मेरे
होंठो की मुस्कान को इतना भी मत कुरेदो........
मेरा
दर्द बाहर छलक जाएगा......
मेरे
अंदर छिपे साग़र पर इतना भी पत्थर मत मारो...........
लहरें
सारी दास्ताँ को बयाँ कर देंगी.............
पहेली
नहीं कोई मैं जो सुलझ ना सकूँ....
इस
झूठी दुनिया
में
ख़ुद को संभाल सकूँ.....
बस
इतनी सी कवायद है मेरी.....
जानती
हूँ मैं ख़ुदा ने नहीं दिया औरों जैसा नूर मुझे.......
फिर
भी शबनम के काफ़िले
में
आ ही जाती हूँ मैं......
दर्द
मेरा नासूर हो जाता है..
आँसू
मेरे नैनों का साथ छोड़ने को बेसब्र होने लगते हैं.......
लेकिन
कब तक हँसी से मैं अपना दर्द छिपाऊँ.....
मुझे
इतना भी मजबूर मत करो...........
मेरे
हौसले यूँ ही बिखर जाएंगे.....
इसलिए
कहती हूँ मैं........
मेरे
होठों की हँसी को मत कुरेदो........
मेरे
दर्द के तूफ़ान को तुम सह ना पाओगे.........
4 comments:
Bheegi si palako se jaise kuch lafz huei bayaa,
Jaise teri rooh ne mere dard ko padh liya....
Tx reader i m touched keep reading and follow the blog
Kuch adhura sa laga
True khayal adhure hi aaye tho adhura hi likh diya
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