Sunday, 5 March 2017

Maya "The Unfold Love Story" Chapter – 13


Finally वो दिन आने ही वाला था जब माया राहुल से मिलने वाली थी....बस 2 दिन और माया राहुल के सामने होगी... माया की मंजिल पुरानी थी लेकिन रास्ते एक दम नए थे.... अभी तक माया के साथ पीहूं थी उसके मां पापा थे भाई थे... लेकिन अब यहां से आगे का सफर माया को अकेले तय करना था.. अपने मां पापा
समाज और सबसे ज्यादा जरूरी अपने प्यार के सामने माया को साबित करना था. माया.... अपने बैग में सामान डाले जा रही थी... और अपने ख्यालों में हजारों ख्वाहिशों को  समेटे जा रही थी...

माया ....... माया.... माया.... राधा तेज तेज किचन से आवाज लग रही थी..
माया- हां मां
राधा – बेटा ये बैग में रख ले कुछ खाने पीने की चीजे है... तेरे काम आएगी ....राधा ने एक बड़े से झोले में खाने पीने की चीजे भर कर दे दी थी...
माया ने झोले को उठाया और गुस्से से नीचे रख दिया
माया- इतना भारी है मां मैं कैसे ले जाउंगी
राधा- कूली कर लेना... पर ले जाओं  इतनी दूर जाना है तुम्हें.. वहां कैसे रहोगी क्या खाओगी.. वहां मैं नहीं रहुंगी....
माया- थके हुए अंदाज में दे दीजिए आप मानेंगी तो है नहीं...

माया ने झोले को खींचते हुए किचन से बाहर निकल गयी...एक साथ इतना सामान कैसे जाएगा.... माया मन ही मन परेशान हो रही थी.... तभी रजत रंजित और रौशन माया को घेर कर खड़े हो जाते है.... माया अपने भाइयों से बहुत प्यार करती थी.... उनको अपने इर्द गिर्द देख कर माया थोड़ी सी  emotional  हो गई थी...

रजत- दीदी आप जा रही है अब हम लोग किसके साथ लड़ाई करेंगे
माया- अब तुम लोग आपस में लड़ना... कह कर माया ने तीनो को गले लगा लिया...रौशन खुद को अलग करते हुए बोला.. ये सब बात तो ठीक है आप मेरे लिए वहां से क्या भेजेंगी...
माया- कुछ नहीं जब मेरी जॉब लग जाएगी... मैं तुम तीनों को अपने पास बुला लूंगी... फिर हम एक साथ रहेंगे... और झगड़े करेंगे..
माया की बाते सुनकर सब हंसने लगे.... 

मां जल्दी करों मेरी ट्रेन का टाइम हो रह है..... पापा भी नहीं आए अभी तक कब आएंगे ..
रजत- पापा स्टेशन ही आएंगे दीदी शॉप पर कोई नहीं है आज...
माया- ओह फिर मेरे पास तो बहुत थोड़े से पैसे है अगर पापा नहीं आए तो... माया का चेहरे पर चिंता की लकीरे आ गयी थी..
राधा- ऐसा कुछ नहीं होगा तुम बस अपने जाने पर फोकस करों पापा जरूर आएंगे...
रजत  और राधा ने माया का सामान उठा लिया और घर से बाहर आ गए... ऑटो-ऑटो रजत बीच सड़क पर खड़े होकर ऑटो रोकने लगा........
ऑटो वाला धीरे- धीरे रूकता लेकिन माया के पास का समान देखकर तेजी से आगे बढ़ जाता.....
रजत ऑटो रोकते रोकते थक गया और माया गुस्से से लाल  हो गई थी.... क्या मां इतना सामान है मेरे पास औऱ हम लोग इतने सारे एक साथ कैसे जाएंगे एक ऑटो में...
रजत- रूको अब मैं ऑटो नहीं रोकूंगा.... फटफटी रोकता हूं पीछे सामान आ जाएगा और आगे हम सब आ जाएंगे.... कह कर रजत हंसने लगा...
माया- ये सही आइडिया है अब हंसो मत जल्दी रोको फटफटी को
राधा- अब तुम लोग रूको मैं फटफटी रोकती हूं....
फाइनली माया द ग्रेट के लिए फटफटी मिल ही गयी.... और हर हर महादेव के बोल कर सब बैठ गए.. ऐसा लग रहा था... माया बैंगलोर नहीं जा रही है...बल्की पाकीस्तान से  लड़ने जा रही हो....
इलाहाबाद स्टेशन पर माया के पापा राकेश खन्ना माया के इंतजार मे खड़े थे... माया ने उनको दूर से ही देख लिया था...

राकेश- ये लो बेटा कुछ पैसे रख लो अपने पास.. और ये फोन भी ले लो...हमेशा फोन ऑन रखना.....पहुंच कर miss कॉल कर देना हम तुम्हें फोन कर लेंगे..... आज से तुम्हारी जिम्मेदारी औऱ बढ़ गयी है बेटा.....अब से तुम्हें ही अपना ख्याल रखना है... तुम्हें ही सही और गलत में फर्क तय करना होगा... तुम मेरा गुरूर हो इस बात को हमेशा अपने दिमाग में रखना.... तुम मेरा भरोसा हो मेरा मान हो....माया अपने पापा की बात को ध्यान से सुने जा रही थी वो नीचे की तरफ झुकी और पापा के पांव छू कर खड़ी हुई....बड़े ही गर्व के साथ अपने पापा की आंखों में आखें डालकर माया ने कहा...
माया- पापा आपकी हर बात मेरे लिए पत्थर की लकीर है... मैं इन्हें कभी नहीं भूलुंगी .. और हमेशा ऐसा काम करूंगी जिससे आप जब भी मेरा नाम ले आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाए...
माया ने राधा के पैर छुएं... अपने भाइयों के गले लगी और ट्रेन पर चढ़ गयी....
ट्रेन की रफ्तार के साथ साथ माया का बचपन... माया का परिवार... माया की पीहूं ......माया का शहर सब कुछ उससे दूर होता जा रहा था.माया की आंखों में आसूं  भर गए थे... उस एक पल में माया के दिमाग में यादों की तेज आंधी... चल रही थी... माया ने हनुमान जी को याद किया और प्रणाम किया... माया की आंखो से उसका परिवार ओझल हो चुका था........माया के दिमाग में पुरानी यादो और अपने ख्वाबों के बीच जंग चल रही थी....इन सब के बीच माया को ख्याल आया की वो पीहूं से ना बात कर पायी ना मिल पायी.....कोई नहीं अब पहुंच कर बात करूंगी....माया ने बर्थ पर अपना बिस्तर लगाया और मोबाइल में राहुल का नंबर  SAVE  करने लगी.. हर बार राहुल का नंबर डायल करती और काट देती.... माया के दिल में डर था पता नहीं राहुल उसका फोन उठाएगा भी या नहीं.... पता नहीं राहुल उसको फोन करेगा भी की नहीं... MISS  CALL  देख कर... इसी उलझन के साथ माया को नींद आ गयी......

next day (evening )
 माया बैंगलोर स्टेशन पर अपने चार चार   सामान के साथ खड़ी थी... दो बड़े बड़े बैग एक पर्स और हाथ में एक छोटा बैग... माया को समझ ही ना आ रहा था... कि कैसे बाहर जाएं.... इतने सामान के साथ ..माया की नजर कूली पर पड़ी....सुनो भइया...
कूली- जी मैम  what can I do for u….
माया- कूली को अंग्रेजी में बोलते देख चौक गई थी..... मन ही मन बोलने लगी.... साला यहां तो कूली भी अंग्रेजी बोलता है... एक हमारे इलाहाबाद में कोई अंग्रेजी में बात कर दे तो बड़ा ज्ञानी समझते थे सब उसको...
कूली- मैम  may I help u
माया- खुद को सम्हालते हुए....  yes yes I need  your help… first tell me whats your charges…
 कूली-  for this luggage I charged 200 rs
माया- omg its too much thanks a lot no need of your help  इतने मे तो मैं दो दिन खाना खा लूंगी    कह कर माया अपने दोनो  बड़े बड़े बैग को कंधे पर  लटकाया और पर्स और छोटे  बैग को हाथ में लेकर खड़ी हो गयी... उसका कंधा झुक गया था... इतने लंबे सफर  की  थकान उस पर इतने सामान का बोझ माया पसीने से भीग चुकी थी.... लेकिन माया के चेहरे पर एक खुबसूरत सी मुस्कान थी...उसके और राहुल के बीच अब कोई फासला नहीं था...  आज नहीं तो कल वो राहुल से जरूर मिल लेगी...सोचते सोचते माया धीरे धीरे अपने कदम बढ़ाती चली गयी....

स्टेशन के बाहर निकलते ही माया ने अपने घर miss call  किया .... और फोन को कस कर
पकड़ रखा था.. ना जाने कोई छीन ले गया तो माया क्या करेगी...
माया के घर वाले भी इसी इंतजार में थे कि कब माया पोन करें...
राधा ने माया को पलट कर फोन किया...
राधा- हां बेटा पहुंच गयी
माया- हां मां....
राधा – रास्ते में कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना....
माया – नहीं मां
राधा – ये लो अपने पापा से बात करों....
माया बिचारी सारे सामान के साथ एक जगह खड़ी हो गयी पहले सबसे बात कर लू फिर आगे बढ़ूंगी....माया का हाथ एक दम लाल हो चुका था...
राकेश- और बेटा ठीक हो ना तुम
माया- हां पापा सब ठीक है मैं हॉस्टल पहुंच कर आपको फोन करूंगी... बाकी रंजीत रजत रौशन ठीक है ना
राकेश- हां बेटा जाओ तुम आराम से किसी बात की tension  मत लेना...
माया- प्रणाम पापा
राकेश- खुश रहो बेटा हमेशा आगे बढ़ों....
माया ने फोन रखते ही फिर से सारा सामान अपने कंधे पर उठा लिया और आगे बढ़ गई....माया ने कैब रोका... और बैठ गयी जैसे ही माया थोड़ा  relax
हुयी उसने राहुल का नंबर डायल कर दिया... राहुल ने फोन नहीं उठाया...
माया ने दोबार राहुल को फोन किया...राहुल ने माया का फोन काट दिया... बस इस एक पल में माया निढाल हो गयी .. उसको लगा कि राहुल अब उससे नहीं मिलेगा... मैं जिसके लिए इतना लंबा सफर तय करके आयी हूं... वहीं आज मेरा फोन नहीं उठा रहा... माया एक मिनट के अंदर ही रोने रोने जैसी हो गयी थी.. कैब का ड्राइवर माया क  center mirror  से देखे  जा रहा था....
तभी माया के मोबाइल की घंटी बजी.... दूसरी तरफ राहुल था.....
राहुल – हैलो
माया राहुल का फोन देख कर कूद पड़ी थी अपनी ही सीट पर... उसे इतना बी होश ना रहा कि..... राहुल उसे हैलो बोल रहा है ..
राहुल – हैलो माया माया माया
माया- हां राहुल तुम मेरा फोन ही ना उठा रहे थे...
राहुल- अरे बाबा मैं बीजी था देख फोन तो किया हूं ना...
माया- राहुल सोचो मैं कहां हूं....
राहुल- कहां है तू...
माया – तुम्हारे शहर में.... माया की आवाज में एक अलग सी खुशी छलक रही थी...
राहुल- cool  तो तू आ ही गयी बैंगलोर....
माया – तुम मुझसे मिलने तो आओगे ना
राहुल – हां क्यों नहीं आउंगा....अपना address  भेज दे मुझे...चल अब मैं रखता हूं अपना ध्यान रखना
माया- बाय राहुल
राहुल – बाय माया
माया ने जैसे ही फोन रखा सोचने
लगी की काश राहुल उसका  boy friend  जैसे  friend  होता.. तो उसके लिए  station आता उसका ध्यान रखता जैसे बाकी सब लड़कियों के  boy friend  करते है... खैर कोई बात नहीं आज नहीं तो कल राहुल मेरे साथ होगा....और सिर्फ मेरा होगा... मैं सबसे अलग मेरा प्यार भी सबसे अलग .......

 to be continued 














4 comments:

Unknown said...

Nice tulip vary interesting

Unknown said...

Nice tulip vary interesting

tulika singh said...

Tx dear keep reading

Ocean said...

👌....👍