रात के आठ बज रहे थे माया.. अपने घर की छत पर टहल रह थी....तभी माया की मां
राधा छत पर आ गई....
राधा- क्या बात है माया आज काफी परेशान लग रही हो..
माया- नहीं मां बस ऐसे ही.. कोई बात नहीं है...
राधा- अब अपनी मां से ही छुपाओगी
माया- नहीं मां बस कुछ करना चाहती हूं
कॉलेज के अलावा भी घर में हाथ बंटाना चाहती हूं सोच रही हूं कोई जॉब मिल जाए
तो बेटर होगा....
राधा- क्यों बेटा सब ठीक तो है घर में फिर क्यों ऐसा सोच रही हो..
माया- पता है मां सब ठीक है लेकिन मैं अपना खर्च खुद उठाना चाहती हूं...
राधा – ठीक है बेटा तुम्हें अगर ऐसा लगता है तो किसी कोचिंग में पढ़ाने की
बात करके देखो...या फिर ट्यूशन शुरु कर दो..
माया ने गहरी सांस ली....चलो मां तो मान गई अब पापा को जॉव लगने के बात
बताउंगी...
राधा- और बेटा कॉलेज में सब बढ़िया क्या हाल है तुम्हारे दोस्तों का.... उस दिन
लंच पर बुलाया था फिर कैंसिल कर दिया तुम लोगो ने बुलाओ किसी दिन सबको... घर पर
माया- हा मां बुलाती हूं अब जरा मेरा प्ले खत्म हो जाए.....
माया के दिल में आया राहुल की तबियत वाली बात वो मां को बता दे बहुत देर तक
सोचने के बाद माया ने राधा को बोला मां मेरा एक फ्रैंड है राहुल आपको बताया था ना
वो घर आने वाला था खाने पर
राधा – हा बेटा क्या हुआ बोलो
माया- मां राहुल को जॉन्डिंस हो गया है औऱ काफी serious हालत में पहुंच गया
है ... हॉस्पिटल में एडमिट है वो....उसके घर वाले मुरादाबाद रहते है यहां उसका कोई
नहीं है..... ध्यान रखने वाला... क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा है
राधा माया की शक्ल देखे जा रही थी... राहुल का दर्द माया के चेहरे पर झलक
रहा था....
कोई बात नहीं माया राहुल ठीक हो जाएगा... उसको हॉस्पिटल से छुट्टी कब
मिलेगी...
माया- नहीं पता मां..
राधा – ओह एक काम कर सकते है जिससे उसका जॉन्डिस जल्दी ठीक हो जाएगा....
माया ने तपाक से पूछा क्या मां
राधा- बेटा कुछ जड़ीबुटियां होती जिनको पीस कर पीने से जॉन्डिस एक दम से
ठीक हो जाता है....
माया- मां वो कहां मिलेगा I mean किस दुकान पर मिलेगा..
राधा – बेटा दुकान पर नहीं मिलेगा वो तुम्हें मंदिर के बगल में जो नर्सरी
है वहां से मिलेगा...
माया ने राहत की सांस ली चलो वो कुछ तो राहुल के लिए कर पाएगी...
माया औऱ राधा छत से नीचे आ गए औऱ डीनर खत्म कर सोने चले गए.... लेकिन माया
के तीनो भाई आज सोने के मूड में नहीं थे....
रजत रंजित और रौशन तीनो ने माया को घेर लिया दीदी आज पापा का मोबाइल हमें
देदो..
माया- क्यों दे दूं.. ये तो रोज मेरे पास ही होता है
रौशन- तभी तो आज मोबाइल हम लोग लेंगे हमें किसी से बात करनी है...
रौशन की उम्र महज 10 साल थी उसके मुंह से ये बाते सुनकर माया हंसने लगी ठीक
है रौशन ले लों आज मोबाइल लेकिन ध्यान रहे पापा के कानो में आवाज नहीं जानी चाहिए
मोबाइल की....
रजत ने बिना वक्त गवाए बोला ठीक है दीदी आप सो जाइए ऐसा कुछ नहीं होगा.....
अगली सुबह 8 बजे माया रोज की तरह तैयार हुई अपनी राम प्यारी उठाई और निकल
गई.. लेकिन आज माया ना तो इंग्लिश क्लासेज जा रही थी ना कॉलेज ....माया के दिमाग
में सिर्फ एक ही बात चल रही थी.... उसे जॉब करनी थी.... कॉलेज आते जाते उसने कई
बार रास्ते में एक कोचिंग देखा था लेकिन कभी गई नहीं थी वो आज ना जाने उसके दिल
में क्या था आज पहले वहां जाउंगी ट्राई करूंगी फिर कॉलेज जाउंगी...
माया कोचिंग के अंदर दाखिल हुए मार्निंग क्लासेज थी इसलिए कोचिंग में भीड़
काफी कम थी..... माया ने चारो तरफ नजरे दौड़ाई एक लंबा सा काला सा लड़का चश्मा
लगाए कोचिंग की ऑफिस में बैठा हुआ था उसके तेवर से ही लग रहा था कि वहीं कोचिंग का
मालिक है.....
माया- excuse me may I
coming
Ya coming एक भारी सी आवाज में उस शख्श ने answer
किया
Hi I am maya
Hello I am Amit
Maya- actually I m looking for a job as a teacher I
can teach class 9-12 math finance, economic is my subject there is any
vacancy for that….
माया ने इंग्लिश क्लास के बाहर पहली बार इंग्लिश
में बोला था जब अपनी लाइने खत्म की तो उसका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था.... मन ही मन
भगवान को धन्यवाद दे रही थी चलो कम से कम कुछ तो बोला मैने
अमित – माया जी अभी तो मैं कुछ नहीं बोल पाउंगा लेकिन फिर भी आप बता दिजिए आप सेलरी कितना चाहती है ....
माया- बस उतना ही जितने से मेरा खर्च निकल जाए ...
अमित अचरज से माया को देखने लगा
SORRY आपने क्या बोला
माया को अहसास हो गया था कि उसने कुछ गलत बोल दिया है ..
माया – I mean 2000 rs per month … क्लासेज आप जितनी चाहे उतनी दे दों
अमित ने माया को देखा और बोला ओके हम आपको शाम तक कॉल करेंगे....
माया ने मन ही मन भगवान को धन्यवाद दिया... और निकल गई अपनी अगली मंजिल की
तरफ....
अब माया के दिमाग में सिर्फ राहुल चल रहा था... वो अब तक नहीं जान पायी थी
कि आखिर क्या बात है जो राहुल ने अपनी ऐसी हालत कर ली उसे राहुल के ऊपर बहुत दया आ
रही थी....इसी उधेड़बुन में माया कॉलेज के पास पहुंच गई थी... तभी उसको फोटोस्टेट
की शॉप के बाहर नरेंद्र दिखा... माया ने साइकिल रोकी और नरेंद्र को हाथ देकर
बुलाने लगी... ना जाने माया को क्यों लग रहा था कि नरेंद्र को पता है राहुल के इस
हालत की वजह.....
नरेंद्र एक बात पूछू सच सच बताओगे...नरेंद्र ने बेपरवाही से हां में सर
हिलाया जैसे उसके लिए माया की बात कोई मायने नहीं रखती थी.... माया ने घूर कर
नरेंद्र को देखा और गुस्से में बोली.... मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूं और तुम लड़किया
ताड़ने में लगे हो.... नरेंद्र मुझे ये एक दम पसंद नहीं है.... माया की बाते सुनकर
नरेंद्र सिरियस हो गया.... अच्छा बोलो माया क्या पूछना चाहती हूं सॉरी यार मुझे
लगा तुम मजाक में कुछ बोलने वाली हो
माया हंसने लगी नहीं यार नरेंद्र अब मजाक करने का मन मेरा हर रोज नहीं
होता... खैर छोड़ो मेरी बात ये बात राहुल को क्या हुआ है... I
MEAN राहुल ने अपने
साथ इतना बुरा क्यों किया कि वो इस हालत में पहुंच गया.... उसे क्या दुख है...
उसकी जीएफ कहां है....क्या वो शहर से बाहर
है....माया के सवालों की लिस्ट सुनकर नरेंद्र सिर्फ उसको देखे जा रहा था...
नरेंद्र- माया तुम सिरियस हो कर भी इतनी ही जल्दी जल्दी बात करती हूं... और
वो भी इतना सारा सवाल...
यार राहुल को सिर्फ जॉन्डिस हुआ है... और कुछ नहीं उसने ज्यादा दारू पी ली
तो पहुंच गया हॉस्पिटल... नरेंद्र बिना माया
से नजरे मिलाए बोले जा रहा था...
माया- नरेंद्र ये सब मुझे पता है... मुझे तुम वो बताओं जो मैं नहीं जानती
हूं... OK…. PLZ TELL ME truth…. माया ने जोर
देकर नरेंद्र से कहा...
नरेंद्र- यार माया actually राहुल की जीएफ ने उसे
धोखा दे दिया.....
माया- क्यययययययायययया
माया का मुंह खुला का खुला रह गया क्यों नरेंद्र ऐसा उसने क्यों किया...
क्या नाम है उस लड़की का....राहुल को कैसे पता चला कि उसने उसे धोखा दिया...
माया सवाल पे सवाल पूछे जा रही थी लेकिन उसके मन राहुल के लिए काफी दर्द था
और शायद अपने लिए सूकून भी जो वो खुद से छिपा रही थी...
नरेंद्र- माया उसका नाम सोनल है वो राहुल के ऑफिस में ही फ्रंट ऑफिस पर काम
करती थी... राहुल को एक दिन पता चाला कि उसका अफेयर उसके बॉस के साथ भी चल रहा है... जबकी राहुल इस
बार अपने घर वालो को उसके बारे में बताने वाला था.... वो सोनल से शादी करना चाहता
था... लेकिन घर जाने से पहले ही उसको ये सब पता चल गया... वो इस बात को बर्दाश्त
नहीं कर पाया.....
माया- ओह कितनी घटिया लड़की थी सोनल उसे राहुल जैसे लड़के के साथ ऐसा नहीं
करना चाहिए था....
अच्छा नरेंद्र मुझे एक बात बताओं राहुल की EXPERTIES क्या है I MEAN मुझे आज तक सिर्फ यही पता है कि वो LANGUAGE की क्लास लेता है.... वो पढ़ता क्या है
नरेंद्र- माया यार राहुल मल्टी टास्किंग है वैसे तो वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर
बनना चाहता है उसकी का कोर्स कर रहा है...
लेकिन वो खुद की अर्निंग से पढ़ना चाहता है इसिलए जॉब भी करता है....
माया- फिर वो इलाहाबाद में क्यों है मुरादाबाद से तो दिल्ली नजदीक है ऑप्शन
ज्यादा है.....
नरेंद्र – क्योंकि उसके कजन भइया इस शहर में रहते है... यहां के एसएसपी
है... और वो अपने घऱ वालो से दूर रहना चाहता है जबकी दिल्ली में उसके काफी रिलेटिव
है....
माया- ओह अच्छा
नरेंद्र – तुम्हारे सवाल जवाब खत्म हो गए हो तो मैं जाउ
माया- हा यार जाओ राहुल का ध्यान रखना
कह कर माया कॉलेज की तरफ बढ़ गई... उसके चेहरे पर जहां कल तक उदासी थी...
निराशा थी वहीं आज एक सूकून था..... लेकिन माया को अपने अंदर एक गिल्ट भी था....
कि उसके प्यार के प्यार को कोई बीच रास्ते में छोड़ कर चली गई और मैं अपने लिए
उम्मीद जगा बैठी हूं....लेकिन माया का दिल दूसरो के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता
था.. फिर ये तो राहुल है....उसने अपने आप से तय कर लिया कि वो राहुल को रिकवर होने
में पूरी मदद करेगी वो भी बिना किसी उम्मीद के.... अपने ही ख्यालों से बाते करते
हुए माया कॉलेज के अंदर बढ़ तो रही थी लेकिन उसके जहन में सिर्फ राहुल ही चल रहा था......
next day morning Maya home
माया घर में रसोई की दीवार से टिक कर सिल बट्टे पर जोर जोर से जड़ी बूटिया
पीसे जा रही थी...और अपनी मां से इसके बारे में पूछे जा रही थी... मां ये क्या है
इसको क्या कहते है.... इतना हार्ड है ये ना क्या ये मिक्सी में नहीं पिस सकते....
राधा- बेटा ये गदपूर्णा का जड़ औऱ जमी आंवला है इसको सिलबट्टे पर ही पीस
सकते है तभी ये फायदा करेगा.... इसको एक हफ्ते लगातार पीने से कैसा भी जॉन्डीस हो
ठीक हो जाता है....
माया- हां मां कह तो आप ठीक रही है... लेकिन नर्सरी वाले इसको बेचते नहीं
है... उनके नर्सरी के पीछे की झाड़ियों में से खुद ही तोड़ कर लाना पड़ता है....बस
गनीमत यही है कि इतने के बाद भी पैसे नहीं लिए... माया पूरी ताकत के साथ सील बट्टे
चला रही थी....
राधा-बेटा अब बस कर इतना बहुत है इसको
कपड़े से छान ले... और ये ले डिब्बा इसमें टाइट करके बंद कर ले.... एक काम
कर ये मुझे दे और जा जल्दी स तैयार हो जा... इसे जितनी जल्दी हो उस लड़के को दे
देना और कहना रखे नहीं तुरंत पी ले.... नहीं तो ये बेकार हो जाएगा...
माया राजधानी की रफ्तार से तैयार हो रही थी उसका बस चलता तो उड़ कर पहुंच
जाती राहुल के पास.... अपनी राम प्यारी को उठाया औऱ निकल गयी वो राहुल के हॉस्टल
के पास.... लेकिन हॉस्टल के अंदर वो जा नहीं सकती थी इसलिए उसने राहुल को फोन
किया..
हैलो राहुल – माया बोल रही हॉं
हा माया बोलो राहुल ने थकी हुई आवाज में जवाब दिया...
माया – अच्छा सुनो किसी को भेज दो फोटोस्टेट वाली शॉप पर मैं तुम्हारे लिए दवा लायी
हूं....इसे पी लेना बिना वक्त गवांए ..और तुम्हारे पास ग्लूकोज है या खत्म...
राहुल- या अभी तो है थोड़ा सा अच्छा सुन मै ना नरेंद्र को भेज रहा हूं तू
उसके हाथ से भिजवा दे....
माया राहुल की बात फोन पर सुनती रही औऱ उम्मीद करती रही की राहुल उससे कुछ
तो पूछेगा... उसके बारे में कोई तो बात करेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ... माया
ने बाय बोला और शॉप से बाहर निकल आयी....
उसने पास के मेडिकल स्टोर से ग्लूकोज का पैकेट खरीदा और नरेंद्र का वेट करने लगी....
माया हास्टल के बाहर की सूनी सड़क को निहारती रही दूर से नरेंद्र आता दिखा
उसे साथ में विशाल भी था... दोनो ऐसे चल रहे थे जैसे मानो किसी ने जबरदस्ती नींद
से उठा कर भेजा हो... दोनो माया के करीब आते गए... और एक साथ बोले –मोटी उसका
ख्याल रखना बंद कर दे...यहां कुछ ना होने वाला वो तेरे लायक नहीं है...
माया गुस्से में लाल पीली हो गयी
और गुस्से से बोली हद है किसी की तबियत खराब है और तुम्हें बकवास बातों से
फुरसत ही नहीं है.....विशाल माया की बात को बीच में काट कर बोला अच्छा मैं बिमार
पड़ता तो तू मेरे लिए भी इतना ही करती..... माया को उम्मीद नहीं थी की कोई उससे ये
सवाल पूछेगा... माया ने अनमने मन से बोला हा करती मैं तेरे लिए भी करती पर तू
बिमार नहीं पड़ेगा... चल बातों को खत्म कर ये दवाई औऱ ग्लूकोज राहुल को दे देना...
बोलना जरूर पी जाए.... मैं कल फिर लाउंगी.... कॉलेज में प्ले की प्रैक्टिस चल रही
है इसिलिए मैं सुबह सुबह आउंगी...फोन करूंगी आ जाना ठीक है....माया ने पहले गुस्से
में देखा दोनो को फिर हंसने लगी...और हंसते हंसते बोली यार तुम लोग मेरे कितने
अच्छे दोस्त हो love u yar please ये राहुल को दे देना...
औऱ हा विशाल तुम भी बिमार पड़ते तो मैं सच में इतना ही करती....
Next day morning
maya home
आज माया को सुबह सुबह जल्दी उठना पड़ा क्योंकि नर्सरी जा कर वो जड़ी बूटिया
लानी थी... नहीं तो राहुल की दवाई नहीं बन पाती... माया नहा धोकर फटाफट तैयार हुई
और पहुंच गयी मंदिर दर्शन किया भगवान के हाथ जोड़कर सिर्फ इतना बोला हे भगवान राहुल मुझे मिले ना मिले बस ठीक हो
जाएं... मंदिर के पीछे नर्सरी में दाखिल होते ही...माया का पैर लड़खड़ाया और वो
झाड़ियों में जाकर गिर गयी.... माया के मुंह से तेज चीख निकली कोई कांटा था तो माया
के घुटने के ऊपर चुभ गया था....माया दर्द से कराहने लगी... नर्सरी में काम करने
वाली एक औरत ने उसका कांटा निकाला लेकिन माया का दर्द कम नहीं हो रहा था....कहते है
ना प्यार का दर्द सबसे ज्यादा तकलीफ देने वाला होता है...माया के साथ भी यहीं हो
रहा था... इतना दर्द था उसको फिर भी जड़ीबूटियों को लिए बिना वो वापस घर नहीं गयी...
माया प्यार में पागल थी...उसे अपने दर्द की कोई परवाह नहीं थी बस चिंता थी तो इतनी
की राहुल तक वक्त पर दवाई पहुंच जाएं....
माया की हरकतों को उसकी मां ध्यान से देख रही थी... और आज राधा ने माया को
रोक ही लिया क्या बात है माया कुछ ऐसा जो तुम मुझे बताना चाहती हो... बताओं बेटा
तुम आज कल इतना परेशान रहती हो....सब ठीक है बताओं मुझे.... मां के इतने सारे
सवालों की उम्मीद माया को बिल्कुल नहीं थी.... माया ने दो लाइन का जवाब दिया आज घर
आउंगी तो बताउंगी...
मां ने फिर पूछा अच्छा उस कोचिंग से कोई कॉल आयी.....माया एक दम ठिठक गयी
और सोचने लगी हां यार उसने कोई कॉल तो किया नहीं... अपना बैग पैक करते करते माया
ने राधा से कहां आज मां मैं शाम तक सब प्रॉबलम साल्व करके आऊंगी......
माया घर से निकली और सीधा कॉलेज पहुंच गई.... उसके दिल में सिर्फ एक बात चल
रही थी.... राहुल जल्दी से ठीक हो जाएं..... माया ने फोटोस्टेट शॉप से आज नरेंद्र
को फोन किया...
माया- हैलो
नरेंद्र- एक दम अलसायी सी आवाज में जैसे उसकी सुबह नहीं रात हो रही है....
माया- साले तुम अभी तक सो रहे हो
नरेंद्र- तो बता क्या करू
माया- पीहूं आयी है मेरे साथ तुझे बुला रही है माया ने नरेंद्र को झूठ बोला
नरेंद्र- अच्छा मुझे बुला रही है अरे मैं अभी आता हूं... नरेंद्र की आवाज
उस वक्त एक दम ऑफिस जाने वाले शख्स के जैसी हो गयी थी ना मानो कितनी देर हो गयी है
......
माया- साले पीहूं के नाम पर तू एक दम फ्रेश हो गया चल आजा जल्दी से.. बहुत जरूरी
काम है.....
माया फोन रखकर नरेंद्र का इंतजार करने लगी....तभी फोटोस्टेट शॉप में एक
दुबला पतला सा 5 फिट का आदमी दाखिल हुआ आते ही भाई ने एक सिस्टम ले लिया... ना
जाने कितना कुछ MISS हो रहा था.... माया ने उस आदमी को ध्यान से देखा...और
खड़ी हो गयी शीशे से टिककर वहां से उस आदमी के computer का reflection
साफ साफ दिख रहा था...वो शख्स बड़े ही जोश के
साथ social sites के chat room में enter कर रह था... जैसे वहां
उसके कितने लोग इंतजार कर रहे है....लड़कियां मरे जा रही है उसके इंतजार में माया
उसके जोश को देख कर मन ही मन हंसे जा रही थी.. तभी पीछे से नरेंद्र ने उसके कंधे
पर हाथ मारा... अबे मोटी कहां है पीहूं...
माया ने गुस्से से नरेंद्र को देखा...और फिर बोली तेरे साथ मैने तफरी की है
चल आजा बाहर चले माया फोटोस्टेट शॉप से बाहर आ गयी.. आज नरेंद्र किसी और के साथ के
आया था (गेहुंआ रंग 5-5 के लगभग हाइट जिंस और टी शर्ट पहना हुआ था चेहरे पर हल्की
सी मुस्कुराहट वो भी तहजीब के साथ जैसे रट के आया था कि लड़की के सामने कैसे पेश
आना है ) ....माया उसको नहीं जानती थी....नरेंद्र ने उससे परिचय कराया और बोला ये
मेरा दोस्त अतुल है माया ने अतुल को हैलो
बोला...अतुल ने बड़े ही सलीके के साथ माया से हैंडशेक किया और बोला आप मेरे बारे
में नहीं जानती लेकिन मैं आपके बारे में जानता हूं...माया ने बोला पक्का इस
नरेंद्र ने मेरी बुराई की होगी... पूरे हॉस्टल में मेरा नाम खराब कर रखा
होगा...नरेंद्र माया की बात सुनकर तेज से हंंसा..और बोला तू तो अपनी वजह से ही CELEB
बनी हुई है... माया ने
बोला क्यों मैने ऐसा क्या किया है... नरेंद्र और अतुल एक दूसरे को देखने लगे फिर
बोले कुछ नहीं कुछ नहीं....
माया – यार मैं तो बातों में रह गयी सुनो ना ये सामान राहुल तक पहुंचा
दोगे..
नरेंद्र- मुझे पता था तूने मुझे इसिलिए बुलाया है... माया तू अपना टाइम
वेस्ट कर रही है.. मत कर इसका कोई फायदा नहीं है... राहुल को तू नहीं समझ
पाएगी....
अतुल- due all respect
मैं भी यही कहूंगा कि आपका टाइम वेस्ट हो रहा
है...
माया ने दोनो की शक्लों को देखा.. और बोली.. यार कोई ना अभी वो बिमार है
ठीक हो जाए फिर मैं उससे कोई connection नहीं रखुंगी...
माया की बाते सुनकर नरेंद्र ने बोला तू ना समझेगी... ला दे मुझे.... कभी
हमारे लिए भी कुछ लाया कर... हम तेरे दोस्त नहीं है क्या... माया ने हक दिखाते हुए
बोला यार तुम लोग मेरे दोस्त हो तभी तो.. इतने हक से बुला लेती हूं... मैं पक्का
अगली बार तुम्हारे लिए भी लाउंगी...अभी अतुल कुछ बोलने ही वाला था कि पीछे से
विशाल टपक पड़ा अरे हम तेरे दोस्त है यार मेरे लिए भी ले आना
अतुल ने हाथ आगे बढ़ाया और बोला मुझसे दोस्ती करोगी...माया तेज से हंसने
लगी.... और हाथ मिला लिया...
माया- तुम सब मेरे दोस्त हो...मैं सबके लिए कुछ लाउंगी....माया काफी वक्त
के बाद इतना ंहंस रही थी... विशाल उसकी हंसी को देखे जा रहा था...लेकिन माया को
इसकी खबर ही नहीं थी....माया ने सबको bye बोला और कॉलेज की तरफ
बढ़ गयी.... मन ही मन सोचती रही आज राहुल से बात भी नहीं की... उसको देखे हुए भी
कितना दिन हो गया है.... कॉलेज के अंदर दाखिल होते ही माया को याद आया आज तो क्लास
नहीं जाना है आज तो फाइनल प्रैक्टिस है प्ले की... मन ही मन माया खुश हो गयी चलो
जान बची लाखों पाएं...लेकिन पीहूं का कोई अता पता नहीं था आज... माया कैंटीन में
पीहूं का इंतजार करती रही... और अपने आदत से मजबूर कुछ ना कुछ खाती रही.... बाकी
लड़कियो से गप्पे लड़ाती रही.... माया प्ले को लेकर बड़ी exited थी... तो बस हर बात में
रावण की ही बाते हो रही थी... फाइनली पीहूं आ गयी... आते ही अपसेट होकर बैठ गई...
माया ने उसका उदास चेहरा देखते ही सवाल शुरु कर दिया..... क्या हो गया तुझे किसने
क्या बोला पीहूं रोने लगी....अब माया का पारा गरम होने लगा था....उसने तेज से पूछा
तुझे किसने क्या बोला क्यों रो रही है...
पीहूं- कुछ नहीं यार बस ऐसे ही
माया- बताएगी भी कि ले लू तेरा टिफिन
पीहूं – आखों में आसूं भरे हुए लेकिन हंसते हुए बोली ले ले टिफिन तेरे लिए
ही तो लाती हूं....
माया – बता ना यार
पीहूं – यार वो ना मुझसे कल मिलने नहीं आया और मैने फोन किया तो मेरा फोन
भी काट दिया
पीहूं की बाते सुनकर माया ने अपना सर पकड़ लिया हद है तुम्हारी भी...अरे
इतनी सी बात के लिए रो रही हो पागल हो तुम... मैं हूं ना tension मत लो....
माया पीहूं को अपनी बातों में उलझाकर उसका ध्यान बटा रही थी..लेकिन मन ही
मन वो पीहूं के दर्द को समझ रही थी...
माया- पीहूं आज हमारा फाइनल रिहर्सल है इसलिए ये सब छोड़ और चल मेरे साथ
माया पीहूं को खीचते हुए ओपन थियेटर की तरफ चली गयी
पीहूं ने माया से पूछा आज तेरी बात हुई राहुल से
माया- नहीं
पीहूं – तू उसके लिए दवाई लायी थी
माया – हां और नरेंद्र के हाथो भिजवा दिया.. पता है आज जब मैं नर्सरी गयी
थी... मुझे कॉटें चुभ गए बड़ा दर्द हो रहा
था..
पीहूं – तूने इनजेक्शन लगवाएं
माया – पागल है क्या कॉंटे ही तो चुभे है
पीहूं – माया कांटा पूरा निकल गया था
माया – हां शायद मैने ध्यान ही नहीं दिया वो ऐसा जगह चुभा था कि अब देख भी
नहीं सकती.... माया पीहूं की बातो में मगन थी तभी आर्ट की एक मैम आ गई.. हा भई
रावन शुपनखा दो दिन बाद तुम लोगो का प्ले है... तुम लोग तैयार हो ना...
Yes mam माया ने खुशी जाहिर करते हुए बोला
आर्ट मैम- तो चलो फिर अपना अपना ड्रेस नाप लो पहन कर
माया एक दम से और खुश हो गयी.. पीहूं की तरफ इशारा किया और मैम के पीछ चल
दिये
रावण की costume देखकर माया की आंखो में एक अजीब सी चमक थी.. उसके सपने
साकार हो रहे थे.... उसका बचपन का अरमान पूरा होने वाला था... इस वक्त माया के
दिमाग में राहुल कहीं भी नहीं था पीहूं माया
के चेहरे को देखकर खुश हो रही थी.. मन ही मन में बुदबुदा रही थी.. चलो माया
का ध्यान राहुल से हटा तो सही
प्ले की प्रैक्टिस से फ्री होकर
माया पीहूं कॉलेज से बाहर निकल आए... माया ने पीहूं से बोला आज मुझे उस कोचिंग में
जाना है आखिर पता तो करूं क्या सोचा है उन लोगो ने... पीहूं ने बोला तुझे पैसो की
जरूरत है तो मुझसे ले ले
माया- नहीं यार जरूरत होगी तो मांग लूंगी फिलहाल मैं अपने पैरो पर खड़ा
होना चाहती हूं मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से मेरे मां बाप का पैसा बर्बाद हो...
मेरे पास जो भी सेविंग थी मैने राहुल के ग्लूकोज और बाकी चीजों पर खर्च कर दी...
अब मैं अपने पापा के पैसो को बर्बाद तो नहीं करूंगी... वैसे ही तुझे पता है मेरे
घर की माली हालत इतनी भी अच्छी नहीं है...फिर मैने प्यार किया है तो इसका खामियाजा मेरे घर वाले क्यों भुगते.....माया
की आंखों में गर्व था..उसे इस बात का कोई गम नहीं था कि राहुल ने उसको प्रपोज किया
है कि नहीं.. करेगा की नहीं कोई डर नहीं था...माया की आंखों में उस विश्वास को देख
कर पीहूं को लगा शायद माया अब राहुल के लिए नहीं रोएगी... माया पहले जैसे ही है एक
दम झल्ली...
माया ने पीहूं को बाय बोला और निकल गयी कोचिंग सेंटर के लिए...
माया जैसे ही अंदर दाखिल हुई अमित से टकरा गई...
अमित – हैलो miss माया..
माया- hi
अमित – आप फिर आयी नहीं
माया- आपने कॉल ही नहीं किया
अमित – मैम आप अपना नंबर देना ही भूल गयी थी
माया- ओह sorry yar मैं तो भूल ही गयी थी...अच्छा अब तो आ गई
हूं अब बता दो आपने क्या सोचा है..
अमित- आप कब से आएंगी
अमित की बात सुनकर माया खुश हो गई थी...
माया- आप जब से बोलिए
अमित – तो कल से ही आ जाइए सेलरी उतनी जितनी आपने मांगी थी
माया – मतलब 2000
अमित – जी हां
माया खुश होकर बोली thank you Amit मैं कल से पक्का आ जाउंगी...
माया के चेहरे पर एक इत्मिनान था और वो सीधे मंदिर गयी...
भगवान को उसने धन्यवाद दिया... प्रसाद चढ़ाया और निकल गयी घर के लिए अब
सबसे बड़ा सवाल था कि पापा को कौन बताएं क्योंकि कोचिंग से पढ़ाकर माया को घर
पहुंचने में रोज रात के 9 बजने वाले थे... और क्या पापा ALLOW करेंगे कि माया कोचिंग
में पढ़ाएं...इसी उधेड़बुन में माया अपने
घर के तरफ बढ़े जा रही थी.....
to be continued
3 comments:
Great "MAYA" ��
Tx keep reading
👍...
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