Wednesday, 1 March 2017

Maya "The Unfold Love Story" CHAPTER-10

LOCATION- (market)

फैंसी ज्वेलरी की शॉप पर माया औऱ पीहूं आइसक्रीम खाते हुए पहुंचे....दोनो जैसे ही शॉप के अंदर दाखिल होने वाले थे...कि दुकानदार ने रोक दिया..

दुकानदार- मैम प्लीज आइसक्रीम खाकर फिर अंदर आइए.....
माया और पीहूं  सड़क पर ही रूक गए...माया पीहूं को गुस्से से देखने लगी.. और बोली..

माया- मैने कहा था ना कि यहां आने की कोई जरूरत नहीं है... मुझे ये सब नहीं खरीदना है ..

पीहूं- तु रूक ना पहले अपनी आइसक्रीम खत्म करते है... फिर अंदर चलते है आज माया द ग्रेट की शॉपिंग हो कर रहेगी...

माया- अरे यार तू क्यों नहीं समझ रही... सुन मुझे अब साड़ी ही नहीं पहननी... इतने ड्रामें मुझसे handle  नहीं होंगे ..

पीहूं – तेरी हर बात सुनती हूं ना.... तू भी मेरी सुन... फेरवेल वाले दिन राहुल से मिलना है ना... क्या पता वो उस दिन तुझे प्रपोज कर ही दे..

माया- एक तो साला ये राहुल के चक्कर में मैं पता नहीं क्या से क्या हो गई हूं... चल अच्छा चले अंदर...

पीहूं माया की बात को सुनकर हंसने लगी...और दुकान के अंदर दाखिल हो गए...

पीहूं – भइया जरा चूड़ियां दिखना इनके लिए.... और कुछ कान के बूंदे भी...

माया – भइया छोटे छोटे बूंदे दिखना ऐसा ना हो की दूर से बस  बूंदे ही दिख रहे हो.

पीहूं – तू रूक बस मुझे देखने दे ऐसा कुछ नहीं लेंगे.. जिससे तू  comfortable feel  ना करें

माया पीहूं की बात सुनकर एक तरफ चुपचाप खड़ी हो गयी...उसकी नजरे पूरे दुकान को  scan  कर रही थी.. पीहूं ने माया के हाथ में गोल्डेन कलर की लटकन वाली चुड़ियां डाली औऱ कान में छोटे छोटे बूंदे डाले फिर पूछा
देख कैसा लग रहा है..
माया- हाहाहाहा कॉलेज की डॉन के हाथ में चुड़ियां.... अबे ये तो कुछ ज्यादा ही बज रही  रही है....

पीहूं- पागल है तू इतना हाथ हिलाएगी... तो खनकेगी ही...
माया पीहूं की बात सुनकर हंसने लगी...

माया- पीहूं मैने अपनी पूरी life में ये पहली बार चुड़ियां खरीदी है... I never ever wear चुड़ियां and all stuff…

 पीहूं – लाइफ में पहली बार तुझे प्यार भी  तो हुआ है.....

माया पीहूं की बात सुनकर शरमा गयी... हा ये तो है... देख पता नहीं इतनी मेहनत हम दोनो कर रहे है वो देखेगा भी की नहीं.... वैसे कल कॉलेज कब पहुंचना है...माया अपनी चुड़िया और कान के बूंदो को पर्स में रख कर पीहूं से सवाल करने लगी....

पीहूं – रूक पहले इनको पैसे तो दे दूं

माया- पैसे मैं दूंगी पीहूं ये मेरी लाइफ की पहली चुड़ियां है इन्हें मैं बड़ा सम्हाल कर रखूंगी....ये लो भइया जितने हुए है काट लो माया ने 100 का नोट दुकानदार को पकड़ाते हुए बोला...
पीहूं ने बचे हुए पैसे लिए दुकानदार से और  माया का हाथ पकड़ कर बाहर निकल गयी...
माया- यार पीहूं तूने बताया नहीं.. कल कब पहुंचना है... मैं कैसे तैयार होउंगी..
तुम कहां तैयार होगी... मैं इतनी दूर साड़ी पहन कर कैसे आउंगी....लोग मेरा मजाक तो नहीं बनाएंगे.... राहुल मुझसे मिलने कैसे आएगा.. मैने तो उसको कुछ भी नहीं बोला...
पीहूं – अरे मेरी मां एक मिनट सांस तो लेले.. इतने सवाल  एक साथ
माया- तो क्या करूं
पीहूं – सुनो अब कल 12 बजे तक पहुंचना है....घर से तैयार होकर आना तुम मैं भी घर से ही तैयार होकर आउंगी.... कुछ गड़बड़ नहीं होगा...औऱ राहुल तुमसे मिलने जरूर आएगा.... promise  है मेरा तुमसे.... और कोई सवाल

माया – नहीं अब मैं घर जा रही हॆं
पीहूं- क्यों आज तुम कोचिंग पढ़ाने नहीं जाओगी...
माया- नहीं घर जाकर मां की साड़ी को प्रेस कराना है... ब्लाउज चेक करना है...
पीहूं- तूने ये सब अभी तक नहीं किया है
माया- नहीं
पीहूं- धन्य हो तुम..... कल पहनना है और साड़ी रेडी नहीं करायी....
माया- अरे जा रही  हूं ना कल पहन कर ही आउंगी.... अब  bye …तुम यहां से रिक्शा कर लो...मैं जा रही हूं.. कह कर माया अपने घर को निकल गयी... पूरे रास्ते वो यहीं सोचती रही की कल का दिन उसके लिए कितना खास होने वाला है.... कल पहली बार वो साड़ी पहनेगी.. राहुल उसको देखेगा....wow वाली feeling  होगी कल......

Next day morning  (location  माया  house)
गुलाबी रंग की साड़ी...खुले हुए बाल हाथ में चुड़ियां कान में सुनहरे बूंदे... होठो पर हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक माथे पर एक छोटी सी काले रंग की बिंदी....राधा माया को निहारे जा रही थी...
राधा – वाह आज तो मेरी बेटी ऐसा लग रहा है कि बड़ी हो गयी है...
माया अक्खड़ अंदाज में राधा की तरफ पलटी....और बोला क्या मतलब है मां
राधा- अरे तुम अच्छी लग रही हो
माया- साड़ी में पिन अच्छे से लगा दी है ना ऐसा तो नहीं कि मेरे साथ कॉलेज में कांड हो जाएगा...
राधा- कुछ नहीं होगा.. बस आराम से चलना ऐसा नहीं की साड़ी पहन कर दौड़ने लगे.. या फिर कूदने लगे...राधा माया की हरकतो से परिचित थी इसलिए उसको समझाएं जा  रही थी ...
माया- ऐसा क्यों लग रहा है कि जैसे मैने साड़ी ना पहनी हो जंग पर जा रही हो.. माया थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए.. राधा से कहने लगी...
राधा- हंसते हुए बेटा तेरे लिए तो किसी जंग से कम भी नहीं है..
माया- इसिलए मैं अपने बैग में एक सूट रख कर ले जा रही हूं.. ज्यादा दिक्कत हुई तो मैं चेंज कर दूंगी ... अब मैं जा रही हूं मैं टाइम से वापस आ जाउंगी...BYE
राधा – BYE बेटा अपना ख्याल रखना...
राधा माया को आखिरी पल तक निहारें जा रही थी... आज माया बिल्कुल अलग लग रही थी बेटियां कब बड़ी हो जाती है खबर ही नहीं होती.. राधा अपने मन में यहीं बात सोचे जा रही थी

LOCATION (COLLAGE)
माया ऑटो से  उतरती है... और कॉलेज में दाखिल होती है..माया की चाल को देख कर ऐसा लग रहा था  कि ....राधा की सिखाई  कोई भी बात माया के पल्ले नहीं पड़ी थी... तेज तेज कदमों से माया चले जा रही थी .. साड़ी का पल्ला कभी जमीन पर झाड़ू लगाता तो कभी माया के हाथ में नजर आता...माया ने साड़ी के पल्ले को बहुत ही घटिया तरीके से अपने हाथ में फंसा रखा था.. जिससे वो झाड़ूं लगाना तो बंद कर चुके थे... लेकिन पीछे से माया की साड़ी ऊंची हो गयी थी... पर माया तो माया थी उसको इन सबसे कोई मतलब नहीं वो बस पीहूं को खोज रही थी...उसने दूर से देखा पीहूं को सुर्ख लाल रंग की साड़ी खुले हुए बाल नजाकत के साथ साड़ी का पल्ला हाथ में लिए हुए पीहूं किसी से बात कर रही थी...पीहूं साड़ी में कयामत गिरा रही थी...खुबसूरती का आलम ये था कि हर लड़की उसको एक बार  देख कर ही वहां से गुजरती....माया अपनी साड़ी अपना पर्स सब सम्हालते हुए किसी तरह पीहूं के पास पहुंची...
पीहूं ने जैसे ही माया को देखा उसका मुंह खुला का खुला रह गया..माया बला की खूवसुरत लग रही थी...पीहूं क्या किसी ने भी माया को ऐसे नहीं देखा था... और माया अपने हाथ की चुड़िया बजा बजा कर पीहूं को दिखाए जा रही थी...
माया- देख तुने जैसे कहा था मैं वैसे तैयार हो कर आयी हूं...
पीहूं- हां आज तुम सबसे अच्छी लग रही हो....
माया- सब ठीक है ना बेवकूफ तो नहीं लग रही ना
पीहूं – बिलकुल नहीं बस इधर आओं मैं तुम्हारा पल्लू सही कर देती हूं... तुमने इससे पूरा झाड़ू लग डाला है...
माया- पीहूं तूने मुझसे कुछ कहा था याद है ना
पीहूं – हां याद है... और आज होकर रहेगा....
माया- सच में
पीहूं – हां मैने नरेंद्र को बोला है वो राहुल को लेकर आएगा...
माया- ओके ...  BUT yar sound bad na   मैं किसी लड़के के लिए इतना तैयार हुई हूं..

पीहूं -  sound good   बुद्दु कोई भी लड़की पहली बार किसी लड़के के लिए ही तैयार होती है... और राहुल कोई लड़का नहीं तेरा पहला प्यार है... इसिलिए तू ये सब मत सोच चल बाहर चलते है... यहां के ड्रामें तो शाम तक चलेंगे... हम थोड़ी देर में वापस आ जाएंगे... और राहुल ने अगर आज तुझे प्रपोज कर दिया तो पिर मेरी तरफ से सबको पार्टी....

पीहूं  की बाते सुनकर माया के आंखों में आसूं आ गये थे....वो सोचने लगी पीहूं उसके लिए कितना सोचती है.... मुझे इतना प्यार तो कोई नहीं करेगा जितना पीहूं मुझसे करती है..
पीहूं – क्या हुआ माया...
माया- कुछ नहीं यार हम इतना ज्यादा नहीं सोचेंगे अगर राहुल मिलता है तो ठीक नही तो कोई बात नहीं...
पीहूं – अच्छा ठीक है अब चले
माया- हां चल चलते है चुपके से जाना होगा.. नहीं तो पूरी मंडली साथ में टंग जाएगी...
माया पीहूं का हाथ पकड़ कर धीरे धीरे क़ालेज के बाहर निकल गई.. और उसी रेस्तरां में पहुंच गए जहां उसने और राहुल ने डेट की थी... माया पीहूं को खीचकर उसी टेबल के पास ले गयी... जहां वो राहुल के साथ बैठी थी....
माया- हम सब यहीं बैठेंगे
पीहूं  - क्यों
माया- यही पर राहुल और मैं दोसा दोसा खेल रहे थे
पीहूं- ओह अच्छा जी यही है वो जगह जहां आप और वो वो और आप....
पीहूं की बाते सुनकर माया शरमा गयी... लगभग आधे घंटे का इंतजार करते करते.... नरेंद्र और राहुल रेस्तरा के अंदर आए.. जो माया अभी तक उछल कूद रही थी बक बक किए जा रही थी...उस माया की बोलती एक दम बंद.... नजरें नीची और दोनो हाथो से साड़ी के पल्ले को खींचे जा रही थी... पिन ना लगा होता तो पक्का अब तक साड़ी हाथ में होती जिस हिसाब से माया साड़ी को खींच रही थी ... माथे पर पसीने की बूंदे टपकने लगी थी... गुलाबी होठ सूखने लगे थे...
माया की हालत देख कर नरेंद्र हंसने लगा औऱ बोला
नरेंद्र- हाय माया
माया- हाय नरेंद्र
नरेंद्र- ये तुम्ही  हो ना या तुम्हारी कोई बहन है जो आज आय़ी है
माया- क्या बकवास है मैं तुम्हें ना दिख रही... माया थोड़ा सा  comfortable होते हुए नरेंद्र को डाटने लगी...
राहुल – हाय माया आज तुम मुझे हैलो भी नहीं बोलोगी
माया – हाय राहुल माया की आवाज कॉंप रही थी वो पूरे आत्म विश्वास के साथ राहुल को हाय भी नहीं बोल पा रही थी...
राहुल- हाय पीहूं तुम बहुत अच्छी लग रही हो इस साड़ी में
पीहूं – thanks  राहुल और माया कैसी लग रही है...
राहुल थोड़ा  uneasy  सा हो गया  जैसे  राहुल को ये उम्मीद पीहूं से नहीं थी वो ऐसे पुछ देगी
राहुल – माया तो आज पहचान में ही नहीं आ रही है...मुझे तो दूर से लगा आज तुम किसी और के साथ आयी हो
माया राहुल की बात सुनकर नजरे ऊपर की और बोलने लगी
माया- इतनी लंबी चौड़ी लड़की तुम्हें दूर से कोई और दिख रहा है...
राहुल – हंसते हुए मैं ऐसे नहीं बोलता तो तुम फिर normal  behave  नहीं करती
 Common   maya  u look nice…
माया राहुल के मुह से simple सा nice सुनकर भी खुश हो गयी थी.. अब उस लगने लगा था कि राहुल उसे पसंद करता है...
पीहूं .. राहुल और माया की बाते सुनकर नरेंद्र के बगल में जाकर खड़ी हो गयी और ब राहुल से बोला
पीहूं- तुम लोग बाते करों मैं और नरेंद्र अभी आते है... कुछ ऑडर करके
राहुल – पीहूं ऑडर मैं यहीं से कर दूंगा...
पीहूं – राहुल just chill  बैठो हम दोनो अभी आते है...
राहुल- its ok
राहुल माया के सामने बैठ गया... और माया  अपनी नजरों को और नीचे झुकाएं जा रही थी... वो राहुल से नजरे भी नहीं मिलना चाहती थी...औऱ ना कुछ बोलना चाहती थी.. उसके मन में डर था कहीं उसका ख्वाब ख्वाब ही रह गया तो राहुल अगर उसे प्रपोज नहीं किया तो वो टूट जाएगी....
राहुल- माया ऊपर भी देखोगी
आज राहुल की आवाज माया को किसी अपने जैसी लगी ..
माया- अरे कुछ नहीं बस साड़ी ठीक कर रही थी बोलो कैसे हो तुम माया खुद को सम्हालते हुए बोलने लगी
राहुल – मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है
राहुल की बात सुनकर माया की धड़कने बढने लगी.. और वो पीहूं पर गुस्सा करने लगी... काश पीहूं यही होती पता नहीं कहां चली गयी मैं कैसे manage  करूंगी... पता नहीं क्या बोलने वाला है... माया के अंदर एक पल में हजारों सवाल दौड़ने लगे थे...
राहुल- माया ...
माया- हा राहुल बताओं क्या जरूरी बात है...
राहुल – माया तुम बहुत अच्छी लड़की हो... सबसे अलग शायद इसिलिए तुम मेरी दोस्त हो
माया- अच्छा किया राहुल बता दिया कि मैं तुम्हारी दोस्त हूं
राहुल –( हंसते हुए) मैं बोलता कम हूं ना तुम तो जानती हो ..
माया- हां कोई नहीं बात क्या है बोलो कोई problem  है
राहुल- माया मुझे तुमसे कुछ कहना है..



 To be continued

1 comment:

Ocean said...

Nice....👌
Now little suspense creates...