Thursday, 30 April 2020

Adhuri Kahani part2, episode 9


शनाया को अचानक अहसास हुआ वो अरनव के बेहद करीब आ चुकी थी..उसने सहसा  खुद को  उससे अलग किया और अपने आप पर काबू करते हुए बड़े ही बेरूखी से बोला इन आसूंओ का भी कोई ईमान धर्म नहीं बचा है ज़रा सा किसी का कंधा मिलता नहीं बहना शुरु हो जाते है
अरनव,शनाया की बाते ध्यान से सुनता है और बोलता है कोई बात नहीं हम इंसान ऐसे ही होते है जहां कुछ अपना सा लगता है वहीं दिल खुद ब खुद बोल पड़ता है...अब तू मेरे सवालों का जवाब देगी ।
शनाया – हां अरनव जरूर दूंगी रूको एक मिनट, शनाया  अपने हाथ में लिए लॉकेट को खोलती है और उसको देखते ही अरनव की आंखें खुली की खुली रह जाती है....
अरनव – ये क्या है शनाया, इसके अंदर ये कैसी मशीन है... तू कौन है
शनाया – शांत रहोगे  सब बताती हूं ... ये लोकेशन ट्रैकर है और इसमें ये red colour का जो बटन है ये voice recorder  है ।
अरनव – मतलब ये सब क्यों
शनाया – मतलब ये है कि मैं जो दिखने में आजाद पंछी लगती हूं actually  मुझसे ज्यादा कैद किसी की जिंदगी नहीं
अरनव – साफ साफ बताएगी
शनाया – चल यहां से चलते है वॉक करते करते बताती हूं
अरनव – ओके
शनाया- अरनव मैं एक ऐसे घर में पैदा हुयी हूं जहां खुली हवा में सांस लेने का भी अधिकार नहीं है..मेरे पापा ब्रिगेडियर राजेश कुमार  है..आर्मी के सिनियर ऑफिसर है.. और दुश्मन के खिलाफ बनने वाले हर प्लान का अहम हिस्सा होते है.. वो फिलहाल अपने एक मिशन पर गये है कहां ये मुझे भी नहीं पता
अरनव – तो, ये तो अच्छी बात है तुझे तो गर्व होना  चाहिए... 
शनाया – हंसते हुए गर्व होना चाहिए.. है ना गर्व मुझे, इस कैद में रह कर गर्व है मुझे, अपनी मर्जी की जिंदगी ना जी कर गर्व है मुझे,खुद से अपनी  जिंदगी का फैसला ना करके गर्व है मुझे...और ये लाकेट मेरी जान दुश्मन है... मैं जहां भी जाती हूं ये सब  रिकार्ड होता है । वो किसी भी पल मुझे सुन सकते है लेकिन मैं कभी भी नहीं  मैने कितनी सांसे ली है इसकी खबर भी उनके पास है... मेरी मां मेरे भाई सबसे मैं दूर रहती हूं हम आपस में कोई बात नहीं कर सकते...
अरनव – लेकिन क्यों
शनाया – हंसते हुए क्योंकि किसी को खबर  ना लगे हम कहां रहते है....
अरनव – शनाया देश के लिए ये सब करना पड़ता है
शनाया – हाहाहाहा,  देश के लिए सही बात है, देश के लिए अपना जीवन कैदियों की तरह जीयों
अरनव –अच्छा एक बात बता तू क़ॉलेज में ऐसे क्यों रहती है..
शनाया – क्योंकि मेरे पापा के मुताबिक मैं कौन हूं कहां से आती हूं ये सबकी खबर किसी को नहीं लगनी चाहिए...और मेरा मानना है कि मैं जैसी हूं वैसे  रहूं..
अरनव-अच्छा तभी उस दिन ब्लड डोनेशन कैंप में वो नर्स तुम्हे इतने अच्छे से जानती थी...
शनाया – हंसते हुए वो कोई नर्स नहीं थी सब आर्मी का स्टाफ था और ना  कोई ब्लड डोनेशन हो रहा था...
अरनव – हैरान  होकर पूछता है मतलब
शनाया- मतलब वो ब्लड ग्रुप  के सैंपल लिए गए है और डेटा collect  किया गया है जिससे यहां पर ज्यादा से ज्यादा लोगो की मैंपिंग हो सके...
अरनव – ओके इसलिए ये लोग तेरा पीछा कर रहे है
शनाया –हंसते हुए हां मेरे पापा को लगता है मैं उनकी नजरो से दूर भाग जाऊंगी, और मैं सच में एकदिन भाग जाऊंगी.... मैं अकेले जीना चाहती हूं...
अरनव –तुमने आर्मी क्यों नहीं join  किया
शनाया – हंसते हुए क्योंकि मेरे पापा को लगता है ये लडकियों के बस का काम नहीं
अरनव – और तुम्हारे भाई
शनाया-वो बहुत छोटे है, खैर छोड़ो अब तुम्हारे हर सवाल का जवाब मिल गया
अरनव –हां लेकिन तुम्हें नहीं लगता ये सब तुम्हें मुझे नहीं बताना चाहिए था..क्या पता मैं भी दुश्मन का आदमी निकलू ।
शनाया-तेज से हंसती है और बोलती है तुम्हें लगता है कि तुम अब तक जिंदा रहते...
अरनव, शनाया की आंखें देखे जा रहा था.... उसकी आंखों में कोई डर नहीं था,
अरनव – शनाया तेरे पापा जो कर रहे तेरे भले के लिए ही तो कर रहे
शनाया – हां  कैद में रख कर
अरनव – ये सब कब से चल रहा
शनाया -  6 साल से
अरनव – क्या, लेकिन क्यों
शनाया – नहीं पता मेरी आधी जिंदगी बोर्डिंग स्कूल और  अब यहां के हॉस्टल में गुजर रही है... परिवार क्या होता है मुझे नहीं पता, खुल कर जीना किसको कहते है मुझे नहीं पता... मुझे सिर्फ इतना पता है कि मेरी एक मां है जिससे मैं साल में एक बार मिलती हूं जिससे बात करने के लिए भी मुझे मेरे पापा की जरूरत पड़ती है....खैर लोगो को दूर से लगता है आर्मी वालो की जिंदगी कितनीwow  होती है.... लेकिन करीब से देखो तो समझ आता है पूरी जिंदगी बारूद के ढेर पर गुजर जाती है....
अरनव – शनाया I must say  तेरे पापा किसी बड़े ऑपरेशन का हिस्सा होंगे और वो तुझे बहुत प्यार करते है इसलिए वो ये सब कुछ तेरे साथ करते है... पता है मुझे तुम काफी अलग लगी थी लेकिन आज ये सब सुनकर मुझे यकीन  हो गया कि तू सच में सबसे अलग है..
शनाया हंसते हुए कहती है अरनव मैं सब समझती हूं लेकिन मैं अपनी जिंदगी अपने शर्तो के साथ जीना चाहती हूं... मुझे उनका प्यार उनकी केयर समझ में आता है लेकिन मेरा दम घुटता है इन सबसे ऐसा लगता है जैसे मैं वो सोने की चिडिया हूं जिसे उड़ने का कोई हक नहीं है.. पता है अरनव मैं अपना आसमान खुद बनाना चाहती हूं
अरनव,शनाया की बाते सुने जा रहा था....और शनाया अपनी धुन में बोले जा रही थी.. अचानक अरनव ने शनाया का हाथ पकड़ कर रोक दिया। शनाया अरनव को देखने लगती है और बोलती है क्या हुआ
अरनव – देख हम कितना आगे निकल आए है वापस नहीं जाना
शनाया –क्यों  तुम्हें यहां अच्छा नहीं लग रहा
अरनव –ऐसी बात नहीं है, सब हमें खोज रहे होंगे
शनाया – हंसते हुए, ठीक है फिर जाओ तुम
अरनव – क्यों तू नहीं जाएगी...
शनाया –नहीं अरनव बड़ा सुकून मिल रहा  मुझे.. अभी ना मुझे कोई ट्रैक कर रहा ना तो कोई सुन रहा और वो मेरे पापा का जासूस भी दूर से मुझ पर नजर रख रहा तो डर भी नहीं किसी का... मैं इस पल को जी भर के जीना चाहती हूं
अरनव – क्यों तुम्हारे पापा अभी तुम्हें नहीं सुन रहे होंगे
शनाया – हंसते हुए नहीं ये देखो मैने सब कुछ ऑफ करके रखा है और इतनी रात में उनके हिसाब से तो मै सो रही हूं बाकी कल देखेंगे जो भी होगा... हां तुम जाना चाहते हो तो जाओ लेकिन एक बात बोलू
अरनव – बोल
शनाया – मुझे तुम्हारे साथ काफी अच्छा लगा ऐसा लगा पहली बार कोई मुझे ऐसा मिला जिससे मैं खुल कर बाते कर सकती हूं वैसे एक बात बता
अरनव – बोलो
शनाया – तुम्हारी कोई गर्ल फ्रैंड नहीं है ?
अरनव एक दम से खामोश हो जाता है और गहरी सांस लेकर बोलता है नहीं
अरनव की जुंबा से नहीं सुनकर शनाया की आंखों में एक अलग ही चमक थी...
शनाया अपनी धुन में आगे बढ़े जा रही थी और बोले जा रही थी... तभी शनाया का पैर रास्ते में पड़े पत्थर से टकरा गया और वो नीचे गिर गयी ।
अरनव जब तक उसको सम्हालता वो गिर चुकी थी.. अरनव तेज से हंसने लगता है... बस यही बाकी था
शनाया – क्या मतलब
अरनव – सुबह से गिरने के लिए मरी जा रही थी फाइनली गिर ही गयी ।
शनाया – अच्छा बेटा, ये बात...
शनाया धीरे से अपना पैर अरनव के पैर पर मारती है और वो भी गिर जाता है
अरनव – अबे ये क्या मजाक है
शनाया – हंसते हुए क्यों गिर कर मजा नहीं आया
अरनव , शनाया की बाते सुनकर हंसने लगता है... और बोलता है रात के 12 बजने वाले है वापस चलेगी वैसे  मैं तुझे उठा नहीं पाऊंगा
शनाया – ओह हीरो बनने की जरूरत नहीं है  और ना भाव खाने की मैं खुद उठ सकती हूं ओके लेकिन कुछ भी हो मैं वापस आज नहीं जाऊंगी..
अरनव – पागल हो गयी है तू, क्या करेंगे इतनी रात में
शनाया – गधे हो तुम, अरे चाय पिएंगे मैगी खाएंगे.. और क्या करेंगे
अरनव  अपना सर पकड़ लेता है और बोलता है...अच्छा और बाकी लोगो का क्या
शनाया –हंसते हुए कहती है पीछे देख बाकी भी मजे करते  आ रहे है ।
अरनव पीछे पलट कर देखता है और हंसने लगता है,अच्छा अब उठेगी  यहां से या  फिर यहीं चाय मंगाऊ...
शनाया –उठाओगे, शनाया बोल कर अरनव की आखों में देखने लगती है...अरनव भी शनाया की आखों में खो जाता है..
अचानक शनाया, अरनव को तेज से मारती है और बोलती है उठोगे...
अरनव उठता है और शनाया को भी उठाता है.. लेकिन शनाया का पैर सीधा नहीं पड़ रहा था...उसके अंगूठे में अच्छा खासा चोट लग गया था.. वो धीरे धीरे पैर टीका कर चलने की कोशिश करने लगी...अरनव शनाया के पैर देखकर बोलता है कर लिया तूने अपना काम रूक अब
शनाया – क्या है, कोई ना मैं चल लूंगी
अरनव – हां दिख रहा, रूक यहां से पकड़ मुझे
शनाया , अरनव को देखने लगती है चुपचाप
अरनव – अरे पकड़ेगी, पकड़ यहां तेरे लिए अभी कोई नहीं आना
अरनव और शनाया की बकबक चल  ही रही थी कि काजल और उसके दोस्त वहां आ गए।
काजल – वाह क्या मजे किए है तुम लोगो ने
शनाया – मतलब
काजल – मतलब ये कि कब से तुम लोगो का हम सब वेट कर रहे है...इंतजार करते करते हमने सारी बीयर पी ली... मस्ती कर ली और तुम दोनो ना जाने कहां गायब
अरनव कुछ बोलने  ही जाता है उससे पहले शनाया बोल पड़ती है
शनाया – हां तो मैं तो पीती नहीं अच्छा किया पी लिया,
अरनव – तू सच में नहीं पीती
शनाया – नहीं क्यों, अरनव तुम पीते हो
अरनव – हां कभी कभी, पर मुझे लगा तुम पीती हो
शनाया – हंसते हुए हां पीयूंगी मैं एक दिन जब सब कुछ मेरे मुताबिक होगा
अरनव – हंसते हुए, मतलब
शनाया – मतलब कुछ नहीं चलो अब चले वापस मुझे मैगी खानी है
केतन – हां चलो मैने रिसार्ट के बाहर एक छोटी सी दुकान देखी है वहां काफी happening  है।
अरनव शनाया का हाथ अपने कंधे पर रखता है और चलने लगता है...
काजल, शनाया और अरनव की बढती हुयी नजदीकियों को बड़े प्यार से देखती है और आखों ही आखों में शनाया को इशारे करती है...शनाया का गोरा चेहरा धीरे धीरे लाल हो चुका होता है..वहीं अरनव इन सबसे बेखबर शनाया को बड़े ही ध्यान से लेकर चलता है... उसके मन में रूपल की यादे बार बार बाहर आ रही थी..वहीं शनाया का साथ उसके दिल को सुकून पहुंचा रहा था....धीरे धीरे शनाया और उसके दोस्त रिसार्ट के बाहर उस दुकान पर पहुंच जाते है... रात के 12 बज रहे थे लेकिन वहां का नजारा देख ऐसे लग रहा था जैसे अभी शाम के 6 बज रहे हो...अरनव , शनाया को बड़े ही केयर के साथ आराम से टेबल पर बैठाता है और केतन को मैगी और चाय का ऑर्डर देने के लिए बोलता है।  इधर काजल, शनाया के पास आती है और धीरे से उसके कान में बोलती है , बोला था ना शनाया तू तो गयी।
शनाया – शायद तू सही कह रही है पता मेरा दिल कर रहा कि मैं अरनव के साथ ही रहूं ये रात खत्म ही ना हो...बस यहीं कहीं किसी जगह पर हमेशा के लिए उसके साथ बस जाऊं ।
काजल –वो तो तेरी आखें बता रही है कि तुझे प्यार हो गया है ।
शनाया – हां काजल जिंदगी में पहली बार मेरी किसी ने इतनी केयर की है , मुझे उसकी आधी अधूरी बाते बेहद पंसद है, पता है जब उसके हाथ  मुझे सम्हालने के लिए उठते तो ऐसा लगता है शायद यहीं वो हाथ है जो मुझे मेरा आसमान बनाने में मदद करेगा...शनाया और काजल की खुसरफूसर चल ही रही थी कि वहां केतन और अरनव आ गये
अरनव – ले भाई तेरी मैगी
शनाया अपना हाथ आगे बढ़ा देती है
काजल ये देख हंसने लगती है और बोलती है अच्छा अरनव मेरे लिए भी तो ला सकते थे ना
अरनव –हंसते हुए मै तो इसके लिए भी नहीं लाता वो तो ये मैडम आसमान की सैर कर रही थी और इनके पैर जमीन पर गिर गए...
अरनव की बाते सुनकर सब हंसने लगे...शनाया अपनी मैगी दोनो हाथो से पकड़ कर बैठी थी
काजल- ओय तू खा क्यों नहीं रही
शनाया – दिख ना रहा इतना गर्म है ऊपर से यहां रखने के लिए कोई जगह भी नहीं है ..
अरनव खड़े हो कर अपनी मैगी जल्दी- जल्दी खाए जा रहा था...केतन उसके करीब आकर बोलता है
केतन –भाई क्या मामला है
अरनव – मतलब
केतन –मतलब तुझे देख मैं खुश हूं फाइनली तू रूपल से आगे बढ़ रहा है।
अरनव- सीरियस होकर बोलता है तू गलत समझ रहा है।
केतन – ना  भाई लड़की तेरे लिए सही है या यूं कह लूं तू पहला है जिसके साथ मैने इसे इतना शांत देखा है ।
अरनव ,हंसने लगता है और बोलता है, ऐसा कुछ नहीं है वो बहुत अच्छी है और हां मेरी उसकी अच्छी दोस्ती हो गयी है ।
केतन – लेकिन शनाया को देख तो लगता है  उसको तुझसे प्यार हो गया है ।
अरनव –मजाक मत कर ।
केतन ठीक है तो देख ले ।
अरनव – क्या
केतन – उसको देख तू ध्यान से
अरनव – हंसते हुए देख रहा हूं वो बाकी लड़कियों जैसी नहीं है , ऊपर से सख्त और अंदर से मासूम सी लड़की है... जिसकी सिर्फ एक चाहत है, अपना आसमान खुद बनाना है...और आजाद होकर उड़ना है
केतन – मानना पड़ेगा
अरनव – क्या
केतन – इतनी सी देर में तुम दोनो एक दूसरे को कितना जान गये हो ना ।
अरनव,केतन की शक्ल देखता है और बिना जवाब दिए शनाया के पास जाता है और बोलता है
अरनव – आज ही खत्म करना है कब तक हाथ में लेकर बैठी रहेगी ।
शनाया – पता है, खा रही हूं
शनाया, अरनव की बाते सुनकर मैगी खाने लगती है.. और जल्दी जल्दी में मैगी के लच्छे कभी उसके टॉप पर गिर जाते तो कभी होठो के नीचे चिपक जाते....ये सारी हरकते बगल में बैठा कपल बड़े ध्यान से देख रहा था और हंसे जा रहा था... अरनव की नजर जैसे ही उन पर पड़ी वो शनाया और उनके बीच में आकर खड़ हो गया...और धीरे से शनाया से कहने लगा
अरनव – सुन ना ।
शनाया – मैगी खाते हुए, हां बोलो।
अरनव, इशारे से कभी शनाया के टॉप की तरफ इशारा करता तो कभी उसके होठो की तरफ इशारा करता..।
शनाया उसके इशारे देख हैरान हो जाती है और सोचने लगती है क्या हो गया इसे अचानक ऐसा लड़का तो ये नहीं है ।
शनाया फिर से इशारे में पूछती है क्या है, अरनव फिर से उसकी टॉप की तरफ इशारा करता है शनाया परेशान होकर उठने लगती है तो अरनव उसके एक दम करीब आ जाता है.. जैसे वो कुछ भी करे तो सामने से किसी को ना दिखाई दे...
शनाया, अरनव की हरकतो को समझ ही ना पा रही थी... अरनव उसके और पास आता है और अपना हाथ उसके टॉप की तरफ बढ़ाता है.... शनाया एक दम से गुस्से में आने लगती है लेकिन अरनव की नजरो से टकराते ही वो शांत हो जाती है और उसकी आंखों में देखने लगती है अरनव अपने हाथो को धीरे से उसके टॉप के पास ले जाता है और मैगी का लच्छा उठा कर गिरा देता है फिर आखों ही आखों में उसके होठो की तरफ इशारा करता है, शनाया आखों ही आखों में पूछती है क्या हुआ.. अरनव बिना कुछ बोले धीरे से अपना हाथ ले जाता है और उसके होठो के नीचे  चिपके हुए मैगी के लच्छे को हटाता है और उसका हाथ आगे करके उस पर रख देता है... शनाया जब तक कुछ समझ पाती अरनव उससे थोडा दूर हो जाता है।
 ये सारी हरकते केतन बड़े ध्यान से देखता है....मन ही मन बोलता है... भगवान करे शनाया और अरनव हमेशा के लिए एकहो जाए... ऐसी chemistry  तो मैने अरनव की रूपल के साथ भी नहीं देखी थी.. कितने मासूम से लगते है दोनो एक साथ... कहने के लिए दोनो अलग अलग है बस कुछ दिन हुए मिले लेकिन इनके बीच की अनकही बातो को देख ऐसा लगता है जैसे कितना पुराना रिश्ता है इनका जो बिना कुछ कहे सब कुछ समझ लेता है...
काजल , केतन के हाथ पर मारकर बोलती है, क्या देख रहे हो
केतन – वहीं जो तू पहले देख रही थी जो मुझे अब दिखना शुरु हुआ है...
काजल ,गहरी सांस लेते हुए हां यार ये दोनो एक साथ बड़े अच्छे लगते...
To be continued  


9 comments:

Rahila said...

Wow,very interesting

tulika singh said...

Tx darling 😘

Unknown said...

Wow amazing story

tulika singh said...

Thank you 😊

Unknown said...

Amazing amazing ❣️

गरिमा त्रिवेदी said...

आपकी कहानियाँ हर व्यक्तित्व को बेहद संजीदगी के साथ पेश करती हैं। बहुत खूब दी। keep it up.

tulika singh said...

Tx dear

tulika singh said...

Tx garima 😘

Tripti said...

Loved the turn.... eagerly waiting for the next episode