कोमल मन है मेरा लेकिन मैं कमज़ोर नहीं
निरिह सी दिखती हूं मैं लेकिन अबला नहीं.....
अपनी मुस्कुराहट को तुम्हारा मोहताज बनाया है
बेशक हमने
क्योंकि तुम में बिना सहारे चलने का जोर
नहीं..
तुम गौरव हो समाज का जानती हूं मैं..
लेकिन पल पल अपनी मौजूदगी का अहसास कराना
तुम्हारे गौरव की नहीं, कमजोरी की है ये परिभाषा
जानती हूं मैं मेरे ख्याल तुमको रास ना आएंगें
लेकिन यहीं ख्याल मुझे दो पल का सूकून पहुंचाते है
मेरा संघर्ष तुमसे आगे जाने का नहीं है
मेरा संघर्ष तुमको पीछे करना भी नहीं है
ये कवायद है सिर्फ इंसान बने रहने की
खुदा ने तुम्हे और मुझे दोनो को बनाया है
फिर तुम समाज का गौरव और मैं समाज की वस्तु क्यों हूं
शुक्रिया खुदा का नहीं दिए उसने किसी भी रंग को एकाधिकार
वर्ना तूलिका की पहचान भी होती रंगो की मोहताज
2 comments:
Nice one
Nice one
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