Saturday, 4 March 2017

MAYA THE UNFOLD LOVE STORY ,Chapter- 12

2  साल बाद .............. 

 फरवरी की गुनगुनी धूप  औऱ हल्की गुलाबी ठंड में इलाहाबाद की सुबह देखते ही बन रही थी...संगम के किनारे लगा माघ मेला अपने चरम पर था...मंगल वार का दिन.... हनुमान मंदिर में भीड़ एक दम खचाखच... पैर रखने तक की जगह नहीं थी....जय श्री राम जय हनुमान के उद्घोष से पूरा मंदिर गूंज रहा था.......हनुमान चालिसा को
तेजी तेजी बोलते हुए माया परिक्रमा लगा रही थी... जैसे ही हनुमान चालिसा खत्म हुई माया भीड़ के अंदर घुस गई... उसको बस किसी तरह हनुमान जी के पास जाना था.....सारे जुगाड़ करते हुए माया हनुमान जी के सामने थी.....हाथ जोड़ा अपनी नज़रे हनुमान जी से मिलाई और शुरु हो गई... राजधानी की रफ्तार से....

  Tx a ton  हनुमान जी मेरी हर विश पूरी करने के लिए... आज मैं बहुत बहुत खुश हूं... मुझे मेरी मंजिल मिल गयी है...ये सब आपके साथ की वजह से हुआ है ... प्लीज प्लीज आप मेरा साथ कभी मत छोडियेगा......माया ने प्रसाद चढ़ाया और सर झुका कर हनुमान जी को प्रणाम करने लगी.. बगल में खड़ी एक औरत उसकी बातों को ध्यान से सुने जा रही थी...और पीछे खड़ी औरते... माया पर गुस्सा किए
जा रही थी.... जल्दी बाहर निकलो लड़की हमें भी पूजा करनी है.... एक औरत तेज से गुस्सा करते हुए बोली... माया ने जैसे ही सुना बस हां जी हां जी करते हुए बाहर निकल आयी ....और एक गहरी सांस ली.... 

पिछले दो साल से माया का ये फिक्स काम था... उसको हनुमान जी से आकर हर बात शेयर करनी थी.... माया ने  cat का exam  दिया था... लेकिन उसे बैंगलोर IIM  में  admission  नहीं मिला था....लेकिन माया ने बैंगलोर के एक प्राइवेट कॉलेज में एडमीशन ले लिया था...घर की हालत इतनी अच्छी नहीं थी की अपनी फीस भर सके पर हनुमान जी की कृपा से माया को एजुकेशन लोन मिल गया था....अब माया और माया के सपने के बीच कोई नहीं था... माया अपनी पढ़ाई खत्म कर जॉब करना चाहती थी......माया के दिमाग में ढेर  सारी बाते चल रही थी... अपनी राम प्यारी पर बैठ कर कॉलेज के लिए निकल गयी....

कॉलेज में  अब पहले जैसा कुछ भी नहीं था... ना तो माया तफरी करती थी ... ना ही उसके दोस्तों का जमावड़ा था....ना ही फोटोस्टेट की दुकान पर पहले जैसी रौनक थी.... पिछले दो साल में सब कुछ बदल चुका था....माया साइकिल से उतरते ही फोटोस्टेट शॉप के बाहर एक पल के लिए रूकती है .... उसके जहन में राहुल के साथ बिताए हुए पल सिनेमा के रील की तरह चल रहे थे.. गहरी सांस लेकर माया कॉलेज की तरफ बढ़ गयी ... माया सीधे कैंटीन की तरफ चली गयी... अब पीहूं रोज माया का इंतजार वहीं करती थी....
माया- हाय पीहूं तुम कब आयी
पीहूं – जब तुम नहीं आयी थी....
माया- हंसने लगी
पीहूं – मेरा प्रसाद कहां है
माया- लाई हूं
पीहूं – और आज हनुमान जी से क्या मांगा...
माया – बस इतना कि मुझे जल्दी से जल्दी  बैंगलोर भेज दे
पीहूं... माया के मुंह से बैंगलोर का नाम सुनते ही उदास हो जाती थी...
पीहूं- तू मुझे छोड़कर चली जाएगी....
माया- कहां तू भी चल मेरे साथ
पीहूं – कहां यार फाइनल इयर के बाद मेरी शादी हो जाएगी...
माया- तो तुझे तो खुश होना चाहिए आखिर प्रदीप के साथ तेरी शादी हो रही है... यही तो तू चाहती थी..
पीहूं- नहीं मैं तुझे भी चाहती थी..
माया- ओय किसी ने सुन लिया तो हमें ना जाने क्या समझेंगे माया कह कर हंसे जा रही थी..
पीहूं ने माया का हाथ पकड़ा और emotional हो गई....यार सब कुछ कितना बदल गया है ना..
माया- कुछ भी नहीं बदला तू मेरे साथ है... राहुल का प्यार मेरे साथ है... हां बस ये कॉलेज के दिन कुछ ही रह गए है... यहां हमने ज़िदगी के सारे रंग देखे.. मां जैसी टीचर मिली... हमें... इतने अच्छे दोस्त मिले हमें...मेरा पहला प्यार मिला मुझे....और क्या चाहिए...यहां बिताएं एक एक पल मेरे दिल में बस गए है... जिंदगी के सबसे  golden days  है ये पता है क्यों
पीहूं- क्यों

माया- क्योंकी यहां तुम मुझे मिली बचपन से दोस्त की तलाश में भटक रही थी मैं.... कोई मेरा दोस्त नहीं था... जिससे मैं सब कुछ शेयर करती लेकिन भगवान ने मुझे यहां सब कुछ दे दिया.....मैं इन सबको ताउम्र सम्हाल कर रखूंगी...पीहूं ने बीच में ही माया को रोक दिया... औऱ पूछने लगी 
पीहूं- क्या बात है आज तू क्लास नहीं जा रही...
माया- आज राहुल का birthday  है....
पीहूं- तूने उसको  wish  किया....
माया- हां यार मैं कैसे भूल सकती हूं.... मुझे बस इंतजार है... उस पल का जब मैं बैंगलोर पहुंच जाउंगी...
पीहूं- माया उसने तुझसे बोला है क्या कि वो मिलने आएगा..
माया- सीधा सीधा तो हां नहीं बोला है लेकिन वो जरूर मिलेगा मुझे..
पीहूं- तूने इन दो सालों मे उसको ना जाने कितनी बार latter  लिखा.. फोन किया कभी उसने तुझे  फोन किया...
माया- हंसते हुए... हां किया था उसने कुल जमा तीन बार फोन किया है उसने मुझे...
पीहूं- औऱ latter
 माया – तेज से हंसते हुए क्या पीहूं तू भी.. मजाक कर रही है... राहुल जॉब करता है उसके पास इतना वक्त नहीं की वो बैठकर मुझे  latter  लिखे...वो पढ़ता है इसका यकीन है मुझे...  मैं हूं ऐसी की कोई मुझसे नफरत कर सकता है या मुझसे प्यार कर सकता है...ignore  तो कभी कर ही नहीं सकता... वैसे भी मैं राहुल को कॉल कर लेत हूं ना मेरा जब दिल करता है मैं बात कर लेती हूं... वो करें ना करें क्या फर्क पड़ता है.... वो मेरा प्यार है मैं उसका हूं की नहीं अभी तक तो यहीं नहीं पता....
पीहूं- तेरी यही अदा तो सब पर भारी है...
माया- तुझे राहुल को  wish  करना है...
पीहूं- हां चल फोन करके उसको आते है...
माया- हां चल ना वैसे भी मेरी सुबह से बात नहीं हुई...
पीहूं -  लास्ट तेरी कब बात हुई थी..
माया- दो हफ्ते पहले उसके  बाद से मैं sms करती हूं वो पढ़ता है और कोई Reply नहीं करता है.....
पीहूं –  आज फिर तूने उसको सिर्फ SMS किया है.... तू कैसी है माया तुझे गुस्सा नहीं आता उसके ऊपर
माया- नहीं पीहूं  मुझे सिर्फ उस दिन का इंतजार है जब मैं उसके काबिल बन जाउंगी... फिर मैं ये सब सोचूंगी.... वैसे भी उसको देखे बिना दो साल हो गए है.... HOPE FULLY  अब वो थोड़ा मोटा हो गया होगा...
पीहूं- हंसते हुए हां यार उसके सामने तो मैं भी मोटी थी
माया- अरे वो ऐसा नहीं होता....... उस लड़की ने अगर उसको धोखा नहीं दिया होता.. शायद इसिलिए राहुल इतना वक्त ले रहा है....नहीं तो अब तक वो मुझे हां या नहीं तो बोल ही देता...चल फिर चलते है उसको फोन करने
पीहूं- हां चल ना...
माया औऱ पीहूं दोनो फोटोस्टेट की शॉप पर आ जाते है... माया राहुल को फोन लगाती है ...
माया- हैलो
राहुल – हैलो जी आप कौन
माया- अब यही बाकी रह गया था सुनने के लिए आप कौन... माया गुस्से में हंस कर बोलती है ...
राहुल – ओह जी मैम आप कैसी है
माया- राहुललललललललल .... सुधर जाओ मैम ही बोलना है और आप बोलना है तो मैं फोन रख देती हूं..
राहुल – अरे नहीं नहीं तू गुस्सा मत कर मैं तो मजाक कर रहा था... कैसी हो तुम
माया- HAPPY BDAY RAHUL GOD BLESS YOU  वैसे तो मैने तुम्हें SMS किया था लेकिन तुम तो ठहरे अकड़ू खुड़ुस गधे... एक REPLY  कर देते तो... तुम्हारे दिल में दर्द हो जाता है ना
राहुल – अरे नहीं मैं तुझे आज पक्का फोन करता.... मेरे दोस्तों ने मुझे घेर कर रखा था....  मुझे तेरा गाजर का हलवा याद आ रहा था ... मैं अभी वहीं खा रहा हूं... तू मुझसे नाराज तो नहीं है ना ...
माया-  ITS ok  राहुल ये लो पीहूं से भी बात कर लो
माया ने पीहूं को फोन पकड़ा दिया और अलग खड़ी हो गयी
पीहूं – हाय राहुल happy bday yar
 राहुल – thanks  जी कैसी है आप
पीहूं- बस आपकी दुआ है...
राहुल हंसते हुए......अच्छा है औऱ बता माया कैसी है
पीहूं- राहुल तुम उससे बात नहीं करते हो औऱ मुझसे उसके बारे में पूछते हो... ये क्या मतलब है...
राहुल – पीहूं मैं उसको परेशान नहीं करना चाहता मैं चाहता हूं उसका फोकस अपनी पढ़ाई पर हो...बस इसलिए मैं उससे ज्यादा बात नहीं करता ..

पीहूं- राहुल वो पागल हो गयी है उसके दिमाग पर सिर्फ एक जुनून है... वो  तुम्हारे बराबर में आना चाहती है उसके दिमाग  में सिर्फ एक बात है कि वो अगर success हो गयी तो तुम उसको जरूर प्रपोज करोगे.... वो तुमसे बेइंतहा प्यार करती है... मैने ऐसा प्यार करने वाला देखा नहीं जो अपने एक तरफेा प्यार के लिए पागलों की तरह मेहनत कर रही है....
राहुल को बोलते बोलते पीहूं का गला रूंध गया था. उसकी आवाज में माया की तकलीफ झलक रही थी...
राहुल – चल पीहूं मैं रखता हूं......अपना ध्यान रखना.... और हां माया का भी....बाय
माया और पीहूं फोटोस्टेट की शॉप से बाहर निकल आए...
पीहूं- माया तू एक बात बता.....
माया – पूछ
पीहूं- तुम बैंगलोर कब जा  रही हो..
माया- बस यार  वहां का सेशन शुरु होगा.. जुलाई से तो उसके पहले....
पीहूं- मतलब तू मेरे साथ सिर्फ  दो तीन महीने के लिए है उसमें भी कॉलेज बंद हो जाएगा... फिर हम रोज नहीं मिल पाएगें...
माया – तू ऐसा क्यों सोच रही है... यार तू है तो मैं हूं हम हमेशा एक दूसरे के साथ रहेंगे..
पीहूं- नहीं यार मैं चाहती हूं तुम अपने प्यार से मिलों अपनी मंजिल तक पहुंचों मुझे भी तुम्हें एक बात बतानी है...
माया- बता ना
पीहूं- मैं exam के बाद मुंबई जा रही हूं....अपने मासी के पास तो जब तू बैंगलोर जाएगी मैं शायद यहां ना रहूं...
माया पीहूं की बात सुनकर उदास हो गयी और कहने लगी मतलब मेरे तेरे पास सिर्फ एक महीना बचा है... जिसमें हम सिर्फ कुछ दिन मिल पाएंगे....माया कहते कहते उदास हो गयी और पीहूं के गले लग गई....
पीहूं – माया तुम टेंशन मत लो हम एक दूसरे से हर रोज बात करेंगे... तुम्हें मैं कभी नहीं भूलूंगी.... प्रदीप तुमसे मेरी रोज बात कराएगा...
माया- क्या किस्मत है मेरी कुछ वक्त पहले तक मेरे पास सब कुछ था... प्यार दोस्ती मस्ती.... लेकिन धीरे धीरे मैं अकेले होती जा रही हूं... पता नहीं वहां लोग कैसे मिलेंगे.. मुझे राहुल से प्यार है लेकिन उसके ऊपर भरोसा नहीं है...पता नहीं वो मुझसे मिलेगा भी की नहीं.... पता नहीं वो कहां रहता है.. मैं कहां रहूंगी... माया पीहूं के गले लग कर आसूं बहाए जा रही थी... इस एक पल में उसको लग रहा था कि... अपने जुनून में उसका सब कुछ पीछे छूट जाएगा...

To be continued

2 comments:

Ek sapna said...

Very interesting...superb written..waiting for next

Ocean said...

Kuch milne ki chah mei... kuch chhoot bhi raha tha...
Btw...nicely written👌