Same day in the night
अरनव आराम से बाहर सड़क पर टहल रहा था... और किसी से फोन पर बात किए जा रहा था तभी पीछे से केतन आता है और उसके कंधे पर हाथ रखता है ..केतन को देख अरनव फोन रख देता है...
केतन – क्या भाई सब ठीक
अरनव – हां यार सब ठीक है... कल मुझे जाना है
केतन- कहां
अरनव – आर्मी कैंप बसंत विहार
केतन- क्यों भला
अरनव – वहां कल ब्लड डोनेशन का कैंप लगा है
केतन – ओह तो क्या तू अपना खून देगा
अरनव- हंसते हुए हां सोचा तो है
केतन – खून से ज्यादा तेरे अंदर दारू होगी
अरनव – हां तो जो दारू पीता होगा उससे मेरा खून मैच कर जाएगा
केतन – हंसते हुए सही है तेरा
अरनव – वैसे भी मैने पिछले 5दिनो से नहीं पी है...
केतन – हां देखा मैने
अरनव – वैसे एक बात बता
केतन- क्या
अरनव – ये शनाया रहने वाली कहां की है
केतन- भोपाल की
अरनव- पूरा नाम क्या है
केतन – नहीं पता भाई वैसे तू इतना क्यों पूछ रहा है उसके बारे में
अरनव –अरे नहीं बस यूं ही थोड़ी अलग सी लगी
केतन- हां ये तो है बोलती जो भी हो पर दिल की साफ है
अरनव – बोलती तो कुछ ज्यादा ही है....खैर चल मैं चला सोने कल जल्दी जाना है बाय गुडनाइट
Next morning
सुबह के 8 बजे आर्मी कैंप के बाहर भीड़ लगी हुयी थी.... ब्लड डोनेट करने के लिए, अरनव भी पूरी तरह से तैयार होकर पहुंच गया था वो जैसे ही रजिस्ट्रेशन कराने अंदर पहुंचा एक लड़की तेजी से खुद को छिपाने के लिए उसकी तरफ पीठ कर दिया...अरनव फार्म फिल करते करते एक दो बार उस लड़की को देखा लेकिन फिर अनदेखा कर दिया उसको लगा इसको मैने कहीं देखा है ये कद काठी खड़े होने का स्टाइल....लेकिन shots and t shirt में नहीं देखा है ... कौन हे ये ? अरनव एक बार कोशिश करता है और फिर अपने काम में लग जाता ह... इधर ये लड़की अपनी आंखों पर काला चश्मा लगाती है और तेजी से बाहर निकल आती है...
अरनव फार्म फिल करने के बाद उस कमरे के बाहर आ जाता है जहां उसे ब्लड डोनेट करना था.... कमरे के अंदर से नर्स की आवाज आ रही थी ...
नर्स – मैम मानना पड़ेगा आपको
लड़की- क्या हुआ
नर्स- आपके रिकॉर्ड के हिसाब से आप 10 वी बार व्लड डोनेट कर रही है
लड़की- जी जो चीज मेरे पास ज्यादा है उसका इस्तेमाल सब करें, कह कर वो हंसने लगी
उसकी हंसी अरनव को जानी पहचानी लगी अरे ये आवाज तो मैने कल ही सुनी थी और ये जानने के लिए अरनव कमरे में दाखिल हो गया ... अंदर जाते ही वो हैरान हो गया मन ही मन बोला अरे ये तो शनाया है
इधर शनाया अरनव को देखकर एक दम सकते में थी
अरनव ने बड़े ही फार्मल तरीके से शनाया को हैलो बोला
और शनाया ने भी बड़े अनमने मन से उसका जवाब दिया जैसे वो जो नहीं चाहती थी वहीं हो गया
अरनव- हाय कैसी है आप
शनाया – मैं ठीक हूं आप यहां कैसे
अरनव – बस जो आप करने आयी है
शनाया- हंसते हुए सही है ...
अरनव इतनी सी बाते करके दूसरे बेड पर बैठ गया नर्स बाकी प्रासेस में लग गयी
शनाया को उसने जितना बोलते हुए देखा था आज शनाया उतनी ही खामोश थी....अरनव को ये बात हजम नहीं हो रही थी ...वो बार बार शनाया को देखे जा रहा था....शनाया का आज का लुक और कल के लुक में कोई मैचिंग नहीं थी... कल तो कहां सलवार कुर्ते में झल्ली सी नजर आ रही थी और आज शाट्स और टी शर्ट में ऐसी लग रही थी जैसे कभी सलवार कुर्ता तो देखा ही नहीं होगा...लेकिन ये समझ ही नहीं आया कि ये फार्म भरते वक्त मुझसे छिप क्यों रही थी
अरनव जितना शनाया के बारे में सोचे जा रहा था उतना ही उलझता जा रहा था
और शनाया अपनी आखें बंद करके बस एक ही बात सोचे जा रही थी कि अब उसका राज सबको पता चल जाएगा....
शनाया का ब्लड जैसे ही निकला वो तेजी से बेड से उतरने लगी तभी नर्स ने उसको रोका
नर्स- रूकिए इतनी जल्दी मत जाइए ये लिजिए पहले ग्लूकोज़ पीजिए फिर जाइयेगा
शनाया ग्लूकोज़ लेकर उतरने लगी तभी अरनव से नहीं रहा गया और बोल पड़ा
अरनव – अरे आराम से इतना ब्लड निकला है थोड़ा तो सब्र कर लो...
शनाया को उम्मीद नहीं थी कि अरनव उसको ऐसे रोक देगा
शनाया- अरे मुझे वक्त पर कॉलेज जाना है
अरनव –तो ठीक है मुझे भी जाना है5 मिनट रुक जाओ साथ चलते है
शनाया-आप को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है
अरनव – इसमें परेशानी क्या अपने पैरो से चल कर जाना है
शनाया हंसने लगती है
और अरनव के अंदर अब भी वहीं सवाल शनाया मुझसे क्यों छिप रही थी ...
लगभग 10 मिनट के बाद अरनव और शनाया दोनो कैंप से बाहर आ गए...
अरनव – यहां से कैसे चलोगी मतलब आटो से या फिर रिक्शे से
शनाया – हंसते हुए जो मिल जाए.. वैसे भी यहां से मेन रोड पर जब पहुंचेंगे तभी कुछ मिलेगा
शनाया बोले जा रही थी और सामने देखे जा रही थी...और अरनव उसके साथ तो चल रहा था लेकिन थोड़ा सा दो कदम पीछे वो शनाया को कभी देखता तो कभी उसकी बाते सुनता
अरनव – अच्छा एक बात पूछू आपसे
शनाया – हां पूछिएं सर
अरनव – सर?
शनाया – आपको पूरा कालेज सर ही तो बोलता है
अरनव – आप मुझे पहले से जानती है
शनाया – नहीं लेकिन लोगो से पता चला कि आप अरनव सर है कह कर शनाया हंसने लगी औऱ कहती है अच्छा सुनिए
अरनव – क्या
शनाया-आप किसी को नहीं बताएंगे कि मैं यहां पर आयी थी
अरनव –क्यों क्या हुआ
शनाया – बस ऐसे ही I hope इतना तो आप मैनेज कर ही सकते है
अरनव- ओके जैसी आपकी मर्जी खैर वो रिक्शा दिख रहा रोक लूं
शनाया- हां ना जल्दी से रोको
अरनव रिक्शे वाले को आवाज लगाता है
और दोनो रिक्शे पर बैठ जाते है लेकिन रिक्शे पर बैठते ही शनाया का हाथ अरनव के हाथ से टच हो जाता है
और शनाया कल की ही तरह पसीने से तर हो जाती है उधर अरनव भी थोड़ा सा अनइजी हो जाता है...और बस पूरे रास्ते दोनो एकदूसरे से कोई बात नहीं करते है...लेकिन जैसे ही कॉलेज आने वाला होता है शनाया अरनव से कहती है
शनाया- मुझे यहीं उतार दो
अरनव – क्यों
शनाया – मैं नहीं चाहती कोई मुझे इन कपड़ो में देखे
अरनव शनाया की बात सुनकर हैरान था और बिना रूके पूछा क्यों
शनाया – हंसते हुए मुझे कॉलेज के लड़कों की आंख का मसाला नहीं बनना और मेरा डर भी खत्म हो जाएगा
अरनव हैरानी के साथ शनाया को देखता है और हंसकर बोलता है अच्छा कोई नहीं जानता ये बात
शनाया- कोई नहीं
अरनव –और आपकी दोस्त काजल
शनाया – उसे पता है वो मुझे फोर्स करती है बट मैं नहीं पहनती
अरनव – ओके
शनाया रिक्शे से उतर कर जाने लगी और अरनव शनाया को देखे जा रहा था कल की शनाया और आज की शनाया इतनी अलग क्यों थी क्या था जो शनाया के बारे में कोई नहीं जानता था...शनाया सबसे छिप कर यहां क्यों आयी थी और सबसे बड़ा सवाल इसके टच होते ही मैं इतना परेशान सा क्यों हो जाता हूं.....शनाया से जुड़े ना जाने कितने ही सवाल अरनव के मन में चल रहे थे...और कॉलेज आते ही वो रिक्शे से उतर कर सीधा अंदर चला गया......लेकिन अपने साथ में वो ऐसी ढेरो बाते ले आया जिसका जवाब फिलहाल उसके पास नहीं था......
दोपहर के तीन बजे
शनाया अपने चिर परिचित अंदाज में अपना दरबार लगा कर बैठी थी लेकिन आज किसी का कोई मसला नहीं सुलझा रही थी... बल्की अपने ही बैच के जोड़ो की क्लास ले रही थी उनके साथ बैठकर हंसी मजाक चल रहा था..इधर अरनव ने अपनी घड़ी पर नज़र डाली तो 3 बजते देख उसे शनाया का ख्याल आ गया और वो केतन को लेकर सीधा शनाया के कैंटिन पहुंच गया, आज वो और पास से शनाया को समझना चाहता था ... शनाया अपनी बातों में इतनी खोयी थी कि उसे होश ही नहीं रहा कब बगल वाली टेबल पर अरनव और केतन आकर बैठ गए थे....अरनव को देख शनाया के साथ के लोग अरनव को विश करने लगे
शनाया ने भी अपनी नजरे घुमाई और अरनव से जैसे ही नजरे टकराई उसने तेजी से बोला
शनाया –हैलो अरनव सर कैसे है आप
अरनव, शनाया की हरकत देखकर सोचने लगा ऐसे बोल रही जैसे बस अभी मिली हो
अरनव ने भी हैलो बोल दिया और केतन की तरफ देखकर बोला दो कॉफी मंगा ना
अरनव की बात सुनते ही शनाया बीच में बोल पड़ी अरे ऐसे कैसे आप मेरे कॉलेज की कैंटीन में आए है इसिलए चाय तो मैं पिलाउंगी....कहकर केतन को तेज से डांट देती है शनाया और बोलती है
शनाया – ओए केतन रूक मैं मंगा रही हूं तू बस आराम से बैठ
शनाया की बात सुनकर केतन हैरान था सोच रहा था वाह आज क्या हो गया शनाया और हमें कॉफी पिला रही है इससे पहले तो इसने कभी इतना भाव नहीं दिया
केतन –ठीक है आज काजल कहां है
शनाया –अपने घर है वो कुछ दिनो के बाद आएगी
केतन – अरे कल ही तो मिली थी
शनाया – हां तो आज चली गयी क्यों तुम्हें बता कर जाना था
केतन – डरते हुए अरे नहीं मैने तो बस यूं ही पूछ लिया
शनाया अपने दोस्तो को बाय बोलकर अपनी चेयर अरनव के पास लेकर आती है और बोलती है
शनाया – और बताओ सर आप यहां रोज आते हो है ना
अरनव – नहीं कभी कभी
शनाया – यहां कोई आपकी बीएफ है क्या (शनाया बोल कर तेज से हंसने लगती है) और बिना रूकेबोलती है नहीं मतलब कोई है तो बता दो मैं सेटिंग करा दूंगी
केतन बीच में ही कूद पड़ता है मेरी करा दे ना
शनाया सड़ा सा मुंह बना कर बोलती है अपनी शक्ल देखी है तुमने
केतन –अच्छा मुझे लड़की ना मिलेगी और अरनव को मिल जाएगी
शनाया- अरे अरनव सर है मिलना क्या इनकी तो जीएफ होगी क्यों सर
अरनव- नहीं ऐसा कुछ नहीं है...
शनाया- मतलब सिंगल हो
अरनव –नहीं मुझे सिंगल ही रहना है
शनाया- क्या नहीं सिंगल हो या नहीं हो
अरनव – मतलब कोई नहीं है
शनाया- वैसे कोई हो तो बता देना अब दो चार बाते हमने कर ही ली है तो इतनी तो हेल्प आपकी कर ही दूंगी
अरनव, शनाया की बक बक सुने जा रहा था... और उसके मन में अलग जंग चल रही थी... सुबह के वो सारे सवाल जिसका जवाब अरनव को चाहिए था ..... कोई इतना अलग अलग कैसे बर्ताव कर सकता है.....
इधर शनाया अरनव से सवाल जवाब करके शायद खुद के अंदर चल रहे सवाल का जवाब खोज रही थी और उसका अन्तरमन इस बात से सुकून में था कि अरनव की जिंदगी में कोई और नहीं है....लेकिन शनाया का दिमाग दिल की इस हरकत से अब भी अंजान था
TO BE CONTINUED
अरनव आराम से बाहर सड़क पर टहल रहा था... और किसी से फोन पर बात किए जा रहा था तभी पीछे से केतन आता है और उसके कंधे पर हाथ रखता है ..केतन को देख अरनव फोन रख देता है...
केतन – क्या भाई सब ठीक
अरनव – हां यार सब ठीक है... कल मुझे जाना है
केतन- कहां
अरनव – आर्मी कैंप बसंत विहार
केतन- क्यों भला
अरनव – वहां कल ब्लड डोनेशन का कैंप लगा है
केतन – ओह तो क्या तू अपना खून देगा
अरनव- हंसते हुए हां सोचा तो है
केतन – खून से ज्यादा तेरे अंदर दारू होगी
अरनव – हां तो जो दारू पीता होगा उससे मेरा खून मैच कर जाएगा
केतन – हंसते हुए सही है तेरा
अरनव – वैसे भी मैने पिछले 5दिनो से नहीं पी है...
केतन – हां देखा मैने
अरनव – वैसे एक बात बता
केतन- क्या
अरनव – ये शनाया रहने वाली कहां की है
केतन- भोपाल की
अरनव- पूरा नाम क्या है
केतन – नहीं पता भाई वैसे तू इतना क्यों पूछ रहा है उसके बारे में
अरनव –अरे नहीं बस यूं ही थोड़ी अलग सी लगी
केतन- हां ये तो है बोलती जो भी हो पर दिल की साफ है
अरनव – बोलती तो कुछ ज्यादा ही है....खैर चल मैं चला सोने कल जल्दी जाना है बाय गुडनाइट
Next morning
सुबह के 8 बजे आर्मी कैंप के बाहर भीड़ लगी हुयी थी.... ब्लड डोनेट करने के लिए, अरनव भी पूरी तरह से तैयार होकर पहुंच गया था वो जैसे ही रजिस्ट्रेशन कराने अंदर पहुंचा एक लड़की तेजी से खुद को छिपाने के लिए उसकी तरफ पीठ कर दिया...अरनव फार्म फिल करते करते एक दो बार उस लड़की को देखा लेकिन फिर अनदेखा कर दिया उसको लगा इसको मैने कहीं देखा है ये कद काठी खड़े होने का स्टाइल....लेकिन shots and t shirt में नहीं देखा है ... कौन हे ये ? अरनव एक बार कोशिश करता है और फिर अपने काम में लग जाता ह... इधर ये लड़की अपनी आंखों पर काला चश्मा लगाती है और तेजी से बाहर निकल आती है...
अरनव फार्म फिल करने के बाद उस कमरे के बाहर आ जाता है जहां उसे ब्लड डोनेट करना था.... कमरे के अंदर से नर्स की आवाज आ रही थी ...
नर्स – मैम मानना पड़ेगा आपको
लड़की- क्या हुआ
नर्स- आपके रिकॉर्ड के हिसाब से आप 10 वी बार व्लड डोनेट कर रही है
लड़की- जी जो चीज मेरे पास ज्यादा है उसका इस्तेमाल सब करें, कह कर वो हंसने लगी
उसकी हंसी अरनव को जानी पहचानी लगी अरे ये आवाज तो मैने कल ही सुनी थी और ये जानने के लिए अरनव कमरे में दाखिल हो गया ... अंदर जाते ही वो हैरान हो गया मन ही मन बोला अरे ये तो शनाया है
इधर शनाया अरनव को देखकर एक दम सकते में थी
अरनव ने बड़े ही फार्मल तरीके से शनाया को हैलो बोला
और शनाया ने भी बड़े अनमने मन से उसका जवाब दिया जैसे वो जो नहीं चाहती थी वहीं हो गया
अरनव- हाय कैसी है आप
शनाया – मैं ठीक हूं आप यहां कैसे
अरनव – बस जो आप करने आयी है
शनाया- हंसते हुए सही है ...
अरनव इतनी सी बाते करके दूसरे बेड पर बैठ गया नर्स बाकी प्रासेस में लग गयी
शनाया को उसने जितना बोलते हुए देखा था आज शनाया उतनी ही खामोश थी....अरनव को ये बात हजम नहीं हो रही थी ...वो बार बार शनाया को देखे जा रहा था....शनाया का आज का लुक और कल के लुक में कोई मैचिंग नहीं थी... कल तो कहां सलवार कुर्ते में झल्ली सी नजर आ रही थी और आज शाट्स और टी शर्ट में ऐसी लग रही थी जैसे कभी सलवार कुर्ता तो देखा ही नहीं होगा...लेकिन ये समझ ही नहीं आया कि ये फार्म भरते वक्त मुझसे छिप क्यों रही थी
अरनव जितना शनाया के बारे में सोचे जा रहा था उतना ही उलझता जा रहा था
और शनाया अपनी आखें बंद करके बस एक ही बात सोचे जा रही थी कि अब उसका राज सबको पता चल जाएगा....
शनाया का ब्लड जैसे ही निकला वो तेजी से बेड से उतरने लगी तभी नर्स ने उसको रोका
नर्स- रूकिए इतनी जल्दी मत जाइए ये लिजिए पहले ग्लूकोज़ पीजिए फिर जाइयेगा
शनाया ग्लूकोज़ लेकर उतरने लगी तभी अरनव से नहीं रहा गया और बोल पड़ा
अरनव – अरे आराम से इतना ब्लड निकला है थोड़ा तो सब्र कर लो...
शनाया को उम्मीद नहीं थी कि अरनव उसको ऐसे रोक देगा
शनाया- अरे मुझे वक्त पर कॉलेज जाना है
अरनव –तो ठीक है मुझे भी जाना है5 मिनट रुक जाओ साथ चलते है
शनाया-आप को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है
अरनव – इसमें परेशानी क्या अपने पैरो से चल कर जाना है
शनाया हंसने लगती है
और अरनव के अंदर अब भी वहीं सवाल शनाया मुझसे क्यों छिप रही थी ...
लगभग 10 मिनट के बाद अरनव और शनाया दोनो कैंप से बाहर आ गए...
अरनव – यहां से कैसे चलोगी मतलब आटो से या फिर रिक्शे से
शनाया – हंसते हुए जो मिल जाए.. वैसे भी यहां से मेन रोड पर जब पहुंचेंगे तभी कुछ मिलेगा
शनाया बोले जा रही थी और सामने देखे जा रही थी...और अरनव उसके साथ तो चल रहा था लेकिन थोड़ा सा दो कदम पीछे वो शनाया को कभी देखता तो कभी उसकी बाते सुनता
अरनव – अच्छा एक बात पूछू आपसे
शनाया – हां पूछिएं सर
अरनव – सर?
शनाया – आपको पूरा कालेज सर ही तो बोलता है
अरनव – आप मुझे पहले से जानती है
शनाया – नहीं लेकिन लोगो से पता चला कि आप अरनव सर है कह कर शनाया हंसने लगी औऱ कहती है अच्छा सुनिए
अरनव – क्या
शनाया-आप किसी को नहीं बताएंगे कि मैं यहां पर आयी थी
अरनव –क्यों क्या हुआ
शनाया – बस ऐसे ही I hope इतना तो आप मैनेज कर ही सकते है
अरनव- ओके जैसी आपकी मर्जी खैर वो रिक्शा दिख रहा रोक लूं
शनाया- हां ना जल्दी से रोको
अरनव रिक्शे वाले को आवाज लगाता है
और दोनो रिक्शे पर बैठ जाते है लेकिन रिक्शे पर बैठते ही शनाया का हाथ अरनव के हाथ से टच हो जाता है
और शनाया कल की ही तरह पसीने से तर हो जाती है उधर अरनव भी थोड़ा सा अनइजी हो जाता है...और बस पूरे रास्ते दोनो एकदूसरे से कोई बात नहीं करते है...लेकिन जैसे ही कॉलेज आने वाला होता है शनाया अरनव से कहती है
शनाया- मुझे यहीं उतार दो
अरनव – क्यों
शनाया – मैं नहीं चाहती कोई मुझे इन कपड़ो में देखे
अरनव शनाया की बात सुनकर हैरान था और बिना रूके पूछा क्यों
शनाया – हंसते हुए मुझे कॉलेज के लड़कों की आंख का मसाला नहीं बनना और मेरा डर भी खत्म हो जाएगा
अरनव हैरानी के साथ शनाया को देखता है और हंसकर बोलता है अच्छा कोई नहीं जानता ये बात
शनाया- कोई नहीं
अरनव –और आपकी दोस्त काजल
शनाया – उसे पता है वो मुझे फोर्स करती है बट मैं नहीं पहनती
अरनव – ओके
शनाया रिक्शे से उतर कर जाने लगी और अरनव शनाया को देखे जा रहा था कल की शनाया और आज की शनाया इतनी अलग क्यों थी क्या था जो शनाया के बारे में कोई नहीं जानता था...शनाया सबसे छिप कर यहां क्यों आयी थी और सबसे बड़ा सवाल इसके टच होते ही मैं इतना परेशान सा क्यों हो जाता हूं.....शनाया से जुड़े ना जाने कितने ही सवाल अरनव के मन में चल रहे थे...और कॉलेज आते ही वो रिक्शे से उतर कर सीधा अंदर चला गया......लेकिन अपने साथ में वो ऐसी ढेरो बाते ले आया जिसका जवाब फिलहाल उसके पास नहीं था......
दोपहर के तीन बजे
शनाया अपने चिर परिचित अंदाज में अपना दरबार लगा कर बैठी थी लेकिन आज किसी का कोई मसला नहीं सुलझा रही थी... बल्की अपने ही बैच के जोड़ो की क्लास ले रही थी उनके साथ बैठकर हंसी मजाक चल रहा था..इधर अरनव ने अपनी घड़ी पर नज़र डाली तो 3 बजते देख उसे शनाया का ख्याल आ गया और वो केतन को लेकर सीधा शनाया के कैंटिन पहुंच गया, आज वो और पास से शनाया को समझना चाहता था ... शनाया अपनी बातों में इतनी खोयी थी कि उसे होश ही नहीं रहा कब बगल वाली टेबल पर अरनव और केतन आकर बैठ गए थे....अरनव को देख शनाया के साथ के लोग अरनव को विश करने लगे
शनाया ने भी अपनी नजरे घुमाई और अरनव से जैसे ही नजरे टकराई उसने तेजी से बोला
शनाया –हैलो अरनव सर कैसे है आप
अरनव, शनाया की हरकत देखकर सोचने लगा ऐसे बोल रही जैसे बस अभी मिली हो
अरनव ने भी हैलो बोल दिया और केतन की तरफ देखकर बोला दो कॉफी मंगा ना
अरनव की बात सुनते ही शनाया बीच में बोल पड़ी अरे ऐसे कैसे आप मेरे कॉलेज की कैंटीन में आए है इसिलए चाय तो मैं पिलाउंगी....कहकर केतन को तेज से डांट देती है शनाया और बोलती है
शनाया – ओए केतन रूक मैं मंगा रही हूं तू बस आराम से बैठ
शनाया की बात सुनकर केतन हैरान था सोच रहा था वाह आज क्या हो गया शनाया और हमें कॉफी पिला रही है इससे पहले तो इसने कभी इतना भाव नहीं दिया
केतन –ठीक है आज काजल कहां है
शनाया –अपने घर है वो कुछ दिनो के बाद आएगी
केतन – अरे कल ही तो मिली थी
शनाया – हां तो आज चली गयी क्यों तुम्हें बता कर जाना था
केतन – डरते हुए अरे नहीं मैने तो बस यूं ही पूछ लिया
शनाया अपने दोस्तो को बाय बोलकर अपनी चेयर अरनव के पास लेकर आती है और बोलती है
शनाया – और बताओ सर आप यहां रोज आते हो है ना
अरनव – नहीं कभी कभी
शनाया – यहां कोई आपकी बीएफ है क्या (शनाया बोल कर तेज से हंसने लगती है) और बिना रूकेबोलती है नहीं मतलब कोई है तो बता दो मैं सेटिंग करा दूंगी
केतन बीच में ही कूद पड़ता है मेरी करा दे ना
शनाया सड़ा सा मुंह बना कर बोलती है अपनी शक्ल देखी है तुमने
केतन –अच्छा मुझे लड़की ना मिलेगी और अरनव को मिल जाएगी
शनाया- अरे अरनव सर है मिलना क्या इनकी तो जीएफ होगी क्यों सर
अरनव- नहीं ऐसा कुछ नहीं है...
शनाया- मतलब सिंगल हो
अरनव –नहीं मुझे सिंगल ही रहना है
शनाया- क्या नहीं सिंगल हो या नहीं हो
अरनव – मतलब कोई नहीं है
शनाया- वैसे कोई हो तो बता देना अब दो चार बाते हमने कर ही ली है तो इतनी तो हेल्प आपकी कर ही दूंगी
अरनव, शनाया की बक बक सुने जा रहा था... और उसके मन में अलग जंग चल रही थी... सुबह के वो सारे सवाल जिसका जवाब अरनव को चाहिए था ..... कोई इतना अलग अलग कैसे बर्ताव कर सकता है.....
इधर शनाया अरनव से सवाल जवाब करके शायद खुद के अंदर चल रहे सवाल का जवाब खोज रही थी और उसका अन्तरमन इस बात से सुकून में था कि अरनव की जिंदगी में कोई और नहीं है....लेकिन शनाया का दिमाग दिल की इस हरकत से अब भी अंजान था
TO BE CONTINUED
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