछ बोले ही ना में सर हिला दिया.. औऱ बड़े तहजीब के साथ माया से पूछा..आपका प्ले कैसा हुआ था..
माया- बहुत अच्छा था पूरी जिंदगी इस प्ले को नहीं भूलूंगी...
विशाल- काश हम लोग भी देख पाते
माया- हममम पर प्ले देखने के लिए तुम लोगो को हम लोगो का मामा चाचा ताऊ बनना पड़ता कह कर माया तेज से हसने लगी...विशाल माया की हंसी को देखे जा रहा था..तभी माया की नजर शॉप की गेट पर पड़ी नरेंद्र और अतुल एक दूसरे को गालियां दिए जा रहे थे और अनवर तेज तेज हंसे जा रहा था
नरेंद्र का बस चलता तो अतुल को मारने के लिए हाथ उठा देता...उसके चेहरे का रंग देखने लायक था.. माया पीहूं विशाल सब शॉप के बाहर आ गए..
माया- अरे क्या हो गया क्यों पागल हो रहे हो तुम लोग...अभी तो तुम दोनो अलग अलग बाहर गए थे अचानक क्या हो गया एक ही लड़की से मिलने तो नहीं चले गए थे...
माया की बात सुनकर अतुल अपना पेट पकड़ कर तेज तेज हंसने लगा.. औऱ बोला
अतुल- नरेंद्र बता भाई कैसी थी लड़की
नरेंद्र- चुप साले
अतुल – बता ना दे कैसी थी वो
नरेंद्र- अबे तू बता दे जिससे मिलने गया था वो कैसी थी...
विशाल ने दोनो के बीच में रोका औऱ बोला सालों बताओंगे भी अनवर ने बीच में ही बोला मैं बताता हूं
अनवर  नरेंद्र औऱ अतुल की तरफ हाथ दिखाकर बोलने लगा.. ये साले एक दूसरे के साथ ना जाने कितने दिनों से fake id से chat कर रहे थे... नरेंद्र को लगता था कि अतुल एक लड़की है... औऱ अतुल को भी नहीं पता था... कि ये नरेंद्र है बस इन दोनो ने एक दूसरे से मिलने का प्लान बनाया.. और चले गए पास वाले मॉल में.. वहां जब आमना सामना हुआ तो सोच क्या हुआ होगा.. कह कर अनवर तेज तेज हंसने लगा....अनवर की बाते सुनकर वहां सब ठहाके लगा कर हंसने लगे.....विशाल एक पल को रूका और फिर आराम से बोला.. ओ तेरी तो ये बात है... ये दोनो रात भर  एक दूसरे से चैट कर रहे थे.. अतुल और नरेंद्र की शक्लें ऐसी हो रखी थी.. जैसे कितनी बड़ी चॉप्सी हो गई है.. 
माया ने नरेंद्र के कंधे पर हाथ रखा औऱ बोला ऐसे छोटे छोटे शहरों में बड़ी बड़ी बाते होती रहती है... नरेंद्र.. अभी सब बात कर रही रहे थे कि राहुल वहां आ गया.. बस सबके चेहरे की हंसी गायब सब ऐसे हो गए कि जैसे कोई हेड मास्टर आ गया हो.. और माया के चेहरे पर कोई भाव नहीं था...वो ऐसे react कर रह थी कि जैसे कल कुछ हुआ नहीं था... राहुल के दिल में पता नहीं क्या था आज उसने बड़े ही इज्जत के साथ माया को हैलो बोला पूछा अंदर  चले मुझे नेट पर कुछ काम है.. माया  राहुल की बाते सुनकर एक दम shockedथी...  जो माया कुछ पल पहले खुद को ऐसे पेश कर रही थी.. उसे कोई फर्क नहीं पड़ता.. उसी माया के चेहरे का रंग देखने लायक था.. माया ने पीहूं को देखा और इशारों में अंदर आने को कहा...

माया राहुल के साथ शॉप में अंदर आ गई... राहुल ने अपने बगल में एक chair माया के लिए लगाई... औऱ उसको बैठने के लिए बोला.... माया का दिमाग काम करना बंद कर चुका था.. उसके उम्मीद के विपरीत आज राहुल दिख रहा था...
राहुल ने अपनी yahoo की mail id open की.. और माया को भगवान की पिक्चर दिखाने लगा.. माया राहुल की शक्ल देखने लगी .. मन ही मन बड़बड़ा रही थी .. ये पागल है क्या मैं क्या करूंगी इन pics को देखकर... राहुल बोले जा रहा था.. और माया आज चुप थी..
राहुल- माया मुझे भूख लगी है तुम्हारे पास कुछ खाने का है क्या..
माया राहुल की बात सुनकर हैरान थी...लेकिन राहुल ने कुछ बोला हो औऱ माया ना करें ये तो impossible था... माया ने तुरंत अपने बैग से एक टीफिन का डब्बा बाहर निकाला और राहुल को दे दिया... और बोला
माया- राहुल इसमें पोहा है.. तुम्हें पंसद हो तो खा लो.. मेरे पास यहीं है.. माया औऱ राहुल की बाते अगल बगल सब सुन रहे थे... पीहूं नरेंद्र से बाते रह रही थी लेकिन उसकी नजर भी माया के ऊपर थी..राहुल ने जैसे ही पहला spoon खाया उसको  मिर्ची लगने लगी. राहुल के चेहरे का रंग बदलने लगा.. माया ने तुरंत उसको पानी का बॉटल दिया राहुल एक सांस में पूरी बॉटल खत्म कर दिया.. राहुल बॉटल का ढक्कन बंद करते हुए बोला मैं इतना तीखा  नहीं खा सकता....

राहुल की बात खत्म ही हुयी थी कि विशाल ने पोहे का डब्बा ले लिया औऱ खुद खाने लगा.... माया विशाल को घूरने लगी  लेकिन उसने कुछ नहीं बोला... राहुल ने थोड़ी देर बाद माया से बोला ...
माया मेरे साथ दोसा खाने चलेगी प्लेन दोसा मुझे बहुत पंसद है..

माया राहुल की बात सुनकर उसको ध्यान से देखने लगी मन ही मन सोचने लगी आखिर आज बात क्या है.. आज राहुल इतना मेहरबान क्यों है उसके ऊपर ... माया ने भी बिना वक्त गंवाए राहुल को हां बोल दिया....फोटेस्टेट शॉप में मौजूद सब माया को देखे जा रहे थे... माया और राहुल शॉप से बाहर निकल गए.....

to be continued

4 comments:

Tripti said...

Maya madam ka har roz naya rang ...may ki maya hai

Tripti said...

Waiting for next

tulika singh said...

Sure tripti keep reading

Ocean said...

Nice....😉