दिल
में ख़्याल आया आज कुछ ना लिखूँ......
अपने
ज़ज्बातों को लब्ज़ों में बयाँ ना करूँ...
ये
लब्ज़ दिल के हर राज़ को बयाँ कर देते हैं.....
जज़्बातों
को और हवा देते
हैं
.....
मेरे
लब्ज़ों के सुर को कोई अपना समझ नम आँखों से मुस्कुरा लेता हैं ......
मेरे
अल्फाज़ किसी का दर्द बढ़ा देते हैं.....
तो
किसी को यूँ ही हँसने की वजह देते है........
सुरों
के भँवर में ख़ुद के अल्फाज़ों को तलाशती हूँ.....
तो
किसी की तंज कसती निगाहें उस पर हँसती रहती हैं.....
तो
कहीं ख़ामोश समन्दर अपने लहरों के संग उसे अपना बनाना चाहता है......
दिल
की गहराइयों में गोते लगाना मेरी फ़ितरत है.....
इस
बात को जान कोई यूँ ही नज़रें चुरा लेता है....
कर
ली कोशिशें हज़ार तूलिका ने.....
कि
आज वो कुछ ना लिखेगी.....
लेकिन
भूल गयी वो....
तूलिका
तो
बनी
ही है लब्ज़ों में ज़ज्बातों के रंग भरने के लिए......
1 comment:
Khub
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