Wednesday, 23 July 2014

धन्यावाद मां

पलको के पीछे अपने सपनो को छिपाए दुनिया में मैने कदम रखा...... आपकी आंखो से मैने सारा जहां देखा..... खुद चलने कि जिद में आपको अपने पीछे देखा..... ठोकर लगी तो आपका प्यार भरा अहसास देखा.... कभी गुरू तो कभी सबसे अच्छे दोस्त... की तरह आपको अपने करीब देखा ..... जिंदगी का हर फलसफ़ा मैने आपसे सीखा.... आभारी हूं मैं आपकी... आपने मुझे मेरे सपनो के काबील बनाया.... मेरे वजूद को एक पहचान दिया..... तूलिका नाम में छिपे मकसद..... को आपने पूरा किया......

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