अगली सुबह 11 बजे
अरनव के कानो में तेज तेज डोर बेल की आवाज चुभती है जैसे कोई उसके सर पर हथौड़ा मार रहा हो....अपने बदन को तोड़ते हुए किसी तरह
उठता है और डोर ओपन करने जाता है...डोर ओपन करते ही सामने काम वाली बाई मीना खड़ी
रहती है... उसकी शक्ल को देख ऐसे लग रहा था जैसे इतनी सी देर में उसका मिलियन डॉलर
का नुकसान हो गया है
मीना घर के अंदर तेजी से घुसती है और गुस्से में बड़ बड़ करती है
मीना- क्या साहेब कब से डोर बजा रही है किधर था तुम
अरनव बिना कुछ बोले ग्लास में पानी डाल कर पीने लगता है...
मीना- देखों साहेब मैं आपकी मां के उम्र की हूं इसलिए रोज आपसे कहती
हूं पीछे का भूल जाओ और पहले जैसे तुम हंसते मुस्कुराते थे वैसे हो जाओ
मीना अरनव पर अपना हक जमाते हुए बोले जा रही थी और घर को समेटे जा रही
थी
मीना- साहेब एक बात पूछूं
अरनव बड़े ही अनमने मन से बोलता है हां ताई पूछों
मीना- पिछले 7 महिने से तुम एक बार भी अपने घर नहीं गए और जो मेम साहब
आयी थी वो भी फिर कभी नहीं आयी तुमको उनकी याद नहीं आती
अरनव-अपने सर को जोर से पकड़ता है और बोलता है नहीं मुझे किसी की याद
नहीं आती और ना मेरे पास समय है
मीना- साहेब गलती हो गयी लेकिन मैं तुमको ऐसे देखती तो दुख हो ता मुझे
अरनव – ताई खाने में खिचड़ी बना देना मैं अपने कमरे में जा रहा गेट
लॉक करके चली जाना...
मीना अरनव की शक्ल देखने लगती है और अफसोस करके बड़ बड़ करने लगती है साहेब को मैने दुखी
कर दिया हे बाप्पा इनकी लाइफ का सब संकट दूर कर दो इनको पहले जैसा कर दो
इधर अरनव के दिमाग में मीना की बाते तेजी से चल रही थी....उसके माथे
का दर्द बढ़ता जा रहा था... और बिस्तर पर लेटे लेटे कभी वो शनाया की कल की बाते
याद कर रहा था तो कभी 7 महिने पहले जो हुआ उसको सोच रहा था......शनाया के हाव भाव
उसकी body language उसका बोलने का तरीका उसके चेहरे पर चमकता हुआ आत्मविश्वास को सोचकर अरनव
हल्का सा मुस्कुराया और मन ही मन बोलने लगा चलो शनाया कम से कम वहां तो पहुंच गयी
जहां उसे होना चाहिए था......आज भी याद है मुझे वो दिन जब 15साल पहले मैं शनाया
से पहली बार मिला था...
फ्लैशबैक
देहरादून एक ऐसा शहर जहां की फिजा में
खूबसुरती बसती है....यहां ..सुबह की पहली धूप जब मसूरी की पहाड़ियों पर
पड़ती तो ऐसा लगता कोई खूबसुरत सी लड़की घूंघट में से चारो तरफ देख रही हो...और
देहरादून उस पुराने आशिक की तरह उसका दीदार कर रहा हो.... चारों तरफ हरियाली ही
हरियाली और फिजा में एक अलग सा नशा...कहते है देहरादून का फैशन इतनी तेजी से बदलता
है जितनी तेजी से दिल्ली की सर्दी....लड़कियों का फैशन सेंस हो या फिर स्टाइल हो
हमेशा हॉट न्यूज बना रहता है...fashion freedom और discipline का best cocktail है देहरादून..... आप सोच
रहे होंगे discipline कहां से आ गया..... जनाब जहां आर्मी वालो का बसेरा हो वहां अनुशासन तो
रहेगा ही.... लेकिन देहरादून के सबसे पुराने कॉलेज दयानंद यूनिवर्सिटी( बदला हुआ
नाम ) में आपको सिर्फ दो चीजे ही दिखाई
देंगी.....फैशन और फ्रीडम....लेकिन फैशन के F से कोसो दूर थी ....
शनाया....जहां लड़कियां जिंस टॉप और ड्रेसेस पहन कर आती थी... वहीं शनाया का बेस्ट
ऑउटफिट था सलवार कुर्ता और सलीके दार दुपट्टा.....काले लंबे बालो की गुथी हुई चोटी
पैरो में नार्मल सा चप्पल....और उम्र 19 साल.... पहली नज़र में देखकर लगता उफ्फ
कितनी सीधी सी लड़की है लेकिन दूर से...जितना आप पास जाते जाएंगे शनाया के हकिकत
आपके सामने आते जाएगी....इनके ड्रेस और नेचर का
आपस में कोई मेल नहीं .....इतने बड़े कॉलेज में जहां लड़कियां अपने हुस्न
अपनी काबिलयत की वजह से लड़कों के बीच हॉट टापिक रहती थी वहीं शनाया अपनी
गुंडागर्दी या यूं कह लिजिए नेतागिरी के लिए फेमस थी....भोपाल से आयी हुई ये लड़की कॉलेज के सभी लडकियों के दिल में राज
करती थी...किसी का ब्रेकअप कराना हो किसी का पैचअप कराना हो किसी का प्रपोजल
दिलाना हो... सब काम शनाया के लिए चुटकियों का खेल था... और इन सबमें उसकी राजदार
थी काजल....शनाया जितनी बेफिक्र टाइप की काजल उतनी ही खूबसुरत और नज़ाकत से
ओवरलोडेड थी....दोनो की जोड़ी कॉलेज में हिट थी काजल को देखकर हर लड़का उसके पीछे
जाना चाहता था लेकिन शनाया का खौफ उनकी सोच को वहीं डिलिट कर देते थे.... रोज ठीक
3 बजे शनाया काजल के साथ कैंटिन के पास अपना दरबार लगाती थी....जहां लड़के और
लड़किया दोनो ही होते थे... रोज की तरह आज भी शनाया का दरबार लगा था....प्रिया
बड़े ही मासूमियत सी शक्ल बना कर अपना दुखड़ा रोए जा रही थी ... आवाज इतनी धीरे थी
कि शनाया केअलावा किसी को कुछ सुनाइ ना दे रहा था लेकिन ......शनाया प्रिया की
बाते सुनकर काजल की तरफ देखती है और तेज से बोलती है
शनाया – भाई प्रिया काम तो हो जाएगा लेकिन एक
शर्त है ..
शनाया की शर्त वाली बाते सुन प्रिया का चेहरा
उतर गया और मन ही मन बोलने लगी बिना कुछ लिए कोई काम ना कारएगी ये फस्ट इयर से
सेंकेड इयर में आ गयी लेकिन इसकी दादागिरी खत्म होने के बजाए बढ़ती ही जा रही है
....एक मिनट सोचकर प्रिया बोलती है
प्रिया –बोलो शनाया क्या शर्त है
शनाया- ज्यादा कुछ नहीं काम होने पर तुम हम
सबको को कैंटीन में पार्टी दोगी....
प्रिया-कहां यहां कि हॉस्टल में
शनाया- हॉस्टल में ना बाबा ना जो होगा यहीं
होगा....लड़के बिचारे फिर कैसे खाएंगे...
शनाया की बाते सुनकर सब हंसने लगते है
और थोड़ी दूरी पर अरनव बैठकर आराम से शनाया की
हरकते देखे जा रहा था... अरनव शनाया की कॉलेज के बगल में प्रोफेशनल इंस्टिटीट्यूट
में मार्केटिंग से mba कर रहा था.... जहां सब लड़के लड़कियों के पीछे भागने में अपना टाइम बर्बाद
करते वहीं अरनव साइड बाई साइड कुछ कुछ पार्ट टाइम जॉब करता...वो ना सिर्फ अपने
कॉलेज में बल्की शनाया के कॉलेज में भी अरनव सर के नाम से फेमस था.... खाली वक्त
में अरनव का बेस्ट टाइमपास था computer पर job search करना... और कभी कभी अपना मूड फ्रेश करने के लिए वो शनाया के कॉलेज की
कैटिंन में आकर बैठ जाता था....बस आज भी अरनव अपना मूड चेंज करने शनाया की कैंटीन
में बैठा था.... शनाया की हरकतों को देख कभी अरनव के चेहरे पर हंसी आ जाती तो कभी
ऐसी शक्ल बनाता जैसे कहना चाहता हो क्या लड़की है कितना बकबक करती है....
TO BE
continued
5 comments:
Jaldi se aage ki story bhi upload kariye bahut interesting hai.
Abhi tak humne Shanaya ka pehlu dekha ab Arnav ke emotions pata chal rahe . Superb write up... waiting for next
Sure dear monday and Thursday ko 8 pm par jarur padhna tx for ur love
Tx dwae yup in second part exactly u know who is arnav what his feelings and whats the end of this story
Very nice & Intresting story.. ����
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