माया अपने घर के अंदर दाखिल होती है तेज से कूदते हुए अपनी मां के पास रसोई
में पहुंच जाती है...चीख कर बोलती है मुझे जॉब मिल गयी.... अपने भाइयों के साथ
प्रसाद शेयर करती है ......और खुशी से नाचने लगती है.....
राधा ने माया को पकड़ा और बोला कि अच्छा अब रूको और ये बताओ कि पढ़ाना क्या
है टाइम क्या है और पैसे कितना देगा...
माया- मां मुझे 2000 रुपए महीने मिलेंगे math और finance
पढ़ाना है.....टाइमिंग
5.30-8.30 बजे शाम को....
राधा – ठीक है बस आज पापा को बता देना इसके बारे में देखो फिर वो क्या कहते
है
माया- मां मेरे पैर में जो कांटा चुभा था वो बहुत दुख रहा है... सुबह से
फुरसत ही नहीं मिली जरा देखू ऐस लग रहा जैसे वहां एक बड़ा सा फोड़ा होने वाला
है...माया को अपने इस दर्द का एहसास अब जाकर हुआ था..
राधा अच्छा अपना पैर दिखाओं जाओ पहले कपड़े बदलो फिर देखते है और चूड़ीदार
पैजामी मत पहनना कल से... तुम्हें तकलीफ होगी राधा ने माया का पैर देखा तो थोड़ा तनाव
में आ गई... ध्यान से देखा तो कांटे का एक छोटा सा हिस्सा अब भी वहीं चुभा हुआ
था.. और आस पास का पूरा हिस्सा लाल हो रखा था....
राधा – तुम कहां बेहोश रहती हो इतना तनाव है फोड़े में और तुम अब बता रही
हो...सीधे घर आना था... आज ऐसा हुआ था तो... अब कल ज्यादा होगा दर्द तो कॉलेज मत
जाना... राधा गुस्से में माया को डांटे जा रही थी ...
माया- मुझे कोई दर्द नहीं है अब मैं ठीक हूं आप बस कोई दवा हो तो दे दीजिए
नहीं तो कोई बात नहीं माया ने बड़े ही बेफिकरी के साथ राधा से बोला राधा ने माया
के फोड़े पर दवा लगाई और बोला कल अगर ना ठीक लगे तो मत जाना नहीं तो ज्यादा परेशान
हो जाओगी
माया- आपको पता है ना एक दिन बाद मेरा प्ले है मैं कॉलेज मिस नहीं कर सकती
ठीक हो जाएगा... आप टेंशन मत लिजिए...
रात के 10 बज चुके थे लेकिन माया के पापा राकेश खन्ना अभी तक नहीं आए थे अमूमन वो रात 9.30 बजे तक आ
जाते थे....माया थके हुए कदमों से बालकनी में टहल रही थी..दिमाग में बस एक ही बात
थी पापा हां बोलेंगे या नहीं
माया ने दूर से ही पापा के स्कूटर की आवाज को पहचान लिया और पैर को
लंगड़ाते लंगड़ाते हुए कमरे में दाखिल हुई
मां... मां..... मां.... पापा गए है...
राधा- कोई बात नहीं तुम आराम से रहो उनको चाय पानी पी लेने दो फिर तुम बात
करना...
माया ने ठीक है कहते हुए किचन में चली गई..
राकेश खन्ना- हा भाई क्या हाल खबर आज के कहां है सब लोग...चारों बच्चे इघर
आओं रौशन तो बस इतना सुनना था कि पापा की गोद में कूद कर बैठ जाता था...पापा की
ऐसी आवाज सुनकर माया को तसल्ली चलो आज पापा का मूड तो ठीक है...माया चाय का कप
लेकर राकेश के सामने आती है...
राकेश- और बेटा कैसा रहा आज का दिन पढ़ाई कैसी चल रही है...
माया- all well पापा
राकेश – गुड ऐसे ही पढ़ते रहो तुम्हें बहुत आगे जाना है.... इसलिए पढ़ाई से
कोई समझौता नहीं.. मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि मैं तुमको लड़कियों वाले सुख दे
सकू लेकिन इतना जरूर है कि तुम्हारी पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने दूंगा.. तुम मेरा
गर्व हो...
माया पापा की बात सुनती रही फिर पूरी हिम्मत जमा कर अपने पापा से बोलती
है....
माया- पापा मुझे एक जॉब मिली है.. कोचिंग में पढ़ाने की 2000 रुपए महीना
मिलेगा... शाम को 5.30-8.30तक की टाइमिंग है... क्या मैं इसको join
कर सकती हूं..मैं अपने
पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं अपना खर्च खुद उठाना चाहती हूं....
राकेश खन्ना ने माया की पूरी बात को ध्यान से सुना फिर बोले
राकेश – तुम कर सकती हो लेकिन एक शर्त है..
माया – क्या
राकेश – तुमको रात 9 बजे तक घर आना होगा इससे ज्यादा लेट नहीं होना चाहिए
इसका पढ़ाई पर कोई असर नहीं पढ़ना चाहिए.. अगर तुम्हें मंजूर है तो बताओ... मुझे
तुम्हारे ऊपर पूरा भरोसा है...लेकिन समय जमाना खराब है फिर छोटे शहरों ये सब आम
बात नहीं है लेकिन मैं फिर भी तुम्हें जाने दूंगा..
माया- खुशी से चहकते हुए बोली कुछ भी हो जाए पापा आपका सर कभी नीचे नहीं
होने दूंगी.. मैं खुश हूं की आप मुझ पर भरोसा करते है... आपका भरोसा ही मेरी ताकत
है मैं इसको कभी नहीं तोड़ूंगी माया की बातों और उसकी आंखों में उसका आत्म सम्मान झलक
रहा था वो गर्व के साथ राकेश के सामने खड़ी थी
राकेश – फिर ठीक है बेटा कल से तुम अपना नया सफर शुरु करों मेरा आशिर्वाद
तुम्हारे साथ है...
माया की आंखों में आसूं भर गए थे... उसके लिए पापा की ये बातें किसी जंग को
जितने के बराबर था...माया ने खाली कप उठाया और किचन की तरफ चली गयी...किचन का काम
निपटाया और सीधे अपने कमरे में... माया
अपनी जॉब की बात पीहूं को राहुल को बताना चाहती थी... लेकिन राहुल का ख्याल
आते ही माया उदास हो गयी...और सोचने लगी आखिर वो दिन कब आएगा.. जब राहुल माया को
प्रपोज करेगा... या मना कर देगा अभी तक तो ना हां बोला है और ना नहीं बोला है...अपने दिमाग के फितूर को हटाते
हुए माया ने तय किया कि focus माया focus
…focus on your new job class and all make your self more and more strong then
might be राहुल तुम्हें मिल जाएं...बस इसी उधेड़बुन में माया नींद के आगोश में चली
गयी...
Next morning time 6am
माया के पैर में जोरो का
दर्द था लेकिन फिर भी माया आज बहुत खुश थी....वो शीशे में खुद को निहार निहार कर
तैयार हो रह थी... औऱ पीछे गाना बज रहा था... सजना है मुझे सजना के लिए ....
गाना सुनते सुनते माया को ख्याल आया अरे यार मैने रत्ना का वॉकमैन अभी तक
नहीं वापस किया उसने मांगा भी नहीं आज वापस दे आउंगी... बहुत हुआ प्यार औऱ दर्द भरी
बाते now move on maya .. माया खुद के साथ
बड़बड़ करती हुई बैग उठाया भगवान को हाथ
जोड़ा और निकल गई.... कई दिन हो गए थे.. अपनी language की क्लास में गए
हुए...आज माया ने तय कर रखा था सबसे पहले अपना काम फिर बाकी सब बकवास फिर वो राहुल
ही क्यों ना हों...और मन में सोचते सोचते वो अपनी language क्लास में पहुंच
गई...
वहां पर उस एक लड़के ने माया का जीना दूभर कर रखा था... जहां माया बैठती उसी
के सामने बैठ जाता और बस सर को उंगली करना शुरू साला impression जमाने के चक्कर में इतना
बोलता था कि group discussion के वक्त तो आवाज एक दम तेज बस हाथ पैर ना उठते
थे बाकी वो कोई कसर नहीं छोड़ता था.. माया उसको देखकर गुस्से में लाल हो जाती थी..
लेकिन आज माया ने तय कर रखा था no maya no maya focus only on your
self … इससे तो मैं बाद में निपटूंगी फिलहाल क्लास खत्म किया और कॉलेज की तरफ बढ़
गयी.. आज तो मैं राहुल के लिए कुछ नहीं ले जा रही.. जैसे ही ये ख्याल माया को
आया..माया उदास हो गयी फिर अपने आप से बाते करते हुए बोली ठीक है ना आज मेरी हालत
ठीक नहीं है उसे तो क्या फर्क पड़ेगा मैं ले जाऊं या ना ले जाऊं... कोई बात नहीं
अपने आप से बाते करते करते माया कॉलेज पहुंच गयी...आज फिर से प्ले की
प्रैक्टिस करनी थी लाइटिंग और music के साथ तो बस सब के सब
उसी में लगे थे.. माया का दर्द बढता जा रहा था...पीहूं जैसे ही उससे मिली सबसे
पहले उसने जॉब की बात बताई और बोला पहली सेलरी से तुम्हारे लिए पार्टी..
पीहूं एक दम खुश हो गई अच्छा है माया फाइनली तू अपने पैरों पर खड़ी हो रही
है...माया ने पीहूं को बीच में रोका और बोला एक और अच्छी बात है
पीहूं – क्या
माया- अब मैं रोज तुम्हारे घर तक जाउंगी वहां से कोचिंग चली जाउंगी... हम
ज्यादा देर तक बाते करेंगे... पीहूं हसने लगी और बोली वाह ये तो सोने पे
सुहागा....
माया- पीहूं प्रैक्टिस करके चलते है आज फोटोस्टेस वाले के यहां तफरी की
जाएगी....
पीहूं- क्यों आज तू राहुल को फोन नहीं करेगी
माया- नहीं
पीहूं – आज तू उसके लिए कुछ नहीं लायी
माया- नहीं मेरे पैर की हालत देख माया ने अपना कुर्ता हटाते हुए दिखाया
माया के पैर में सूजन थी... पीहूं ने जैसे देखा उसके मुंह से आह निकल गयी
पीहूं- तू आज कॉलेज क्यों आयी तेरी हालत देखी है तूने
माया- अब तुम मां की तरह ज्ञान मत दो
पीहूं- तू आराम से बैठ एक जगह.. ज्यादा चल मत कल हमारा प्ले है.. औऱ अब तुम
थोड़ा ध्यान से चलो पीहूं ने हक से माया को डांट कर बोला...
माया – हां माता अब चले प्रैक्टिस करने
3 घंटे की प्रैक्टिस में माया के पैर का बुरा हाल हो चुका था...लेकिन माया
ने अनुराधा मैम या डायरेक्टर दादा को कुछ नहीं बोला उसको इंतजार था तो कल
का......घड़ी की तरफ माया ने देखा तो 4 बज चुके थे... माया ने पीहूं को बोला मुझे अब
जाना होगा....
आज से कोचिंग भी है मेरी...चलोगी तुम भी ना घर यहां का तो काम खत्म..
पीहूं – हां ना चलते है...पर पहले कुछ खा ले बड़ी भूख लगी है....
माया- इस वक्त क्या मिलेगा.. हां वो
नरेंद्र
के हॉस्टल वाली गली में चले वहां अभी हलवाई गुलावजामुन बना रहा होगा....
पीहूं- हां यार चलते है वहीं लेकिन सबसे छिप कर मेरे पास इतने पैसे नहीं है
कि मैं पूरी फौज को खिलाऊ..अभी माया और पीहूं बात कर ही रहे थए कि पीछे सपना इशिता
प्रीति सब आ गए....हाय माया हाय पीहूं तुम लोग इसी कॉलेज में रोज आते हो लेकिन ऐसा
लग रहा कितने दिन हो गए मिले हुए अब कल ये प्ले खत्म होगा तो तुम दोनो क्लास में
दिखोगी... प्रीति ने बड़े ही शिकायत भरे अंदाज में कहा …
माया ने पीहूं को देखा.. और आंखों ही आखों में बोला लो जी खाने का जुगाड़
हो गया.. माया के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान देखकर.. पीहूं हंस पड़ी..
माया ने प्रीति से बोला चल आज सब मिल कर समोसा खाते है....कितने दिन बाद
मिले है हम सब.....तुम लोग यही रूको मैं और पीहूं समोसे लेकर आते है... लेकिन एक
प्रॉबलम है मेरे पास सिर्फ 10 रूपए बचे है...तो खुल्ले दो थोड़े से.. प्रीति माया
की बात सुनते ही पर्स में हाथ डाल दिया और पैसे निकालते हुए बोली रूक ना माया ये
ले रूपए... सबके लिए ले आ...
माया ने प्रीति से बिना किसी झिझक के पैसे लिए और पीहूं को लेकर निकल
गयी.....हलुवाई की दुकान पर पहुचते ही...माया औऱ पीहूं की नजर सीधे गुलाब जामुन पर
पड़ी.... एक दम गरम गरम गुलाब जामुन देख दोनो के आंखों में गजब की चमक आ गयी थी...
बिना वक्त गंवाए माया ने दुकानदार से बोला भइया..एक एक प्लेट गुलाब जामुन दे दो..
औऱ 10 गरम गरम समोसे पैक कर दो... हाथ में
गुलाब जामुन की प्लेट आते ही माया औऱ पीहूं टूट पड़े.. खाने... के लिए.. अभी एक ही गुलाब
जामुन खत्म हुआ था कि... पीहूं की नजर दुकान के अंदर राहुल और अतुल को बैठे देख
लिया...माया के चेहरे का रंग एक दम से बदल गया खुद को सम्हालते हुए माया ने दोनो
को हैलो बोला... अतुल औऱ राहुल जलेबी खा रहे थे....दोने अपनी प्लेट उठाई औऱ बाहर आ
गए.. माया ने अतुल से हाथ मिलाया लेकिन राहुल के तरफ हाथ तो दूर माया ने नजरें भी
नहीं मिलायी....पीहूं ने माया को कंधे से मारा...
पीहूं – और राहुल कैसी तबियत है...
राहुल- बस यार ठीक हूं
पीहूं – वैसे तुम्हें बाहर का कुछ भी नहीं खाना चाहिए
राहुल – जलेबी मेरी फेवरेट है.... सो बस आज आ गया थोड़ा चेंज मिल जाएगा..
माया इंतजार करती रही की राहुल उससे कुछ बात करेगा..वो दो कदम पीछे हो
गयी... अतुल माया के हाव भाव को देखे जा रहा था...जैसे अब भी कह रहा हो माया टाइम
बर्बाद मत कर... राहुल ने जलेबी अपनी खत्म की औऱ माया की तरफ मुड़ा..
राहुल – और माया कैसी है तू यार तेरी दवाई बड़ी कड़वी थी... मैने पी थी
तेरी कसम बस पूरी नहीं पी थी...
राहुल के मुहं से इतनी सी ही बात सुनकर माया का दिल अंदर से खुश हो गया
माया- चलों मुझे तो इतनी भी उम्मीद नहीं थी तुमने थोड़ा ही सही पीया तो
ना... अब परेशान मत हो मैं कल से नहीं लाउंगी.. हां तुम्हें कुछ घर के खाने का मन
होगा तो बता देना मैं पका कर ले आउंगी...
राहुल- यार मुझे तो गाजर का हलवा जलेबी....बड़ा पंसद है और ये मिठाई वाले
भइया बना देते है मेरे लिए....
माया राहुल की बात सुनकर मुस्कुरा कर बाय बोला और समोसे लेकर पीहूं के साथ
निकल गयी...
माया- पीहूं जल्दी कर मुझे कोचिंग जाना है...
पीहूं- तू अब खुश तो है ना....
माया – हा पीहूं लेकिन मेरे पैर
में बहुत दर्द है..बस आज पहला दिन है कोचिंग का तो किसी भी तरह जाउंगी...
बाते करते करते माया पीहूं कॉलेज में पहुंचे.. प्रीति गुस्से से देख रही थी
तुम लोग समोसा बनाने लगे थे क्या...
माया- नहीं हलुवाई बना रहा था... हम खड़े होकर देख रहे थे... चल ये ले समोसे मै अपना ले लेती हूं...
मुझे निकलना है... तुम लोग enjoy करों...
Bye all bye pihu माया बोलकर जाने लगी... पीहूं ने माया का
हाथ पकड़ा औऱ बोला अब तू खुश है ना ऐसे ही खुश रहना.. चल तू अब जा कल मिलते है..
माया पीहूं की बात सुनकर कोचिंग के लिए निकल गयी.....
रास्ते भर माया के जहन में राहुल ही चल रहा था...उसे एक उम्मीद की किरण अब
भी दिख रही थी... माया खुद से बात करते हुए बोलने लगी.. अभी राहुल बिमार है ठीक हो जाने दे... उसके अंदर तेरे लिए कुछ होता नहीं तो तेरी दवाई क्यों पीता...क्या
करू राहुल को एक फोन कर लूं क्या...पूछ लेती हूं उसकों क्या खाना है...कल बना कर
ले आउंगी... माया के दिल में कोई बात अटक जाएं तो फिर जब तक वो बोल नहीं लेती थी
.. या उस काम को कर नहीं लेती थी बेचैन रहती थी....माया कोचिंग के बाहर एक पीसीओं
की दुकान पर रूक गई उसने राहुल को फोन किया
माया- हाय राहुल
राहुल – हा बोलो माया
माया- तुम्हारें लिए कल क्या लाऊ
राहुल बड़े ही बेरूखी से बोला यार तुम कुछ मत ले आना मैं खा लूंगा.. परेशान
होने की जरूरत नहीं है
माया- क्या हा राहुल नाराज हो क्या
राहुल – नहीं यार मैं अभी कहीं बैठा हूं ओके चल रखता हूं बाय
राहुल ने फोन काट दिया... और माया के चेहरे की हंसी आखों की चमक सब गायब हो
गयी.. माया की आंखों से आसूं बहने को बेताब थे..उसे एक दम उम्मीद नहीं थी
कि...राहुल उससे ऐसे बात करेगा...माया ने खुद को सम्हाला और कोचिंग के अंदर दाखिल हो गयी.....
TO BE CONTINUED
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