Tuesday, 12 August 2014

BUS YU HI

बस यूं ही तूलिका आज मचलना चाहती है..... अपने रंगों के साथ खेलना चाहती है.. जिंदगी के कैनवास पर अपने सपनो में रंग भरना चाहती है.. बस यूं ही तूलिका आज जी भर के  जीना चाहती है. अपने सपनो की दुनिय़ां को हकिकत में देखना चाहती है... बस यू ही तूलिका आज झूमना चाहती है..... नन्हे से कदमों की आहट ने जिंदगी जीना सीखा दिया... उसकी हर अदाओं पर दिल खोलकर हंसना सिखा दिया नहीं करते परवाह हम किसी की........ अपनी शर्तो पर वक्त को चलना सिखा दिया..... बस यूं ही तूलिका आज बचपन की यादों पर पड़ी धूल को हटाना चाहती है........ बस यूं ही तूलिका आज मचलना चाहती है...............      

2 comments:

Unknown said...

jee jo pachpan me (55) me bachpan

tulika singh said...

Oye 55 ke tum ho ok