Wednesday, 29 April 2020

Adhuri Kahani Part 2 , episode -8


शनाया और बाइक सवार की बाते अरनव को सुनाई को तो नहीं दे रही थी लेकिन उनके चेहरे के भाव अरनव साफ पढ़ सकता था । कुछ तो था जो शनाया छिपाए जा रही थी, और इस बात की खबर सिर्फ काजल को थी । अरनव, काजल की तरफ देखता है और पूछता है, काजल बता ना क्या बात है शनाया इतनी परेशान क्यों है और कौन है ये लोग ? पहले वो आर्मी की जीप का पीछा करना फिर इन लोगो का हमारे पीछे आना शनाया का इस तरह उनसे बात करना आखिर बात क्या है बताओगी ..
काजल अपने चेहरे पर बिना कोई भाव लाए हुए साफ बोलती है, यार मुझे खुद नहीं पता तुम उससे ही पूछ लेना वैसे मेरी मानो तो मत ही पूछना वो और अपसेट हो जाएगी, फिलहाल इस बात को यहीं बंद करते है देखो वो आ रही है...
शनाया गाड़ी की तरफ आती है और ऐसे शो करती है कि जैसे कुछ भी नहीं हुआ  है वो तो बस तफरी करने गयी थी, लेकिन अरनव के चेहरे पर अब  भी ढेरो सवाल थे.. वो शनाया से जैसे ही पूछने जाता है काजल पीछे से उसका कंधा दबा देती है। काजल के इशारे समझ अरनव चुप हो जाता है
शनाया गाड़ी मे बैठते ही तेज से बोलती है, अरे तुम लोग इतने खामोश क्यों हो अब तो हम पहुंचने वाले है
काजल – तेरी वजह से
शनाया – क्यों
केतन – तूने इतना देर कर दिया अगर हम टाइम पर नहीं पहुंचे तो  रात हो जाएगी और  ठंड भी बढ़ जाएगी..
शनाया – क्या बे केतन दो दिन के लिए निकले है मजे कर ना तू और ठंड कहां है देखों आसमान कितना साफ और धूप कितनी चमकीली है
अनय – मैडम ये बंसत का महिना है और भूलो मत फरवरी में भी यहां कभी कभी बर्फ गिर जाती है..
शनाया – अच्छा ठीक है आ गयी ना अरनव अब गाड़ी चलाओ ना
अरनव – ओह पक्का मैने सोचा तुमलोगो की बाते हो जाए तो शुरु करूं
शनाया, अरनव का चेहरा देखने लगी और समझ गई अरनव काफी नाराज है..शनाया धीरे से अरनव की तरफ देखती है और बोलती है सुनो ना
अरनव बिना देखे  सर हिला देता है
शनाया – ये क्या बात हुई मेरी तरफ देखो तो सही
अरनव – तुझे देखू, क्यों जरा बताना ड्राइव कर रहा हूं मुझे सामने देखने दे ।
शनाया, अरनव के ऐसे बेरूखे से जवाब से उदास हो जाती है और अपना सर नीचे करके फिर से अपना लाकेट पकड़ कर मसलने लगती है..
लगभग एक घंटे की खामोशी के बाद अरनव बोलता है हां भई केतन बता अब कहां चलना है..
केतन – तू बता कैम्टी फॉल चले या सीधा VIEW POINT  पर चले
अरनव – कैम्टी चलते है फिर वहीं कैम्पिंग करेंगे पास के रिसार्ट में कल पूरा दिन घूमेंगे औऱ रात में शाम को VIEW POINT  पर  चलेंगे और  अगली सुबह वापस क्यों कैसा प्लान है..
काजल – मस्त प्लान है मुझे शॉपिंग करने का पूरा टाइम मिल जाएगा
शनाया – मतलब लड़की ही रहना उससे ऊपर मत उठना, यहां क्या शॉपिंग करना
साक्षी – अरे मुझे भी करनी है चलेंगे ना मार्केट
शनाया – ठीक है तुम लोग जाना मुझे तो बिना किसी वजह यहां की वादियों में घूमना है....इस खुले आकाश  के नीचे जीना है.. और इतनी यादे समेटनी है कि मेरे जहन से ये कभी ना मिटे...
काजल – बेस्ट आइडिया
शनाया – गुस्से से बोलती है क्या
काजल – हम शॉपिंग करेंगे और तुम चिडिंया घर घूम आना
शनाया – हो गयी बकवास तेरी
इनकी बकबक सुन कर अरनव केतन अनय एक साथ बीच में बोलते है अब बस करों देवियों और एक साथ सब हंसते है..
सबको हंसता देख शनाया भी हंसने लगती है....और अरनव का हंसता हुआ चेहरा देख वो थोड़ा सा रिलैक्स होती है...
शनाया – वैसे अब तो हम पहुंचने वाले है... तो ये बताओ यहां कौन कौन पानी में जाएगा
काजल बीच में ही बोलती है भाई मैं तो नहीं जाउंगी मुझे ठंड लगती है और  ऊपर से यहां का पानी ऐसे ही ठंडा रहता है...
काजल की बाते सुनकर सब हंसने लगते है.... अरनव  रिसार्ट की पार्किंग में गाडी रोकता है और सब तेजी से उतर कर जाने लगते है तभी शनाया सबको रोकती है
शनाया – हैलो, कहां चले सब रूको यहां सबसे पहले एक पिक्चर तो यहां बनती है...सब शनाया के पास आ जाते है लेकिन अरनव थोड़ा दूर खड़ा रहता है ऐसे जैसे अब वो शनाया को जानता ही नहीं..इधर शनाया उसको तेज आवाज देकर बुलाती है और कहती है अरे आओ अरनव  अच्छी पिक्चर आएगी स्मार्ट लग रहे हो...अरनव, शनाया की बात सुनकर हंस देता है और अनमने मन से आने लगता है औऱ कहता है ये सारी पिक्चर तू हमें प्रिंट कराकर देगी ।
शनाया – ना बाबा ना ये मैं नहीं करूंगी हां सबको मेल कर दूंगी, अब आ जाओ भाव पूरे हो गये हो तो...
शनाया कैमरा गार्ड को पकड़ा देती है और सब एक साथ नियम से खड़े हो कर पिक्चर क्लिक कराते है .. ये देख शनाया बीच में ही बोलती है.. मतलब क्या स्कूल में है हम अरे थोड़ा स्टाइल तो लाओ शनाया की बाते सुनकर अनय तो साक्षी के एककदम करीब आ जाता है... और केतन काजल के पास आकर खडा हो जाता है लेकिन काजल अपने दोनो हाथों से उसके सर पर सींग बना देती है.. ये देख सब हंसने लगते है इधर अरनव और शनाया भी एकदूसरे के पास खड़े होते है लेकिन अजनबी की तरह...शनाया गार्ड को बोलती है, भइया तुम क्लिक करते जाना जब तक मैं मना ना करूं... और सब एक से बढ़कर एक पोज दे रहे थे शनाया काजल के साथ मिलकर कभी पाउट बनाती तो कभी जीभ निकालती और अरनव की नजर एक टक  शनाया को देखे जा रही थी। तभी केतन, अरनव  का हाथ पकड़कर सबके बीच में ले आता है और इतनी तेज खींचता है कि अरनव सीधा शनाया से टकरा जाता है, अरनव का एक हाथ शनाया के कंधे पर गिरता है तो दूसरा हाथ उसकी पीठ पर शनाया गिरते गिरते बचती है... लेकिन अरनव का हाथ लगते ही शनाया के अंदर जैसे कोई कंरेट दौड़ गया हो वो घबरा सी जाती है...पल भर के लिए शनाया और अरनव के बीच की दूरी इतनी कम रह जाती है कि अरनव को शनाया की तेज सांसे सुनाई देने लगती है उसकी नजरे शनाया के चेहरे पर जा कर टिकजाती है...शनाया के बिखरे बाल आखों में घबराहट  चेहरे पर गुस्सा सब एक साथ अरनव को दिखाई दे रहा था...अरनव खुद को सम्हालता है और शनाया से दूर हटकर पूछता है
अरनव – हां भाई तू ठीक है ।
शनाया खुद को नार्मल करते हुए सर हां में हिला देती है इधर केतन सॉरी यार की रट लगाए जा रहा था... और गार्ड भइया शनाया की बात मान कर सब कुछ क्लिक किए जा रहे थे...काजल इन सबके  बीच बोलती है यार प्लीज एक पिक्चर ढंग से क्लिक करा लो सब फिर चले मुझे भूख लगी है .... फाइनली एक पिक्चर में सलीके से और पास पास खडे होकर मुस्कुरा रहे थे...गाड़ी से सब अपना अपना सामान निकाल कर आगे बढ़ने लगते है, वहीं शनाया ,गार्ड भइया को धन्यवाद बोलकर 50 रूपए पकड़ाती है और गाड़ी से अपना सामान निकालने लगती है तभी अरनव उसके पीछे आता है और बोलताहै
अरनव –तुझे चोट तो नहीं लगी
अरनव के इतने अपनेपन से पूछने पर शनाया एकदम से शांत होकर उसको देखने लगती है और बोलती है नहीं
शनाया – सॉरी
अरनव –तू क्यों बोल रही है
शनाया – मुझे पता है तुम नाराज हो
अरनव –अरे कोई नहीं बस थोड़ा अजीब लगा...खैर मैं तेरा काजल जैसा दोस्त होता तो मुझे पता होता लेकिन कोई बात नहीं मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता..
शनाया , गाडी से अपना सामान निकालने लगती है तो अरनव उसका सामान हाथ में ले लेता  है और बोलता है
अरनव – मैं ले चलता हूं तू रहने दे थक गई हो गयी
शनाया बिना किसी इंकार के अरनव के साथ साथ  अंदर जाने लगती है और अरनव से कहती है
एक बात बोलूं
अरनव – बोलो
शनाया – अगर मैं तुमसे वो सब बताऊ जो तुम जानना चाहते हो तो किसी से कहोगे तो नहीं
अरनव – तुझे मुझ पर भरोसा है
शनाया – पता नहीं इतनी से देर में ही लगता है मैं तुम्हें बरसो से जानती हूं औऱ भरोसा करने का दिल करता है
अरनव – फिर बता देना  और अपना यकीन कायम रखना...
अरनव और शनाया आपस में बाते करते हुए  कॉरीडोर में पहुंचे ही थे कि शनाया की नजर  फिर से उसी बाइक सवार पर चली जाती है जिसको उसने इतना डांटा था...
शनाया एकदम से रूक जाती है और अरनव कभी शनाया को तो कभी उस आदमी को देखने लगता है... दो पल रूकने के बाद शनाया अरनव का बाजू पकड़ती है और उसके साथ रूम की तरफ बढ़ने लगती है...रूम नंबर 301 और 302 के बाहर इतनी आवाजे आ  रही थी कि शनाया और अरनव वहीं रूक गए
अरनव – चल आजा यहीं है अपना रूम
शनाया –तुम्हें कैसे पता
अरनव – क्योंकि मैने ही बुक किया है 302 तुम लड़कियों का और 301 हमारा
शनाया अरनव से अपना सामान लेती है और 302 के अंदर चली जाती है....अंदर का नजारा देख वो गुस्से में लाल पीली हो जाती है और सामान  एक तरफ रख कर सीधा बेड की तरफ जाती है....चार गालियां मुंह से निकालती है और केतन का हाथ पकड़ कर उसको खींचती है और बोलती है
शनाया – क्या मजाक है अपने कमरे में जा
केतन –अरे गुस्सा मत हो मैं तो काजल का सामान उठा कर लाया ना थक गया था
शनाया- ओह अच्छा अच्छा फिर तो अनय भी थक गया होगा
केतन – और क्या
शनाया – वो कहां है
केतन वहां बालकनी में
शनाया गुस्से से पहले काजल की तरफ देखती है फिर अनय को तेज से आवाज लगाती है
अनय हड़बड़ा कर अंदर आता है और बोलता है क्या हुआ
शनाया –मैने कहां अगर थकान उतर गयी हो तो अपने कमरे में जाओगे प्लीज
अनय कभी केतन की शक्ल देखता तो कभी साक्षी और धीरे से दोनो बाहर निकल गए इधर काजल तेज तेज हंसे जा रही थी......
रात के 8 बजे
पूरे दिन की मस्ती के बाद  सब थक चुके  थे गुलाबी सी ठंड अपनी चादर फैला रही थी .. आसमान में बिखरे हुए सितारे और दूर दूर तक जलने वाली छोटी छोटी लाइटे ऐसी लग रही थी जैसे आसमान और धरती सब यहां एक हो गए हो....गुजरती रात के साथ पारीजात के फूलो की खुशबू हवा में फैलती जा रही थी....और कानो में एक मधुर सा संगीत, शनाया छोटी सी ढलान पर बैठ कर ये सब देखे जा रही थी...उसके अंदर चल रहा तूफान आज शांत था ...उसके चेहरे पर गिरते हुए  बाल ऐसे लग रहे थे आज मौका मिला है शनाया के साथ के साथ लुकाछिपी खेल लो.....अरनव दूरसे बैठ कर शनाया को एकटक देखेजा रहा था ... बाकी सारे अपनी मस्ती में लगे हुए थे और शनाया अपनी ही दुनिया में खोयी हुयी थी...अचानक शनाया की नजर अरनव  पर पड़ी और वो एक दम से खड़ी हो  गयी और बोला अरे अरनव तुम कब आएं
अरनव – बस तभी जब तू ना जाने किस दुनिया में खोयी थी...
शनाया – तुम उनके साथ मस्ती नहीं कर रहे
अरनव –तू भी तो नहीं कर रही
शनाया –अरे मेरे लिए तो ये सब देखना इसको महसूस करना ऐसा है जैसे जिंदगी को बस अभी जी लेना...अब तुम बताओ तुम क्यों हो यहां
अरनव- क्योंकि मुझे भी ये सब पंसद है मेरा तो जन्म ही पहाड़ में हुआ है
शनाया – wow कहां के रहने वाले हो तुम
अरनव – नैनीताल
शनाया – ओके
अरनव – और तुम
शनाया – भोपाल
अरनव – भोपाल से यहां पढ़ने क्यों आयी
शनाया – क्योंकि मुझे यहीं पढ़ना था कोई ऑप्शन नहीं था
अरनव – मतलब
शनाया – मतलब कुछ नहीं, मेरे साथ नेचर वॉक करने चलोगे
अरनव – अभी
शनाया- क्यों डर लग रहा है
अरनव – हंसते हुए नहीं रात हो गयी है ना
शनाया –और मैं इस रात को गुजरने नहीं देना चाहती
अरनव – क्यों
शनाया – अरे छोड़ो मैं तो पागल हूं, चलोगे पहले ये बताओ
अरनव –हां...
शनाया –एक सवाल पूछूं
अरनव – फिर से सवाल,वैसे मेरेपास भी बहुत से सवाल है मैं पूंछू
शनाया – ठीक है पहले तुम पूछों
अरनव –कौन हो तुम
शनाया-मतलब, लड़की हूं
अरनव – हंसते हुए मतलब उस दिन ब्लड कैंप में तुमने क्यों किसी को कुछ बताने  को मना किया , फिर तुम कॉलेज में सूट और  बाहर ऐसे कपड़े क्यों पहनती हो, कॉलेज में तुम एक दम अलग सी दिखती हो जबकी तुम बिल्कुल  वैसी नहीं हो, वो आर्मी  वाले कौन थे.. जो हमारा पीछा कर रहे थे...फिर ये बाइक वाले कौन थे  जो हमारे साथ साथ यहां तक आ गए.. और अगर मैं गलत नहीं हूं तो उनमें से एक अब भी तुम पर नजर रखे हुए है इतनी दूर से...
शनाया, अरनव की बाते सुनकर पहले हंसती है और फिर गहरी सांस लेती है...और बोलती है
शनाया – अरनव बेदी तुम्हें पता है शनाया से एक साथ इतने सवाल किसी ने नहीं किए या यूं कह लो शनाया ने इसकी इज़ाजत किसी को नहीं दी... लेकिन क्या है ना तुम अब मेरे दोस्त हो तो तुम्हें तो बता सकती हूं .. बस एक बात का ध्यान रखना ये बाते जिंदगी में किसी को नहीं बताना वैसे एक मिनट रूको
अरनव – क्या हुआ
शनाया  कुछ नहीं बोल कर अपने गले से वो लाकेट निकाल देती है और उसको ओपन करती है
अरनव – ये क्या है भाई इसके अंदर, ये भी एक सवाल है तू पूरे रास्ते इस लाकेट को पकड़ कर मसलती रही..एक काम कर तुझे नहीं बताना मत बता लेकिन बस इतना बता तू ठीक तो है ना मेरा मतलब है तुझे कोई खतरा तो नहीं है.......
शनाया, अरनव के सवाल और उसकी केयर  देखकर हर गुजरते पल के साथ उसकी ओर खींची चली जा रही थी...अपनी भावनाओं को रोकते हुए वो बोलती है
शनाया – अरनव अब एक बात पूछूं मैं
अरनव – हां बोल ना
शनाया – अपना हाथ आगे लाओ
अरनव अपना हाथ आगे बढ़ाता है और बोलता है क्या हुआ
शनाया – मुझसे वादा करो कुछ भी  हो जाए तुम मुझसे ये दोस्ती कभी नहीं तोड़ोगे फिर मैं सही रहूं या गलत तुम सही रहो या गलत..कुछ भी हो जाए हमारी दोस्ती कभी नहीं टूटेगी ।
अरनव, ढलान के पास बैठ जाता है और शनाया को भी इशारा करता है. बैठने के लिए...
 शनाया जैसे ही नीचे बैठती है अरनव उसकी तरफ हाथ बढाता है और बोलता है पक्का प्रॉमिस आज से तू मेरी पक्की वाली दोस्त... कहीं भी कुछ भी हो हम दोस्त हमेशा रहेंगे...
शनाया अरनव की बाते सुनती जाती है औऱ उसके ऑखों से आसूं गिरते जा रहे थे... अरनव को समझ नहीं आ रहा था कि शनाया इतनी कमजोर क्यों पड़ गयी वो शनाया के आसूं देखकर अरनव भी कमजोर पड़ता जा रहा था उसने बड़ी हिम्मत जुटा कर शनाया के कंधे पर अपना हाथ रखा और शनाया उसके अंदर खुद को समेटती गयी....अरनव के लिए शनाया अब औऱ पहेली बन चुकी थी...ऐसी कौन सी बाते है जो शनाया बताने से पहले इतनी कमजोर पड़ गयी.. हर पल हल्ला मचाने वाली शनाया के अंदर आखिर कौन सा तूफान चल रहा था.. जो उसे इतना कमजोर बना रहा था..शनाया के आसूंओं से उसकी टीशर्ट गीली होती जा रही थी... और अरनव अपने दिल से अंजान शनाया की तरफ खींचा चला जा रहा था.. इतने कम से वक्त में ऐसा क्या था इन दोनो के बीच जो एक दूसरे को पास लाए जा रहा था... क्या ये प्यार की शुरुआत थी... या फिर एक ऐसा रिश्ता जिसकी नींव शायद बरसो पहले पड़ चुकी थी....  ये सब कुछ जानने के लिए अगला एपिसोड  पढ़ना मत भूलिएगा...
तूलिका सिंह



2 comments:

Tripti said...

Superb 👌

Sweety said...

Veryyyyy Interesting.....