Monday, 20 April 2020

Adhuri kahani(part2)- episode 5


NEXT DAY
कल अरनव की हरकत देखकर केतन आज कुछ ज्यादा ही मजे के मूड में अरनव को छेड़ रहा था
केतन – भाई तू तो गयो
अपनी कितावों को समटेते हुए अरनव केतन की तरफ देखता है और बड़े ही बेरूखी सी आवाज में बोलता है
अरनव – क्यों क्या हो गया
केतन अरनव के ऐसे जवाब सुनकर थोड़ा सा रूक गया और बड़े ही अनमने से अपना सर हिला कर  मना कर देता है
अरनव- अब बकेगा क्या चल रहा तेरे दिमाग में
केतन – पक्का बोल दूं  नाराज तो नहीं होगा
अरनव – नहीं बोल
केतन – तेरा इंटरेस्ट उस शनाया में है ना
अरनव केतन की शक्ल देखकर बोलता है तुझे लगता है एक बार धोखा खाने के बाद मेरा दुनिया की किसी भी लड़की में कोई भी इंटरेस्ट होगा
केतन अरनव के बदलते चेहरे  को पढ़े जा रहा था और पास आकर बोलता है
केतन – गलती हो गयी भाई मुझे लगा तू अब तक रूपल को भूल चुका होगा
अरनव- तूने सही समझा है मैं उसको भूल चुका हूं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कहीं और फिर से फंस जाऊं
केतन – हा सहीं है लेकिन शनाया तुझे पंसद तो है
अरनव – नहीं ऐसा कुछ नहीं है ...हां वो अच्छी लड़की है समझदार है बकवास ज्यादा करती है लेकिन बहुत कुछ है उसके बारे में जो यहां कोई नहीं जानता
केतन अरनव की बाते सुने जा रहा था और मन ही मन बोले जा रहा था पसंद नहीं है लेकिन पता इतना कुछ है वाह
केतन अरनव को बीच में ही रोक कर बोलता है मेरे दिमाग में एक बात थी कहो तो बोलूं
अरनव – बोल
केतन – यहां  नहीं चल बाहर चलते है
अरनव – अबे अभी क्लास है इसलिए यहीं रूक या फिर तू चला जा मुझे पढ़ना है
केतन – अरे नहीं चल ठीक है यहीं रहते है
अरनव – अब बोल क्या कह रहा था
केतन – क्यों ना हम सब मसूरी चले
अरनव केतन की शक्ल देखता है और बोलता है पगला गए हो तुम
केतन – अब इसमें क्या पागलपन है सोच एक साथ कई फायदे होंगे
अरनव – कैसा फायदा तू भूल गया पेपर है अगले महिने
केतन – तभी तो कह रहा चल घूम आते है फिर तो सब कहां होंगे कोई नहीं जानता
अरनव – साले सेंटी मार रहा है वैसे फायदा क्या है और कौन कौन जा रहा है
केतन- अरे बस कुछ खास लोग
अरनव – मतलब
केतन – मतलब मेरी जीएफ, अनय और उसकी जीएफ.
अरनव बीच में ही बोल पड़ता है साले मुझे चौकीदारी करने ले जा रहा लड़कियों का क्या काम और जाना है तो सब चले
केतन – मुझे कोई प्रॉबल्म नहीं है... मैं कह रहा था कि जब सब जा ही रहे है तो उनलोगो को भी बोल देते है
अरनव – किन लोगो को
केतन – काजल और शनाया को
अरनव – तो ये बात है तुझे काजल केसाथ टाइमपास करना है
केतन – अरे नहीं तेरी दोस्त भी तो बन गयी है शनाया
अरनव – मेरी दोस्त कब
केतन – कल सुबह जब दोनो एक साथ रिक्शे पर आ रहे थे
अरनव – (बड़े ही आश्चर्य से) तुने कब देखा
केतन – तभी जब शनाया तेरे रिक्शे से पहले ही उतर गयी मैने कुछ नहीं बोला की तुम लोग की अपनी बात होगी
अरनव – अरे नहीं वो कल तो हम दोनो ... अचानक अरनव रूक गया
केतन – क्या हम दोनो आगे भी तो बोल
अरनव – हम दोनो चाय पीने गये थे
केतन – वाह तू तो ब्लड डोनेट करने बोल कर गया था मुझे
अरनव- हां तो रास्तें में वो मुझे मिल गयी वैसे तू इतनी  बकवास क्यों कर रहा है
केतन – इसलिए कि जब इतना जानते हो तो बोलो ना उन दोनो को भी मेरा भी काम हो जाएगा और तुझे भी मौका  मिल जायेगाशनाया को समझने का
अरनव केतन की बाते ध्यान से सुन रहा था और  कल के सवाल उसके ज़हन में अब भी घूम रहे थे उसने मन  ही मन सोचा वैसे साथ जा सकते है जानने का मौका मिलेगा...
अरनव – केतन सुन
केतन – हा बोल
अरनव – तुझे ले जाना तो तू बोल उन दोनो से मुझे कोई प्रॉबल्म नहीं है पर मैं नहीं बोलूंगा
केतन –साले हमेशा अकड़ में रहते है कोई ना मैं बोलूंग बस ये शनाया चिल्लाने ना लगे
अरनव हंसते हुए – तू उससे इतना डरता क्यों है खैर चल अब खत्म कर क्लास होने वाली है ...

इधर शनाया  कॉलेज खत्म करके सीधा अपने रूम पर चली जाती है काजल के ना होने से मैडम का मूड काफी ऑफ रहता है
शनाया काजल को फोन लगाती है
शनाया – हैलो काजल जिंदा हो
काजल- हां अभी नहीं मरी
शनाया – तो मर जाओ
काजल-ओके मरती हूं पहले बता तो दे  काहें मूड ऑफ है
शनाया- अबे हमारा दिमाग काम ना कर  रहा है
काजल – क्या हुआ
शनाया-तुम आओगी कब
काजल – कल
शनाया – फिर ठीक है
काजल –हुआ क्या
शनाया – यार मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ
काजल – क्या नहीं हुआ
शनाया – मतलब आज तक मैने काफी लड़कों से हाथ मिलाया उनके पीठ पर ठोका बाते की लेकिन साला लाइफ में पहली बार बड़ा लोचा फील हो रहा
काजल – मतलब
शनाया – अबे किसी के हाथ टच हो जाने भर से मुझे पसीना आ रहा..किसी की बाते  मेंरे जहन में घूम रही है
काजल –अबे किसकी
शनाया – अरे वो अरनव बेदी केतन का दोस्त
काजल अरनव का नाम सुनकर तेजी से हंसने लगती है
शनाया – हंस मत आज तो बड़ा कांड हुआ
काजल –क्या
शनाया – वो भी ब्लड देने कैंप गया था
काजल –ओह फिर उसे पता तो नहीं चला
शनाया- नहीं मैने वहां पर ऐसी कोई बात नहीं की और ना कुछ कहा
काजल – अच्छा किया लेकिन तू कब तक सबसे ये बात छिपाती रहेगी आज नही तो कल सबको पता चल ही जाना है
शनाया- तू उसकी फिक्र छोड़ दे मैं ऐसा कुछ करूंगी ही नहीं कि किसी को पता चले
काजल- देख ले शनाया ऐसी बाते छिपती नहीं और इसमें कोई बुराई नहीं
शनाया – काजल मैं अपने आप को खोजने आयी हूं यहां ना कि बंधने सो यही सही है
काजल- खैर तो तुझे  अरनव की वजह से पसीने आ रहे है
शनाया – हां यार
काजल – प्यार तो नहीं हो गया 
शनाया – तुझे लगता है
काजल- हो भी सकता है
शनाया – कभी नहीं
काजल – अगर हुआ तो तू सबके सामने उसको प्रपोज करेगी
शनाया – वाह बेटा मुझे खबर ही नहीं और मैं प्रपोज करूंगी सपने देखो तुम
काजल – खैर चल वो तो वक्त बताएगा फिलहाल मैं रखती हूं और कल मिलते है वैसे मेरी बात को सोचना जरूर
शनाया अपनी बालकनी से बैठकर चांद को देखे जा रही थी... पूरनमासी का चांद अपने पूरे शबाब पर था.. मसूरी की पहाड़ियों पर ऐसा लग रहा था जैसे बिजली वाले झालर किसी ने लटका दिए हो...शनाया का मन इनको देख खुश होता तो कभी काजल की बाते उसके दिमाग में चलने लगती...तभी फोन पर एक unknown नंबर से रिंग आती है शनाया बड़ा सोचते हुए फोन पिक करती है
शनाया- हैलो
उधर से एक नशीली सी भारी सी आवाज आती है तुम शनाया बोल रही हो
शनाया – जी आप कौन
अजनवी – तुम मेरी आवाज भूल गयी मैने तो सुना था शनाया किसी को नहीं भूलती
शनाया उसके नशीली आवाज को सुनकर मुग्ध हुए जा रही थी लेकिन खुद को  सम्हालते हुए बेहद ही कडी आवाज में बोलती है
शनाया –हां मैं नहीं भूलती लेकिन जिनसे मेरा मिलना जुलना हो जो मेरे दोस्तो हो और मुझे नहीं लगता कि हमने और आपने कभी बाते भी की हो मिलना तो दूर वैसे मेरा नंबर आपको किसने दिया कौन है आप  बताएंगे या फिर मैं दूसरी तरह से निपटू
अजनबी – अरे तुम नाराज मत हो वैसे सुना है तुमसे पूरा क़ॉलेज डरता है  
शनाया – हां और पहले ये बताओ हो कौन तुम वर्ना मैं फोन काट रही हूं
अजनवी – शनाया मैं अरनव बोल रहा हूं.....
शनाया अरनव का नाम सुनते ही एक दम से चुप हो जाती है उसके हाथ पैर ठंडे होने लगते है आवाज चाहकर भी बाहर ना निकल रही थी शनाया की, खुद को सम्हालते हुए बड़ी ही मुश्किल से शनाया से बोलती है

शनाया- अरनववववववववववव, क्या हुआ सब ठीक तो है मेरा नंबर कहां से मिला, 
ओके कोई नहीं, 
तुम कहीं फंस गए हो मेरी कोई मदद चाहिए...
 तुम्हे पहले बताना था कि तुम अरनव बोल रहे हो शनाया बोले जा रही थी और दूसरी तरफ अरनव खामोशी से शनाया की घबराहट और केयर को आराम से पढ़े जा रहा था
अरनव – अरे नहीं मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी
शनाया- हां बोलो
अरनव का दिल करता है, आज शनाया को अपने बारे में सब कुछ बता दे शराब के नशे में उसका कंट्रोल उसके ही ऊपर से कम होता जा रहा था लेकिन खुद को तेजी से सम्हालता है और बोलता है

अरनव – सुबह तुमने क्यों बोला ब्लड डोनेशन की बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए तुम पहले ही क्यों उतर गयी, मुझे पता है मुझे ये सब नहीं पूछना चाहिए लेकिन फिर सोचा शायद तुम बता दोगी
शनाया  बड़े ही आराम से अरनव को जवाब देती है
शनाया – बस इतनी सी बात के लिए तुमने मुझे फोन किया है नंबर किसने दिया मेरा
अरनव – केतन ने किसी से मांग कर दिया
शनाया – ओके और कोई बात थी
अरनव – हां
शनाया – क्या
अरनव – क्या तुम हमें अपना दोस्त मानती हो
शनाया का मन घबराने लगा था अब खुद को सम्हालते हुए  शनाया कहती है हां तुमको अपना दोस्त मानती हूं
अरनव – हस सब एक दिन बाद मंसूरी जा रहे कैंप करने चलोगी
शनाया ये सुनकर चुप हो  जाती है
अरनव –बोलो शनाया
शनाया – मैं कल तक बताऊं
अरनव – ओके
शनाया – ये नंबर तुम्हारा है सेव कर लू
अरनव – हां कर सकती हो
शनाया अरनव का फोन रखते ही गहरी सांस लेती है और बड़बड़ करती है सब बाते करनी है लेकिन अकड़ देखो हां कर सकती हो ना मालूम कहां के स्पेशल परसन है ये अरनव सरररररररररर
TO BE CONTINUED   

6 comments:

Unknown said...

Wow.

tulika singh said...

Tx dear🥰

Tripti said...

Bahut khoob likha....maja aa raha... utsukta badti jaa rahi 👍👏👏👏

tulika singh said...

Tx dear 🥰

Sweety said...

Wowww

tulika singh said...

Tx dear💖