Thursday, 16 March 2017

MAYA "THE UNFOLD LOVE STORY " CHAPTER -18

CHAPTER -18
माया का राहुल अपनी शेरवानी लेकर मॉल से निकलने लगा..... माया... वहीं रूक गई ... और राहुल को जाते हुए देखने लगी..... (मॉल में बैकग्राउंड सॉंग बजता है )

(जब सामने तुम , आ जाते हो
क्या जानिये क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है i, कुछ खो जाता है
क्या जानिये क्या हो जाता है.
आ कर चले न जाना , ऐसे नहीं सताना
दे कर हंसी लबों को , आँखों को मत रुलाना
देना न बेक़रारी दिल का करार बन के
यादों में खो न जाना तुम इंतज़ार बन के , इंतज़ार बन के
 हां हां जब सामने तुम , आ जाते हो
क्या जानिये क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है , कुछ खो
जाता है
क्या जानिये क्या हो जाता है)

इस गाने से माया को बेहद लगाव था माया को ऐसा लगा जैसे पूरी कायनात इस वक्त रो रही है... उसके राहुल के जाने से ... राहुल अभी कुछ दूर ही गया था... लेकिन माया की नजरों से ओझल नहीं हुआ था.... तबी राहुल पलट कर माया को देखता है... माया भी राहुल को देखती है... और बिना वजह फिर से रोने लगती है... राहुल माया की तरफ वापस आता है.. माया अपनी आखों पर चश्मा लगा लेती है वो नहीं चाहती की राहुल उसके आंसू देखे...
राहुल – माया मुझे कुछ दूर तक ड्रॉप कर देगी...
माया-  हां राहुल क्यों नहीं चलो तुम बाहर वेट करों मैं अपनी कार पार्किंग से निकाल कर आती हूं.... माया को लगा चलो कुछ वक्त और सही अपने प्यार के साथ गुजरेगा.... राहुल माया की बगल वाली सीट पर बैठ जाता है...माया ने अपना चश्मा अब तक नहीं उतारा था....
राहुल माया को एक पल के लिए देखता है... और बोलता है तू तो एक दम बदल गयी माया
माया- हंसते हुए credit goes to u dear
राहुल को समझ नहीं आता माया को क्या  reply  करें थोड़ी दूर पहुंचते ही राहुल माया को कार रोकने को बोलता है और कहता है
राहुल – मैं यहां से चला जाउंगा... आज शाम ही मेरी दिल्ली की फ्लाइट है....तू भी दिल्ली ही  क्यों नहीं शिफ्ट हो जाती तेरा घर भी पास हो जाएगा...
माया- बस कोई जॉब मिल जाए तो हो जाउंगी... मुझे भी ये शहर पसंद नहीं है....
राहुल- बाय माया अपना ध्यान रखना और मैं तुझे फोन करूंगा
माया- ठीक है राहुल मैं तेरे फोन का वेट करूंगी ....
राहुल के जाते ही माया भी कार के स्टेयरिंग पर अपना सर रख कर आखें बंद कर लेती है......
(FLASH BACK OUT)
मां मां अरे उठोगी भी शाम से अंधेरा हो गया तुम यहीं छत पर बैठी हो चलो नीचे चलते है... तुम्हारा कब से इंतजार रही थी मैं चलो ना मां मुझे भूख लगी है ...
आद्या की बातों को सुनकर माया को होश आया कि वो तो राहुल की बातों में ऐसे गयी जैसे कल की ही बात हो....
माया ने जल्दी जल्दी  छत पर फैले हुए कपड़े को समेटा और भागती हुई नीचे गई..... जैसे वो जानती थी..... अगला पल उसके ऊपर भारी पड़ने वाला है.......आदित्य  के आने का वक्त हो चला था....
लंबाई 6 फिट चेहरे पर रोबीली सी मुछं आवाज में कड़क पन वक्त के पांबद और घर के खाने के शौकीन ....हर वक्त ऐसे रहना जैसे अभी सीमा पर जंग शुरु होगी और कैप्टन आदित्या जंग के लिए निकल पड़ेगें....एक वक्त था जब आदित्या की यही अदा देखकर माया ने शादी के लिए हां बोला था.....टिपिकल अंरेंज मैरिज हुई थी.... माया की....लेकिन माया एक नामी  मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग हेड. थी.. अच्छी खासी पे स्केल थी उसकी उस वक्त में तो परिवार वालों ने माया की मर्जी को ज्यादा तवज्जों दी....जहां उसने हां कहा वहीं उसकी शादी हुई....थी.....माया ने अपनी जिंदगी अपने शर्तों पर जीया आदित्या ने कभी उसको रोका टोका नहीं वो जो चाहती थी वो करती थी....

लेकिन आद्या के होने के बाद जैसे वक्त बदल सा गया था माया का..आद्या के होने के बाद माया को जैसे उसका बचपन वापस मिल गया था..... लेकिन वक्त के साथ साथ माया की शादी और आदित्या दोनो बेरूखे हो गए थे..... 
सेना से  रिटायर होने के बाद आदित्या  माया के साथ कम और अनाथ आश्रम के बच्चों के साथ  ज्यादा वक्त बितता था.....एनजीओं में बच्चों का ध्यान रखना उनको पढ़ाना उनके साथ खेलना और शेयर मार्केट पर पैनी नजर रखना आदित्य का रोज का काम था..... और आद्या कॉलोज की पढ़ाई और मेडिकल की कोचिंग में ही बिजी रहती थी......माया ने आद्या के होने के साथ ही जॉब छोड़ दी थी.... वो आद्या की परवरिश खुद करना चाहती थी.....उसके बचपन में खुद को देखना चाहती थी ..... लेकिन इसी चाहत नें माया को घरेलू महिला बना दिया और आज ये वक्त है कि माया के परमानेंट साथी है सिर्फ उसके घर के काम और सिर्फ काम....

अब भी माया के ज़हन में रत्ना की कही बाते ही चल रही थी....... सही तो थी रत्ना अधूरे प्यार का दर्द जिंदगी भर के लिए नासूर बन जाता है.... शायद उस वक्त अगर मैं रत्ना पर हंसती नहीं तो मेरे साथ वो नहीं होता.....जिसके लिए मैं बनी ही नहीं थी.....सोचते सोचते माया के चेहरें पर दर्द भरी लकीरे उभर गयी थी...

माया को आज भी याद है अपनी शादी का वो दिन जब वो दुल्हन बन कर तैयार बैठी थी... बारात दरवाजे पर थी लेकिन माया के दिल में सिर्फ राहुल चल रहा था... काश मैं राहुल को दिखा पाती देखो राहुल मेरी ये चुड़ियां मेरा ये लंहगा मेरी ये पायल.... काश मैं दिखा पाती देखो राहुल झल्ली सी रहने वाली माया आज कैसी लग रही है.... काश मैं राहुल को बोल पाती राहुल अब भी वक्त है मुझे अपने पास बुला लो.... लेकिन कहते है ना जिंदगी में अगर काश ना होता तो बहुत सी उलझन खुद सुलझ जाती......लेकिन माया की ख्वाहिश एक काश में लिपट कर रह गयी थी.....

माया अब भी राहुल से  connected थी कभी फोन पर तो कभी सोशल साइट्स पर वो राहुल से हफ्ते में लगभग 4 दिन तो बात कर ही लेती थी.... लेकिन राहुल और माया का क्या रिश्ता था.. इसका जवाब आज तक राहुल नहीं दे पाया था.... राहुल की भी शादी अरेंज मैरिज हुयी थी.... माया अब राहुल से काफी फ्री थी.....आज भी माया घर के काम निपटा कर राहुल के साथ चैटिंग कर रही थी
माया राहुल की सारी बाते सुनती थी अपने idea  देती थी लेकिन कभी अपना दर्द उससे शेयर नहीं करती....
माया – हाय राहुल
राहुल – जी मैम कैसी है आप
माया- क्या बात है इतने सालो से हम बात कर रहे है और तुम मुझे मैम बोल रहे हो.... ऐसे ही मना कर दो कि मुझसे बात नहीं करनी
राहुल- lol
माया- क्या  lol
माया – अच्छा एक बात बताओं राहुल तुम्हे अपना वादा याद है ना
राहुल- कौन सा माया
माया- तुम भूल गए ना
राहुल – lol  क्या
माया- मुझसे एक बार मिलने का वादा किया था तुमने
राहुल – lol
माया गुस्से में आ गयी
माया- Lol  पर जिंदगी रूक सी गई है
हम हंसते है तब भी lol
 हम अपना गम छिपाते है तब भीlol
 हम जब दिल की बात नहीं कह पाते तब भी lol
 Lol ने खुद में सबको समेट दिया
Lol नहीं होता तो ज़जबात फुदक फुदक कर बाहर आ जाते
Lol नहीं होता तो खुशफहमी के शिकार ना बन पाते
Lol  नहीं होता तो हमारी तुम्हारी आधी अधूरी बाते कब की खत्म हो जाती
 Lol क्या क्या लिख गयी मैं lol  करते करते
राहुल – क्या बात है माया तू तो मल्टी टैलेंन्टेड निकली
माया- lol
माया – अच्छा अब बता भी दो कब मिलोगे
राहुल – यार हम अब बूढ़े हो चुके है
माया- हैलो- बुढ्ढे होगे तुम मैं नहीं I am young as I was…
 राहुल – हा हा हा ये तो सही बोला तूने...
माया – चलो फिर बता देना मेरे पास वक्त बहुत कम है राहुल
राहुल- किस बात का वक्त कम है माया
माया- मैं मिलने से पहले मर गयी तो
राहुल- हंसते हुए ना बाबा ना मैं आउंगा.... अच्छा सुन मैं तुझे बताता हूं कब मिलने आउंगा.. अभी मुझे 3 दिन के लिए US जाना है फिर मैं  INDIA आउंगा और पक्का वादा दिल्ली उतरते ही सबसे पहले तुझसे मिलूंगा...
माया- ठीक है राहुल अब मैं जाती हूं....
राहुल – बाया माया अपना ध्यान रखना
माया- तुम भी
माया ने अपना  I PAD  साइड में रखा और अपने माथे के पसीने को पोछने लगी.. अचानक माया को याद आया उसको अपनी दवा खानी है वक्त हो गया है....अपनी पूरी ताकत लगा कर माया उठी और बिस्तर के नीचे से दवाई निकालने लगी......माया पिछले पांच साल से यूट्रस में कैंसर होने की वजह से बहुत परेशान रहती है .... लेकिन ये बात उसने ना तो आद्या को बतायी और ना ही आदित्या को..... आदित्य को बताती भी तो किस हक से उसके पास माया के लिए एक दम वक्त नहीं होता.... औऱ आद्या आज कल अपने मेडिकल की तैयारी में लगी थी.... माया नहीं चाहती थी कि उसकी बेटी का कोई भी नुकसान हो... माया अपना इलाज खुद करा रही होती है....लेकिन सबसे छुप कर.... माया का दिल कई बार किया कि ये बात वो राहुल से शेयर करें लेकिन राहुल का बेफिक्र अंदाज आज तक कायम था....माया सोचते सोचते सो जाती है ....

अगली सुबह
मां चाय पी लो उठो मां सुबह हो गई... आज मेरा पेपर है.....

आद्या ने माया को झकझोरा और माया हड़बड़ा कर उठी

हा बेटा गुड मॉरनिंग एंड सॉरी आज लेट हो गया.....

चाय की दो चुस्की ली माया ने औऱ लग गई किचन के काम में......

आद्या का नाश्ता और आदित्य का जूस बना कर ही उसकी सुबह  रोजाना होती थी..... लेकिन आज थोड़ा लेट हो गय़ा तो माया मशीन की तरह भाग भाग कर काम खत्म कर रही थी....

आज तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है क्या.......

आदित्य ने बड़ी ही बेपरवाही से पूछा.......

 नहीं नहीं मैं बिल्कुल ठीक हूं.......

माया ने आदित्य की तरफ बिना देखे बोला

 वो जानती थी की आदित्य सिर्फ फॉरमेलटी में पूछ रहे है....

वो फिर से अपने काम में लग गई......और 11 बजते बजते पूरा घर खाली...... रह गए तो सिर्फ माया के अधूरे काम और उसकी यादे......अपने चश्में को साफ कर  बिस्तर के एक कोने में रख कर माया लेट गयी...... आज वो कहीं नहीं जाना चाहती थी.... ना किसी से मिलना चाहती थी.......सिर्फ अपना आंखों को बंद कर वो अतीत में जीना चाहती थी........

TO BE CONTINUED




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