Thursday, 14 August 2014

wo yaade aur tum

याद आता है मुझे अपना बचपन........... पापा की गोद में खेलना........... मम्मी को अपने पीछे पीछे भगाना.......... कभी  रूठना तो कभी मनाना.......... प्यार दुलार मार सब का स्वाद चखना...... याद आता है वो कठीन पल........ वो चुनौतियां और मेरी अठखेलिया........ वक्त की करवट ने बदला था जीने का नजरिया........ वक्त के थपेड़े में परिवार का साथ........ वो हौसला साहस और अपनो का विश्वास..... जवानी की दहलीज पर अंगड़ाई लेता बचपन...... अपने पूरे होने की गवाही देता बचपन....... कभी जिंदगी का लक्ष्य......... तो कभी अंगारों में लिपटा वक्त....... औऱ सबसे खास बात......... प्यार के झोंके से लहलहाता मेरा मन...... हर दिन एक नया संघर्ष...... प्यार के दो बोल के लिए तरसता मेरा मन.... ख्वाबों की दुनिया में जीने लगा मेरा मन..... लेकिन जब हुआ हकिकत से मेरा सामना...... तो बदला हुआ था नजारा.... खूबसुरत शीशमहल काटों की झाड़ियों मे था उलझा हुआ........ वक्त बदला हालात बदले लेकिन अधूरे ख्वाब..... यू हीं जहन में अपनी नींव मजबूत करते रहे.... सच जानते हुए भी सच से आंखे चुराना...... वो मीठी मीठी लेकिन काल्पनिक यादे... पल भर के लिए बदल देती थी मेरी विरान दुनिया का रंग एक दिन ऐसा आया..... जब सच में किसी ने मेरा नाम पूकारा... जब सच में किसी ने मेरे दिल पर दस्तक दी.. जिसे मैने नहीं भगवान ने चुना था मेरे लिए.... अपनी छोठी छोटी बातों से मेरे करीब आता गया वो धीरे धीरे मुझमें समाता गया....... जिसने मेरे अरमानो को हवा दी....... जिसने मेरी जिंदगी बदल कर रख दी........ आज उसी की दुनिया सजाने जा रही हूं.... कांपते कदमों से एक नये विश्वास को जगा रही हूं.. पूरे होंगे मेरे वो हर ख्वाब...... जिनको देखा है मैने बचपन से.. आज उस मंजिल की तरफ अपने कदम बढ़ा रही हूं..

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